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अथ स्मार्ट डिजिटल मरीजनामा

बहुत दिनों से बीमार पड़ने की हार्दिक इच्छा प्रसव पीड़ा की तरह कुल – कुला रही थी । मैंने बीमारों के शानदार ठाठ देखे हैं । पड़े रहो आराम से ! पांच -पांच तकियों को घेरे मजे से फरमाते रहो बीमारी । न किसी ऑफिस जाने का चक्कर न कोई काम करने का झंझट ! पास के स्टूल पर सेव , केले , मौसम्मी जैसे फलों का ढेर । सामने लगा फ्लैट टीवी ! साथ ही तकिए के पास पड़ा स्मार्ट मोबाइल फोन 4 जीबी डाटावान नेट पैक के साथ । घुसे पड़े रहो मोबाइल संग फेसबुक और व्हाट्सएप में ! आपको कोई कुछ नहीं कहेगा । मनचाहा खाओ और पड़ जाओ बिस्तर में । अहा ! क्या मजा है बीमार होने का ! यही सोचकर हम बीमार पड़ने की जुगत में लग गए ।

एक बीमारी की जुगाड़ करने के लिए न जाने कहां – कहां घूमना पड़ा । भटकते – भटकते आखिर एक दिन यह अवसर आ ही गया । नियम से सड़क पर चलते हुए एक प्रतापी ड्राइवर ने हमारी टांग को शहीद कर दिया । घटनास्थल से हमें ठेले में ठेलकर अस्पताल पहुंचाया । परिजनों द्वारा जब 5 दिन बाद हमें घर लाया तो एक ऑटो में हम हमारे शहीद टांग को प्लास्टर ऑफ पेरिस के खोल में छुपाए कराने में व्यस्त थे । दूसरे ऑटो में प्यारी टांग के एक्स-रे की पोटलियां और दवाई के कार्टून थे । तो तीसरे ऑटो में विभिन्न तरह की जांच रिपोर्टों से भरे हुए बोरे रखे हुए थे । हमें घर की पोल में ही पटक दिया गया । बिस्तर के आसपास दवाइयों , नाना – नाना प्रकार के परीक्षण की रिपोर्टों व फल – फूल आदि से हमें सजा दिया गया ; ताकि हम एक उत्तम कोटि के बीमार लगें ।

अब मेरी कुशल क्षेम पूछने आने वालों का तांता लगा था । बड़े मजे से वे मेरी बीमारी का आनंद लेते । मेरे पुराने अनुभवों के आधार पर मैंने कुशलक्षेमबाजों की सुविधा के लिए घर में पूरी व्यवस्था कर दी ; ताकि कोई दुविधा नहीं रहे । इसके तहत सर्वप्रथम एक बड़ा सा ब्लैक बोर्ड मंगवाया । पड़ोसी रामलाल जी मास्टर को पटाकर सरकारी स्कूल का बोर्ड घर पर रखवाया । बोर्ड पर चॉक गीली करते हुए उस पर टांग टूटने का एक शब्द चित्र बना दिया । मुझे मालूम है कि कुशल क्षेम बाज का पहला प्रश्न ही यही होता है कि – ‘यह सब कैसे हुआ ।’ बार – बार घटनाक्रम का विवरण देते – देते मेरी जुबान घिस न जाए इसलिए श्यामपट्ट पर घटनास्थल से लेकर घर आने तक टांग टूटने का सचित्र विवरण लिख दिया । चार्ट पर स्केच पेन से मेरी टांग टूटने संबंधी छह – सात नामांकित चित्र भी बना दिए । जो कुशल क्षेमबाज पढ़ने में असमर्थ हो ; उसके लिए एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनवा दी गई । जिसे बाद में यूट्यूब पर अपलोड कर दिया गया था ; ताकि दुनिया भर के सारे कुशलक्षेमबाज मेरी टांग टूटने की घटना से ज्ञान प्राप्त कर उसे व्हाट्सएप , फेसबुक आदि पर पोस्ट कर सके । उनके कमेंट रिसीव करने के लिए अन्य सारी व्यवस्था भी कर दी । मोबाइल में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर दी गई जो मेरी बैशाखनंदिनी आवाज में थी ।

एक जानकार को मैंने पहले ही बुक कर लिया था । उसने समय पर मेरे टांग टूटने के विभिन्न डिजिटल ग्राफ कंप्यूटर पर बना दिए । घटनाक्रम का लाइव विवरण भी ग्राफिक तरीके से संजो दिया । मसलन मेरा सड़क के बांई ओर चलना और पीछे से एक ट्रक का आना समय – 10:45 बजे , मौसम साफ , तापमान 35 डिग्री सेल्सियस । एक मिनट में ट्रक द्वारा मुझे कुचलना । समय -10:46 प्रातः , मौसम में थोड़ी नमी , आकाश में बादल , तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस । सब तरह की डिजिटल ग्राफीकल थ्यौरी को कंप्यूटर पर अपलोड कर दिया । इसमें सारी जानकारी भर दी । फिर कंप्यूटर को मेरे मोबाइल और घर में लगे एक प्रोजेक्टर से जोड़ दिया ; ताकि समय पर इसे चला कर लोगों को दिखा सकूं कि मेरी टांग टूटने का सबूत इस प्रकार है । साथ ही हॉस्पीटल की सारी रिपोर्टों की प्रदर्शनी भी लगा दी ताकि सबूतों की मौके पर ही जांच की जा सके व इसमें कोई संदेह न बना रहे । किस समय किस महान हस्ती के साथ मेरे जैसे टांग टूटने की घटना हुई व उसका इलाज कैसे हुआ ? वह अब कैसे है आदि का विवरण भी कंप्यूटर पर उपलब्ध करा दिया गया । कुशल क्षेम बाजों की सुविधा को ध्यान में रखकर फलों के कार्टून घर में पहले ही मंगवा लिए ; ताकि वे जूस आदि का सेवन कर सकें । हर कुशल क्षेम बाज एक उत्तम कोटि का डॉक्टर भी होता है ; लिहाजा उसके द्वारा बताई गई दवाओं के लिए दीवार पर एक बड़ी शीट भी लगा दी । एक रंगीन रेशमी धागे में 4 – 5 स्केच पेन भी लटका दिए । उसमें कॉलम बने थे – क्रम संख्या , नाम कुशल क्षेम बाज , योग्यता , सुझाई गई दवाइयां , बतलाई गई सावधानियां व विशेष विवरण । आगंतुकों को पूरी आजादी से चार्ट को भरने दिया जाता था । सब कुछ पूर्ण वैज्ञानिक रीती से होता । कुशल क्षेम बाज का आतिथ्य स्वीकार किया जाता ।

एक विजिटर्स बुक भी मेरे सिरहाने रख दी गई । अंत में उस विजिटर्स बुक में उनके मूल्यवान कमेंट्स भी लिखने के लिए कह देता । मेरे पूर्ण वैज्ञानिक कुशल क्षेम पूछने आने में कोई हड़बड़ी नहीं रहे इसलिए मैंने घर में प्रवेश और निकास के दो अलग-अलग रास्ते बना दिए । घर के बाहर बड़े – बड़े अक्षरों में लिखवा दिया – ‘मरीज अंदर है । कृपया इंतजार करें । आप अपनी लाइन तोड़कर अंदर न घुसें । कृपया एक-एक करके अंदर जाएं । मरीज कक्ष में घुसने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन जरूर करवा लें ।’ कुशल क्षेम बाजों की सुविधा के लिए एक लड़की को रिसेप्शनिस्ट के रूप में भी रख लिया जो रजिस्ट्रेशन का दायित्व पूरी तरह से संभालने में लगी हुई थी । कुशल क्षेम बाज आते व नियमानुसार रजिस्ट्रेशन करवाते । वहां वेटिंग रूम में मेरी टांग टूटने के पोस्टर भी लगवा दिए गए ताकि उनमें कुशलता ज्ञापित करने की उत्तेजना विधिवत बनी रहे । अंदर घुसते ही उन्हें चाय , कॉफी , जूस आदि सर्व कर दिया जाता । उनकी रुचि के माध्यम से उनको टांग टूटने की घटना का पूर्ण विवरण दिया जाता । उनके द्वारा सुझाई गई दवाइयों को शीट पर उतारता । उनके द्वारा सुझाई गई सावधानियों को रिकॉर्ड करता । उनकी तरफ से विजिटर्स बुक में कमेंट लिखवाता । … और उन्हें निकास के रास्ते की तरफ इशारा करता । फिर चिल्ला उठता नेक्स्ट ! और हां बाहर यह भी लिखवा दिया था लंच ऑवर दोपहर 1:00 से 2:00 बजे । इक्कीसवीं सदी के यूज एंड थ्रो रिलेशन में स्मार्ट और हाईटेक मरीज का डिजिटल मरीजनामा और क्या हो सकता है हुजुर !

रामविलास जांगिड़ , 18 , उत्तम नगर , घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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