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आफ्टर आल! दिल का मामला है

उमेश कुमार सिंह। विजय न्यूज़
आज के समय में सबसे अधिक पाए जाने वाले रोगों में सबसे अधिक घातक है- हृदय रोग. हृदय रोग को निम्न तरीके से रोका जा सकता है. लुधियाना स्थित सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया कुछ सुझाव दे रहे है जैसे कि

> अपने कोलेस्ट्रोल स्तर को 130 एम जी/ डी एल तक रखिए
कोलेस्ट्रोल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद हैं जिनसे जितना अधिक हो बचने की कोशिश करनी चाहिए. अगर आप के यकृत यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रोल का निर्माण हो रहा हो तब आप को कोलेस्ट्रोल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है. अपना सारा भोजन बगैर तेल के बनाएं लेकिन मसाले का प्रयोग बंद नहीं करें-मसालें हमें भोजन का स्वाद देते हैं न कि तेल. तेल ट्रिगलिराइडस होते हैं और रक्त स्तर 130 एम जी 1 डी एल के नीचे रखा जाना चाहिए.

> अपने तनाव को लगभग 50 प्रतिशत तक कम करें
इससे आप को हृदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि तनाव हृदय की बीमारियों की मुख्य वजह है.

> हमेशा ही रक्तदबाव को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें
बढ़ा हुआ रक्तदबाव विशेष रूप से 13/90 से ऊपर आप के ब्लाकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ायेगा. तनाव में कमी, ध्यान, नमक में कमी तथा यहां तक कि हल्की दवाएं लेकर भी रक्त के दबाव को कम करना चाहिए.

> अपने वजन को सामान्य रखें
आप का बॉडी मास इंडेक्स (बी एम आई) 25 से नीचे रहना चाहिए. इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्क्वायर के साथ घटाकर कर सकते हैं. तेल नहीं खाकर एवं निम्न रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं.

> नियमित रूप से आधे घंटे तक टहलना जरूरी
टहलने की रफ्तार इतनी होनी चाहिए जिससे सीने में दर्द नहीं हो और हांफे भी नहीं. यह आप के अच्छे कोलेस्ट्रोल यानी एच डी एल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में आप की मदद कर सकता है.

> 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें
यह आप के तनाव, तथा रक्त दबाव को कम करेगा. आप को सक्रिय रखेगा और आप के हृदय रोग को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा.

> भोजन में रेशेे और एंटी ऑक्सीडेन्ट्स
भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें. ये आप के भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेन्ट्ड्ढस के स्रोत हैं और एच डी एल या गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में सहायक होते हैं.

> अगर आप मधुमेह से पीडित हैं तो चीनी को नियंत्रित रखें
आप का फास्टिंग ब्लड शुुगर 100 एम जीध्डी एल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एम जीध्डी एल से नीचे होना चाहिए. व्यायाम, वजन में कमी, भोजन में अधिक रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए मधुमेह को खतरनाक न बनने दें. अगर आवश्यक हो तो हल्की दवाओं के सेवन से फायदा पहुंच सकता है.

लुधियाना स्थित सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया

> हार्ट अटैक से पूरी तरह बचाव
हार्ट अटैक से बचने का सबसे आसान संदेश है ‘और अधिक रूकावटें न होने दें. यदि आप इन्हें घटा सकते हैं, तो हार्ट अटैक कभी नहीं होगा’. कोरोनरी हृदय रोगों की बढ़ती चपेट ने अधिक विकसित नई-नई दवाइयों, कोरोनरी केयर यूनिटों, बाईपास शल्य चिकित्साओं, एंजियोप्लास्टियों आदि को विकसित करने में बड़ी मदद की है. फिर भी मुश्किलें कम होती नजर नहीं आतीं. आज हृदय रोगों का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है. हृदय रोगों में सबसे घातक है कोरोनरी हृदय रोग. अभी तक कोरोनरी हृदय रोग के उपचार हेतु जिस तरह का औषधीय प्रबंधन विकसित किया गया था. उससे अस्थाई राहत ही मिलती है. यह औषधियां कोरोनरी रक्तधमनियों में कोलेस्ट्रोल के अवरोधों को बिना प्रभावित किए छोड़ देती हैं. वे बीमारी का निदान कर पाने में सक्षम नहीं हैं.जीवनशैली में व्यापक बदलाव के साथ-साथ निम्नलिखित पांच उपाय अपनाकर उपचार का मार्ग प्रशस्त करता है. केवल इन पांचों उपायों को जीवन में उतार लिया जाए तो जीवनभर हृदय रोगों का प्रकोप नहीं हो सकता.

> शिक्षा
हृदय रोगी को ऐसी शिक्षा दी जाती है कि वह रोग की गंभीरता और प्रकृति के बारे में जान सके . साथ ही रोगी को यह भी पता होना चाहिए कि हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज, कॉलेस्ट्राल, ट्राईग्लिसिराइड्ड्ढस की क्या भूमिका है और इनका हमारे हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है? और बीमारी देने में इनका कितना योगदान है? हृदय रोगियों को हृदय रोग की जानकारी जरूर होनी चाहिए, जो 2 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्लॉकेज की दर से 30-40 वर्षों में बीमारी का रुप ले लेती हैं. धमनियों में ऐसी रुकावटें अगर 70-80 प्रतिशत तक पहुंच जाए तो बीमारी के लक्षण शुरू हो जाते हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि थोड़े परिवर्तन से इस वृद्धि को साल में एक प्रतिशत तक कम किया जा सकती है. हृदय के दोस्ताना व्यवहार को समझने की जरूरत है.

> खानपान राइट
हृदय रोगियों के खानपान में तेल बिल्कुल नहीं होना चाहिए. खाने में स्वाद तो मसालों से आता है जो आप के इच्छानुसार हो सकता है. टमाटर, प्याज अथवा उबले हुए सब्जियों से ग्रेवी तैयार की जा सकती है. मसालों कोपानी में फ्राई करना जरूरी है.

> तनाव पर काबू
इस भाग दौड़ वाली जिंदगी में तनाव से नहीं बचा जा सकता, लेकिन इसे अभ्यास, समझ और आकलन के द्वारा 60 फीसदी तक कम किया जा सकता है.

> योगासन
हम दो तरह का सुझाव देंगे. पहली है एचआरई या दृष्टि रिजुवेनर्टिंग एक्सरसाइज. यह शरीर के विभिन्न अंगों की गतिशीलता की श्रृंखलाबद्ध कड़ी है जो कान से शुरू होकर आंख, घुटने और एड़ी तक जाती है. यह सभी हृदय रोगियों के लिए सुरक्षित है.

> व्यायाम
प्रमोशन के अलावा हम रोगी को रोज टहलने की सलाह देते हैं. प्रायरू हृदय रोगियों को कम से कम 30-35 मिनट तक टहलना चाहिए. अगर कोई रोगी बिल्कुल ही बिगड़ी हुई स्थिति में है तो उसे दो मिनट ही टहलना चाहिए और धीरे-धीरे दो-तीन हफ्तों में इसे बढ़ाते हुए उचित स्तर तक गति बिल्कुल सुविधानुसार होनी चाहिए. जो घर के बाहर टहलने नहीं जा सकते वे घर के अंदर ही बिना रुके टहल सकते हैं. आर्थराइटिस के रोगियों को स्थिर साइकिल का उपयोग करना चाहिए.

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