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डायबिटीज की पहली दवा जो है ह्रदय रोग के मरीजों के लिए फायदेमंद

  • एस्ट्राजेनेका की डायबिटीज दवा ह्रदय रोग के मरीजों के लिए लाभकारी
  • एस्ट्राजेनेका ने भारत सहित दुनिया भर के कई अन्य देशों में किए गए क्लिनिकल अभ्यास में पाया गया है कि उनकी एंटी-डायबेटिक दवा डेपाफ्लोजिन टाइप-2 डायबिटीज के या दूसरे मरीजों में ह्रदय रोगी मरीजों में हॉस्पिटलाइजेशन की जोखिम को कम करने में गुणकारी है।
  • एस्ट्राजेनेका की डेपाफ्लोजिन यह उसकी श्रेणी की पहली दवा है जो दूसरी बीमारी में भी गुणकारी है, ह्रदय रोग के मरीजों पर यह दवा फायदेमंद और सुरक्षित है।

विजय न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली। अनुसन्धान में यह पाया गया है कि दुनिया का हर आठवां ह्रदय रोगी भारतीय है। इनमें से 40% लोगों को डायबिटीज की बीमारी भी है। टाइप-2 डायबिटीज से जुडी कार्डियोवैस्कुलर बिमारियों में ह्रदय रोग सबसे पहली बीमारी है जिससे रोगी की जान जाने का खतरा सबसे अधिक होता है। वैश्विक स्तर से पायी गई जानकारी के अनुसार ह्रदय रोग के करीबन 50% मरीज 5 सालों के भीतर अपनी जान गवा देते हैं। इसका एक कारण यह है कि सांस फूलना और थकान इन ह्रदय रोग के आम लक्षणों को एनीमिया या फेफड़ों की आम बीमारी समझ कर नजरअंदाज किया जाता है।
भारत में डायबिटीज की बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है। डायबिटीज के 65 मिलियन से ज्यादा मरीजों के इस देश में डायबिटीज पर ट्रीटमेंट के दौरान ही ह्रदय रोग की जोखिम को ध्यान में रखते हुए उसे रोकने के लिए उपाय किए जाना आवश्यक है।

दुनिया की सबसे बड़ी बायो-फार्मास्युटिकल कंपनियों में से एक एस्ट्राजेनेका ने आज अपनी नई डायबिटीज दवा डेपाफ्लोजिन के डेपा – एचएफ (DAPA-HF) क्लिनिकल परीक्षणों के नतीजों की घोषणा की। इन नतीजों के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज के या दूसरे मरीजों में ह्रदय रोग पर इलाज में यह दवा काफी गुणकारी सिद्ध हुई है। फ़्रांस के पैरिस में ईएससी कॉंग्रेस 2019 में आज पेश किए गए ब्यौरेवार नतीजों में यह बताया गया है कि फोर्क्सिगा ने ह्रदय काम न कर पाने की वजह से होने वाली मृत्यु या ह्रदय ठीक से काम न कर पाने के कम्पोजिट को 26% (पी <0.0001) से कम किया और कम्पोजिट एंडपॉइन्ट पर हर एक व्यक्तिगत घटकों में कमी आती हुई दिखाई दी। यह परिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस परिक्षण में शामिल किए गए लगभग एक चौथाई मरीज भारत सहित एशिया के अन्य देशों के थे।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के कार्डिएक सायन्सेस के निदेशक डॉ. जमशेद दलाल ने इन नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया, “डेपा – एचएफ (DAPA-HF) परिक्षण में पाया गया है कि ह्रदय रोग के मरीजों के लिए यह दवा गुणकारी है। इसमें कोई अतिरिक्त सुरक्षा चिंताएं नहीं थीं। डायबिटीज या ह्रदय रोग के मरीजों के लिए यह बहुत ही अच्छी खबर है, खास कर भारत के लिए क्योंकि कई सारे मरीजों में डायबिटीज और ह्रदय रोग यह दोनों बीमारियां एक साथ पायी जाती हैं।”
जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के ऑनररी प्रोफ़ेसर, नॉर्थ दिल्ली डायबिटीज सेंटर के निदेशक, रिसर्च सोसायटी फॉर स्टडी ऑफ़ डायबिटीज इन इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. राजीव चावला ने बताया, “जिनको डायबिटीज है ऐसे वयस्क लोगों को ह्रदय की बीमारी के कारण जान जाने का खतरा डायबिटीज नहीं है ऐसे लोगों से दो से चार गुना अधिक होता है। आकड़ें यह बताते हैं कि हृदय की बीमारी पता लगने के बाद पांच सालों में मरीजों की मृत्यु होने का दर 50% है।”
नई दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के कार्डियोलॉजी के प्रोफ़ेसर प्रो. मोहित डी गुप्ता ने कहा, “भारत और पूरे दुनिया भर में कोई भी अन्य दो बीमारियां एकसाथ हो जाने के कारण होने वाली मौतों से कई ज्यादा मौतें डायबिटीज और ह्रदय रोग एकसाथ हो जाने के कारण होती हैं। यह अत्यंत गंभीर स्थिति है। हम डॉक्टर्स और नागरिक होने के नाते इस त्सुनामी को समझे और इससे बचने के लिए योग्य उपाय करे: जीवनशैली में सुधार और दवाइयां मिलकर इस समस्या का निवारण कर सकती हैं। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि आज सायन्स में कई नए अविष्कार हो रहे हैं जो हमारे लिए मददगार साबित होंगे।”
यह एकमात्र एसजीएलटी2 इन्हीबिटर है जो टाइप-2 डायबिटीज के या अन्य मरीजों में ह्रदय रोग के इलाज में फायदेमंद सिद्ध हुआ है।

एस्ट्राजेनेका
एस्ट्राजेनेका यह वैश्विक स्तर की विज्ञान से प्रेरित बायोफार्मास्युटिकल कंपनी है। प्रमुख तौर पर ऑन्कोलॉजी, सीवीआरएम और रेस्पिरेटरी इन तीन थेरपी क्षेत्रों में प्रिस्क्रिप्शन दवाइओं की खोज, विकास और कमर्शियलाइजेशन पर इस कंपनी ने अपना ध्यान केंद्रित किया है। दुनिया भर की 100 से ज्यादा देशों में कार्यरत इस कंपनी की आधुनिक दवाइयां दुनिया भर के करोड़ो लोग ले रहे हैं।

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