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भीड़ बटोरने के टोटके

चुनावी त्यौहार में भीड़ का बड़ा महत्व माना जाता है । शास्त्रों में कहा गया है कि एक उच्च कोटि का भीड़ खेंचूं देखते ही देखते अपनी पसंदीदा कुर्सी खेंच लेता है । भीड़ बटोरू कुर्सी वरण करता है । बिना भीड़ का जीव भाड़ में चला जाता है । हालांकि इस समय मार्केट में तरह-तरह की भीड़ किराए पर उपलब्ध है । फिर भी भीड़ का जुगाड़ लगाने में पूरा दिमाग लगाना चाहिए । चुनावी वैतरणी को पार करने के लिए भीड़ ही एकमात्र उपाय है । नारा लगाने वाली, जय – जयकार करने वाली, पोस्टर पंपलेट चाटने वाली, पुतला जलाने – सजाने वाली, लाठी – भाटा चलाने वाली से लेकर फर्जी तरीके से वोट डालने वाली भीड़ सर्वत्र उपलब्ध है । बाजार नाना प्रकार की भीड़ से अटा पड़ा है ।
अभी मार्केट में नई प्रकार की भीड़ प्रकट हुई है । व्हाट्सएप पर मैसेजशस्त्र चलाने वाली, फेसबुक पर वीडियोपुराण फैंककर मारने वाली और ट्विटर देवता पर चुनावी ट्वीटबाजी करने वाली भीड़ थोक व रिटेल में उपलब्ध है । जो भाई लोग कुछ कम करोड़ों में सस्ती दरों पर भीड़ जुटाना चाहते हैं ; उनके लिए कुछ टोटके दे रहा हूं । नेतागणों को चाहिए कि भीड़ बटोरू सिद्धांतों का भली – भांति उपयोग करें और कुर्सी सुख पाएं । बदले मुझे भी दो – चार सरकारी ठेके दिलवा दें । किसी मंडल – बंडल का अध्यक्ष बनवा दें या किसी बोर्ड – कोर्ट में मेंबर ही बनवा दें ।
भीड़ बटोरने का पहला सिद्धांत है सोशल मीडिया हाइजेकीकरण ! सोशल मीडिया में सिर्फ नाम ही सोशल है और बाकी सब अनसोशल होता है और इसे हाइजेक कर मनचाही भीड़ छांट लें । पूरी दुनिया में रंगा – रंग तरीके के सोशलबाज बैठे हैं । ये सब अदृश्य भीड़ के रूप में बैठकर चाहे जिस नेता की चुनावी गाड़ी पार लगा सकते हैं और चाहे किसी नेता का बिस्तर गोल गोल कर सकते हैं । ऐसे डिजिटल भीड़ बटोरू दानाजी की ढाणी से लेकर के अॉक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी अमेरिका तक मौजूद हैं । ये बड़े ही मनोरंजक एवं प्रभावी तरीके से डिजिटल भीड़ से चाहे जो काम करवा लेते हैं । भीड़ बटोरने में मनोरंजक सिद्धांत का भी अच्छा खासा महत्व का है । पब्लिक वैसे भी चुनावी सर्कस का मजा लेती है क्यों कि अक्सर नेताजी भाषणों में मनोरंजन ही करते हैं । किंतु किसी आइटम विशेष पर तालियां ज्यादा हासिल करनी हो तो नाचने गाने वालियों का बंदोबस्त किया जा सकता है । भाषण बाजी से पूर्व, मध्य व अंत में देसी व विदेशी लड़कियों के बदन खाऊ डांसों की मारामारी रहती है । कूल्हा मटकाऊ, बदन दिखाऊ ब्राण्डों का कंपोजीशन इस प्रकार करें कि एक भाषण के बीच एक डांस चलता रहे और भीड़ भी जमी रहे ।
इधर नए अंदाज से कठपुतली का खेल दिखाने वालों की भी मार्केट में डिमांड है । इस काम के लिए किसी अच्छे प्रशासनिक अधिकारी को लगाया जा सकता है । वैसे कई अधिकारी अपने नेता की पगचंपी करते हुए कठपुतली बनते हुए इसका ख्याल दिखाने में कुशल पाए गए हैं । विचित्र वेशभूषा वाले बहुरूपियों को भी पकड़ा जा सकता है । कई चमचे इस काम में दक्ष होते हैं । ये अपनी ऊल – जलूल शास्त्रीय क्रियाओं द्वारा अच्छा – भीड़ बटोरू इवेंट कर डालते हैं । अभी मार्केट में ‘कांटा लगा’ टाइप की कन्याओं का जलजला आया हुआ है । दिगंबरी कन्याएं इस कदर से कांटा लगाती है कि अच्छा खासा बिस्तर में लेटा व्यक्ति भी भीड़ का हिस्सा बन जाता है । ऐसी आइटम गर्लें भी हैं जो एक आइटम मार दे ते इधर- उधर के श्मशानों के भूत भी भीड़ बनकर वोट देने पर उतारू होते देखे गए हैं । इनके साथ ही किसी अभिनेता – नेत्री से भी फिल्मों के डायलॉग बुलाकर भीड़ से जयकारा लगवाया जा सकता है । मसखरे बाजों से भी भीड़ इकट्ठी होती देखी गई है । किसी क्रिकेट खिलाड़ी, रैंप पर चलायमान मॉडल कन्या, टीवी सीरियल में पांच – पांच पति रखने वाली सावित्री कन्या ऊर्फ महिला, किसी जोकर आदि से भी भीड़ का जुगाड़ किया जाता है । सोशल मीडियाबाज डिजिटली भीड़ को वोट में कन्वर्ट करने की गारंटी लेते देखे गए हैं । भीड़ है तो फिर भाषण कुछ भी दिया जा सकता है । वैसे भाषण देना क्या है जो चाहे पेल दें । मूल मामला तो भीड़ बटोरने का है । शीघ्रता से आइए ! सामने वाले ठेले पर गरमा – गरम भीड़ उपलब्ध है । अपनी मनपसंद भीड़ लेकर ही जाइए । भीड़ बटोरू टोटकों का इस्तेमाल कीजिए । वह देखिए सामने पड़ी कुर्सी आपका इंतजार कर रही है ।

 

रामविलास जांगिड़
18, उत्तम नगर, घूघरा
अजमेर (305023) राजस्थान

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