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पुलवामा हमला : पाकिस्तान ने कहा- भारत की बताई 22 जगहों पर कोई आतंकी कैंप नहीं मिला

इस्लामाबाद. पुलवामा हमले में जैश का हाथ होने के और ज्यादा सबूत मांगने के बाद पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि हमें भारत की बताई 22 जगहों पर कोई आतंकी कैंप नहीं मिला है। पाकिस्तान ने बुधवार को शुरुआती जांच की जानकारियां इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त से साझा की थीं। इससे पहले भारत ने 27 फरवरी को दिल्ली में पाक उच्चायुक्त को पुलवामा हमले के संबंध में डॉजियर सौंपा था। भारत ने बालाकोट समेत पीओके की 22 जगहों पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कैंप होने के सबूत भी दिए थे। पाक ने कहा कि उन्होंने भारत द्वारा बताई गई 22 जगहों पर जांच की, लेकिन उन्हें वहां कोई आतंकी कैंप नहीं मिला। अगर भारत हमसे कहेगा तो उसे इन जगहों का दौरा करने और निरीक्षण की इजाजत दे सकते हैं।

पाकिस्तान ने मांगे थे सबूत
पाकिस्तान ने दावा किया- हिरासत में लिए गए 54 लोगों के पुलवामा हमले से जुड़े होने का कोई विवरण नहीं मिला है। अभी भी उनकी जांच की जा रही है। कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। पाक ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त से पुलवामा हमले में जैश का हाथ होने और पाकिस्तान में जैश के आतंकी कैंप होने के सबूत मांगे थे।

27 फरवरी को भारत ने सौंपा था डॉजियर
भारत ने दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को 27 फरवरी को पुलवामा हमले के संबंध में डॉजियर सौंपा था। भारत ने पाकिस्तान को हमले के पीछे जैश का हाथ होने के बारे में पुख्ता जानकारियां दी थीं। इसके अलावा भारत ने पाक में जैश के कैंप और उनके लीडरों के होने के भी सबूत सौंपे थे।

आईएसआई ने मसूद को सेफ जोन में छिपाया- सूत्र
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पुलवामा में फिदायीन हमले के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जैश के सरगना मसूद अजहर को ‘सेफ जोन’ में छिपा दिया था। अजहर को 17-18 फरवरी यानी पुलवामा हमले के बाद रावलपिंडी से बहावलपुर के नजदीक कोटघानी भेजा गया था। आईएसआई ने उसकी सुरक्षा भी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि पुलवामा में जब हमला हुआ उस वक्त अजहर रावलपिंडी में सेना के अस्पताल में भर्ती था।

पाक में मसूद के जमात-उद-दावा पर शिकंजा कसा
पुलवामा हमले और भारत की एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद पाक सरकार ने मात-उद-दावा और फला-ए-इंसानियत के मुख्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया था। प्रतिबंधित संगठनों के 100 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए थे और 182 मदरसों को सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया था।

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