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हिंदुओं पर हो रहे आघात और हिन्दू राष्ट्र स्थापना की अनिवार्यता

27 मई से 8 जून 2019 की अवधि में रामनाथी, गोवा में होनेवाले अष्टम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के निमित्त से

विजय न्यूज़ ब्यूरो

‘संसार में आज दिनांक को 152 ईसाई, 52 मुसलमान, 14 बौद्ध तथा एक 1 यहूदी राष्ट्र है । तथापि संसार के चौथे क्रमांकपर आनेवाले सबसे बडे हिन्दू धर्म के अनुयायियों का अर्थात हिंदुओं का स्वयं का एक भी स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है । आज भारत में कुल 100 करोड हिन्दू रहते हैं । तब भी उनका स्वयं का स्वतंत्र राष्ट्र न होना धक्कादायक है । आज विविध आघातों के माध्यम से इसके परिणाम हिंदुओं को भोगने पड रहे हैं । प्रस्तुत लेख में उसी का विवेचन किया गया है ।

1. हिंदुओं के श्रद्धास्थानों पर निरंतर हो रहे आघात

राममंदिर के विषय में स्पष्ट भूमिका रखते हुए श्रीराम युवा सेना के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक टी. राजासिंह

गत अनेक वर्षों से हिन्दूबहुल भारत में हिंदुओं तथा उनके श्रद्धास्थानों पर आघात करने के सुनियोजित षड्यंत्र चल रहे हैं । स्वतंत्रता के पश्‍चात 60 वर्षों से अधिक समय तक कांग्रेस की सत्ता थी । उनके समय में हिंदुओं पर प्रारंभ हुए आघातों की घटनाएं आज हिन्दुत्वनिष्ठ भाजपा की सत्ता में भी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं । कांग्रेस सरकार ने मुंबई का श्री सिद्धिविनायक मंदिर, शिरडी का श्री साईबाबा मंदिर, तथा श्री तुळजाभवानी मंदिर जैसे अनेक मंदिरों का सरकारीकरण किया । इसी प्रकार कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों में भी मंदिरों का सरकारीकरण किया गया । इस माध्यम से हिंदुओं द्वारा मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पण किए हुए धन तथा मंदिरों की संपत्ति पर डाका डालने का महापाप भी राज्यकर्ता कर रहे हैं । वास्तव में मंदिरों का धन हिन्दू धर्म के लिए ही खर्च होना चाहिए; परंतु मंदिर का धन सरकार हिंदुओं पर खर्च कर रही है । धर्मनिरपेक्षता का दिखावा कर केवल मंदिर नियंत्रण में लेनेवाली सरकार कभी मस्जिद अथवा चर्च नियंत्रण में नहीं लेती, यह ध्यान में रखना चाहिए । इसके अतिरिक्त जब सभी क्षेत्रों का निजीकरण हो रहा है, तब मंदिरों का ही सरकारीकरण क्यों ?, ऐसा प्रश्‍न भी हिंदुओं को सरकार से पूछना आवश्यक है । मंदिर चैतन्य और सात्त्विकता का स्रोत हैं तथा मनःशांति प्राप्त करवानेवाले केंद्र हैं । मंदिरों का सरकारीकरण होने के उपरांत वहां राजनीति और भ्रष्टाचार प्रारंभ हो जाता है । परिणामस्वरूप मंदिरों की सात्त्विकता नष्ट हो जाती है । हिंदुओं के श्रद्धास्थानों पर यह सबसे बडा आघात है ।

दुर्भाग्यवश हिंदुओं के मतों से चयनित भाजपा सरकार के काल में भी यह षड्यंत्र चल ही रहा है । हिंदुओं के श्रद्धास्थान महाराष्ट्र के शनिशिंगणापुर मंदिर, केरल का शबरीमला मंदिर आदि मंदिरों में धर्मशास्त्रानुसार विशिष्ट आयुवर्ग की हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है । तथापि तथाकथित आधुनिकतावादी, स्त्रीवादी संगठन और नास्तिकतावादी संगठनों के दबाव की बलि चढकर सरकाने यह प्रतिबंध हटा दिया और करोडों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं पैरोंतले कुचल दी । केरल स्थित शबरीमला मंदिर में हिंदुओं के श्रद्धास्थान भगवान श्री अय्यपा ब्रह्मचारी हैं । इसलिए इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष तक आयुवर्ग की महिलाआें का प्रवेश प्रतिबंधित है । केवल रजस्वला होनेवाली महिलाआें को मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित है; परंतु तथाकथित स्त्री स्वतंत्रता के नाम पर यह परंपरा पैरों तले कुचली गई और हिंदुओं की धर्मभावनाआें को भी कुचल दिया गया ।

2. राममंदिर निर्माण के संबंध में भाजपा शासन की उदासीनता

नेपाल की वर्तमान स्थिति, संगठित हुए विविध हिन्दू और नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए प्रयत्न इस विषय पर बोलते हुए राष्ट्रीय धर्मसभा नेपाल के अध्यक्ष डॉ. माधव भट्टराई

मुगलों ने भारत पर आक्रमण कर हिंदुओं के लाखो मंदिर ध्वस्त किए हिंदुओं की माता बहनों पर अत्याचार किए तथा बलपूर्वक हिंदुओं का धर्मपरिवर्तन किया । बाबर ने अयोध्या का राममंदिर ध्वस्त कर वहां बाबरी मस्जिद बनाई । उसके अनेक प्रमाण भी है; परंतु तब भी आजतक अयोध्या में पुनः राममंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है । आज भी प्रभु श्रीराम मंदिर की प्रतीक्षा में हैं । भाजपा ने आजतक चुनावों में ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारे लगाकर हिंदुओं के मत प्राप्त किए; परंतु सत्ता में आने के उपरांत मंदिर निर्माण नहीं किया । हिंदुओं को आश्‍वासन देते रहे । परिणामस्वरूप भाजपा से हिंदुओं का विश्‍वास उड गया है । हिन्दू निश्‍चित रूप से यह मान गए हैं कि कोई भी राजनीतिक दल राममंदिर का निर्माण नहीं कर पाएगा । केवळ हिन्दू राष्ट्र में ही श्रीराम का मंदिर बनाना संभव है । इसलिए हिंदुओं के लिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का ही विकल्प शेष है ।

3. बढती गोहत्या और गोरक्षकों पर हो रही अन्यायपूर्ण कार्यवाही

अधिवेशन में उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए जोधपुर, राजस्थान की श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक श्री. लोकेंद्रसिंह कालवी

गोमाता हिंदुओं के लिए पूजनीय है । अनेक धार्मिक कार्यों में गोमाता का पूजन किया जाता है; परंतु हिंदुओं को तंग करने के लिए धर्मांधों द्वारा जानबूझकर बडी मात्रा में गोहत्या की जा रही है । किसी भी दल की सरकार यह गोहत्या नहीं रोक पाई है । महाराष्ट्र में गोहत्या प्रतिबंधित कानून लागू होते हुए भी अनेक स्थानों पर गोहत्या हो रही है । अनेक स्थानों पर उजागर रूप से गोमांस का परिवहन किया जाता है । यदि यह ऐसे ही चलता रहा, तो आनेवाले कुछ वर्षों में ही गोमाता की संख्या तीव्रता से कम हो जाएगी तथा भविष्य में अगली पीढी को गोमाता केवल चित्र में ही देखनी पडेगी, इतनी भीषण परिस्थिति है । यह भी हिन्दू धर्म पर बडा आघात है । गोहत्या और गोमांस का परिवहन रोकने के लिए हिन्दुत्वनिष्ठ जब पुलिस से शिकायत करते हैं, तब पुलिस अनदेखी करती है । इसके उपरांत यदि हिन्दुत्वनिष्ठ स्वयं कुछ करते हैं, तो पुलिस उनपर तत्परता से अपराध प्रविष्ट करती है । महाराष्ट्र के रत्नागिरी जनपद स्थित लोटे परशुराम में गोवंश की हत्या के प्रकरण में पुलिस से बार बार शिकायत करने पर भी पुलिस ने अनदेखी की । परिणामस्वरूप हिन्दुत्वनिष्ठों के धैर्य का बांध टूटने पर पुलिस ने हिन्दुत्वनिष्ठों पर ही कार्यवाही की । कानून के रक्षक ही ऐसा कर रहे हैं । इसलिए सरकार कांग्रेस की हो अथवा भाजपा की पुलिस तंत्र सहिष्णु हिंदुओं को ही पीटने का कार्य करता दिखाई दे रहा है ।.

4. झूठे आरोप लगाकर केवल हिंदुओं के संत और धर्मनिष्ठों को कारागृह में बंद करनेवाली सरकार !

कांग्रेस के समय हिंदुओं के संतों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें कारागृह में डालने का कार्य किया; परंतु भाजपा की सत्ता आने पर भी हिंदुओं पर हो रहे अन्याय नहीं रुके हैं । ऐसी कार्यवाही हिन्दुत्वनिष्ठ भाजपा ने हिंदुओं के धर्मगुरुआें पर कभी की है, ऐसा सुनने में नहीं आया है । इतना ही नहीं भाजपा सरकार ने दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी की हत्या के प्रकरण में सनातन के साधकों सहित अनेक धर्मनिष्ठ हिंदुओं फंसाकर बिनाकारण कारागृह में डाला है । उनके विरोध में सरकार अभीतक कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाई है; परंतु तब भी दंड देकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताडित किया जा रहा है । सनातन के विरोध में न्यायालय में किसी प्रकार के आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, तब भी पुलिस सनातन के साधकों के पीछे पडी हुई है तथा उन्हें नाहक मानसिक रूप से प्रताडित कर रही है । हिन्दू धर्म, संत और धर्मप्रेमियों पर होनेवाले यही आघात हैं ।

5. हिंदुओं पर हो रहे आघात रोकने के लिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना ही एकमात्र उपाय

संक्षेप में वास्तविकता यह है कि, हिन्दूबहुल भारत के हिंदुओं को कोई भी राज्यकर्ता न्याय नहीं दे सकते । यदि ऐसा ही चलता रहा, तो धीरे-धीरे हिन्दू नष्ट हो जाएंगे। हिंदुओं पर हो रहे ये आघात रोकने तथा हिंदुओं को न्याय दिलवाने के लिए हिन्दू संगठन कर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना आवश्यक है ।

दीपप्रज्वलन करते हुए बाएं से सद्गुरु (कु.) अनुराधा वाडेकर, सद्गुरु (डॉ.) चारूदत्त पिंगळे, स्वामी संवित् सोमगिरीजी महाराज एवं सद्गुरु नंदकुमार जाधव

6. हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ का आयोजन 

हिन्दू संगठन कर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के व्यापक उद्देश्य से हिन्दू जनजागृति समिति ने 27 मई से 8 जून 2019 की अवधि में श्री रामनाथ देवस्थान सभागृह, फोंडा, गोवा में ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ का आयोजन किया है । यह अधिवेशन का 8 वां वर्ष है । हिन्दू जनजागृति समिति वर्ष 2012 से ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनों’ का आयोजन कर धर्माधारित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रयत्नरत है । इस अधिवेशन में हिन्दू समाज के विविध घटकों उदा. हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन, संप्रदाय, संत, अधिवक्ता, विचारक आदि को हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए योगदान देने के संबंध में मार्गदर्शन किया जाता है । इसके द्वारा सैकडों हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का एक अभेद्य संगठन बन गया है तथा यह हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए एक आश्‍वासक कदम सिद्ध हो रहा है । भारत के 25 राज्य, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में कार्यरत छोटे-बडे लगभग 250 हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रतिनिधि इस अधिवेशन में उपस्थित रहनेवाले हैं । इस अधिवेशन के अंतर्गत 27 और 28 मई इन 2 दिनों की अवधि में ‘धर्मप्रेमी अधिवक्ता अधिवेशन’, 28 मई को ‘उद्योगपति अधिवेशन’, 29 मई से 4 जून की अवधि में अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन तथा 5 से 8 जून की अवधि में ‘चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र संगठक प्रशिक्षण अधिवेशन’ आयोजित किया जानेवाला है ।

हिन्दू अधिवेशन के लिए उपस्थित मान्यवर और हिन्दुत्वनिष्ठ
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