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कविता : माँ दर्शन दो

शेर की सवारी,
माँ लगे बड़ी प्यारी,
आँखों मे मुस्कान धरे,
एक बार आजाओ मेरे द्वारे।

अष्ट भुझा धारी,
माँ,राक्षसों की संहारी,
माँ लगे बड़ी ही प्यारी,
दरबार फिर बुलाओ माँ भवानी।

त्रिशूल,गदा धारी,
माँ करे शेर की सवारी,
मंद मंद मुस्कान चेहरे पे,
आशीष मुझे भी दो एक बारी।

 

नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).

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