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ऑडिटरों द्वारा कंपनी की वैल्यू निर्धारित करने पर रोक

मुंबई। इनकम टैक्स ट्राइब्यूनल ने ऑडिटरों द्वारा कंपनियों के लिए जारी किए जाने वाले वैलुएशन सर्टिफिकेट पर रोक लगा दी है। टैक्स संबंधी कई विवादों की वजह से यह आदेश दिया गया है। इन विवादों में एंजल का मामला भी शामिल है। बेंगलुरु के इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल ने कहा है कि किसी कंपनी का ऑडिटर अकाउंटेंट की तरह काम नहीं कर सकता। निवेश के दौरान कई कंपनियों के विवादों का सामना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को करना पड़ा। यह आदेश एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें टैक्स डिपार्टमेंट ने कंपनी के ऑडिटर द्वारा किए गए वैलुएशन को चुनौती दी थी। कई मामलों में स्टार्टअप के वैलुएशन को टैक्स डिपार्टमेंट ने चुनौती दी थी। इनमें एंजल टैक्स प्रमुख है। यह मामला स्टार्टअप फंडिंग के दौरान हुए वैलुएशन से संबंधित हैष कई मामलों में स्टार्टअप का रेवेन्यू घटाया जाता है लेकिन वैलुएशन बढ़ा दिया जाता है। डिपार्टमेंट निवेशकों द्वारा दिए गए प्रीमियम पर पूछताछ कर रहा है और वह आय को 30 प्रतिशत के टैक्स वाली श्रेणी में रखना चाहता है। कई अकाउंटेंट और वाल्युअर पहले से आयकर विभाग की सख्ती का सामना कर रहे हैं। 25 दिसंबर को रिपोर्ट आई थी कि टैक्स डिपार्टमेंट ने वैलुएशन एक्सपरर्ट्स को कारण बताओ नोटिस जारी करना शुरू किया है।

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