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Category: तनवीर जाफ़री

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व्यक्ति नहीं भारतीयता की पहचान हैं गाँधी -नेहरू

दक्षिणपंथी हिंदूवादी विचारधारा से संबंध रखने वाले संगठनों द्वारा महात्मा गांधी व पंडित जवाहरलाल नेहरू को कोसना तथा उनमें तरह-तरह की कमियां निकालना यहां तक कि झूठे-सच्चे $िकस्से कहानियां गढक़र

ज़रूरत नोटबंदी पर श्वेत पत्र लाने की

देश के लोग 8 नवंबर 2016 की वह रात कभी नहीं भूल सकेंगे जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्र संबोधन के द्वारा देश में प्रचलित एक

‘पप्पू’ बनाम ‘फेंकू’ महासंग्राम

 देश में इन दिनों पुन: चुनावी बयार बह रही है। $खासतौर पर गुजरात विधानसभा के चुनाव ने इसे और भी रोचक इसलिए बना दिया है क्योंकि नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री

सत्ता के संरक्षण में नफरत का व्यापार ?

 सत्ता के संरक्षण में नफरत का व्यापार? पिछले दिनों भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाट्क विधानसभा को संबोधित करते हुए जहां अन्य कई उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बातें कीं वहीं

बार-बार नहीं चढ़ती ‘काठ की हांडी’

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय लोकतंत्र की विधायिका व्यवस्था में सक्रिय कोई भी राजनैतिक दल इस एकमात्र उद्देश्य के लिए पूरी तरह सक्रिय व कार्यरत रहता है कि

वीआईपी संस्कृति की समाप्ति,बुलेट ट्रेन और बुनियादी सुविधाएं

वीआईपी संस्कृति की समाप्ति,बुलेट ट्रेन और बुनियादी सुविधाएं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनों जहां रेल विभाग से वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

रोहिंग्या शरणार्थी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’

म्यांमार(बर्मा)में रोहिंग्या समाज के लोगों के विरुद्ध चल रहे सैन्य एवं राज्य प्रायोजित नरसंहार के बाद बर्मा के रखाईन प्रांत से रोहिंग्या लोगों का पलायन जारी है। रोहिंग्या समाज के

राजनीति:राष्ट्र सेवा या व्यवसाय ?

कहने को तो राजनीति को समाज तथा राष्ट्रसेवा का माध्यम समझा जाता है। राजनीति में सक्रिय किसी भी व्यक्ति का पहला धर्म यही होता है कि वह इसके माध्यम से

रोहिंग्या समस्या: शांति दूत के देश में?

अफगानिस्तान के बामियान प्रांत में मार्च 2001 में जब तालिबानी नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के आदेश पर छठी शताब्दी में विशाल पत्थर से निर्मित महात्मा बुद्ध की प्रतिमाओं को तोप

‘न्याय’ के समक्ष नई चुनौतियों की आहट ?

हमारे देश में लोकतंत्र को चार स्तंभों पर टिका हुआ माना जाता है। परंतु वर्तमान दौर में इन चार स्तंभों में कार्यपालिका,संसदीय व्यवस्था तथा प्रेस जैसे स्तंभ साफतौर पर लडख़ड़ाते

महिला सशस्त्रीकरण: ढोल का पोल

एक ही समय व एक ही प्रवाह में तलाक-तलाक़-तलाक़ बोलकर अपनी पत्नी को तलाक़ दिए जाने जैसी भौंडी व अमानवीय परंपरा को पिछले दिनों देश के सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक

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