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Category: तनवीर जाफ़री

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महिमामंडन, गांधी के हत्यारे का…

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारत की अब तक की ऐसी इकलौती श$िख्सयत का नाम है जिसे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में समान रूप से आदर व सम्मान की

दोनों नकली हो गए, आंसू और मुस्कान ?

सामान्तय: मनोवैज्ञानिकों का मत तो यही है कि किसी भी इंसान के चेहरे पर मुस्कान या हंसी उसी समय आती है जब वह किसी बात को सुनकर प्रसन्न हो या

सराहनीय अदालती टिप्पणी:अधर्म करने वाला धार्मिक नहीं हो सकता

पिछले दिनों जयपुर के एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई तथा इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त

‘पत्थरकारिता’में दलाली व चाटुकारिता के बाद अब चोरी का भी तड़का ?

निश्चित रूप से दुनिया के अधिकांश देश ऐसे हैं जो न केवल दिन-प्रतिदिन तरक्की कर रहे हैं बल्कि ऐसे देशों का सामाजिक ढांचा भी परिवर्तित होता जा रहा है। दुनिया

चम्मचों को देखिए तो पतीली से गर्म हैं

चाटुकारिता, खुशामदपरस्ती तथा अपने आका को खुश करने के लिए किसी भी हद तक कुछ भी कर गुज़रने की हौसला हमारे समाज में आसानी से देखा जा सकता है। और

कलयुगी ‘गुरू घंटालों’ के दौर में धर्म-अध्यात्म की शिक्षा ?

कलयुग के जिन लक्षणों की परिकल्पना की गई है लगभग वे सभी लक्षण पृथ्वी पर साफ दिखाई देने लगे हैं। इंसान-इंसान की जान का दुश्मन बना बैठा है। रिश्ते अपना

राष्ट्र की आत्मा है भारतीय संविधान

कर्नाट्क से भारतीय जनता पार्टी के सांसद तथा केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने हालांकि भारतीय संविधान संशोधन के संंबंध में दिए गए अपने आपत्तिजनक बयान को

राहुल गांधी को ‘स्थापित’ कर गया गुजरात चुनाव

गुजरात व हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अपना विजय अभियान जारी रखते हुए जहां हिमाचल प्रदेश की सत्ता कांग्रेस से छीनकर अपनी झोली में डाली है वहीं गुजरात

यरूशलम विवाद : शिया-सुन्नी संघर्ष की अमेरिकी साजि़श

‘बांटो और राज करो’ की जिस नीति पर चलते हुए ब्रिटिश राज ने लगभग पूरे विश्व में अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था ठीक उसी नीति का अनुसरण आज

पत्रकारिता का ‘पत्थरकारिता’ काल?

न स्याही के हैं दुश्मन न सफेदी के हैं दोस्त। हमको आईना दिखाना है दिखा देते हैं।। पत्रकारिता के संदर्भ में कहा गया यह शेर देश के प्रबुद्ध पत्रकारों द्वारा

मुद्दों पर नहीं,भावनाओं व लांछन पर हो रहे चुनाव 

इन दिनों पूरे देश की नहीं बल्कि विश्व मीडिया की निगाहें भी गुजरात राज्य में हो रहे विधानसभा के चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। बड़े आश्चर्य की बात है

राजनीति का वर्तमान दौर और नए ‘अवतार’ में राहुल गांधी

भारतवर्ष में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाला देश का सबसे बड़ा राजनैतिक संगठन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार के युवा नेता राहुल गांधी को अपने

व्यक्ति नहीं भारतीयता की पहचान हैं गाँधी -नेहरू

दक्षिणपंथी हिंदूवादी विचारधारा से संबंध रखने वाले संगठनों द्वारा महात्मा गांधी व पंडित जवाहरलाल नेहरू को कोसना तथा उनमें तरह-तरह की कमियां निकालना यहां तक कि झूठे-सच्चे $िकस्से कहानियां गढक़र

ज़रूरत नोटबंदी पर श्वेत पत्र लाने की

देश के लोग 8 नवंबर 2016 की वह रात कभी नहीं भूल सकेंगे जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्र संबोधन के द्वारा देश में प्रचलित एक

‘पप्पू’ बनाम ‘फेंकू’ महासंग्राम

 देश में इन दिनों पुन: चुनावी बयार बह रही है। $खासतौर पर गुजरात विधानसभा के चुनाव ने इसे और भी रोचक इसलिए बना दिया है क्योंकि नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री

सत्ता के संरक्षण में नफरत का व्यापार ?

 सत्ता के संरक्षण में नफरत का व्यापार? पिछले दिनों भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाट्क विधानसभा को संबोधित करते हुए जहां अन्य कई उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बातें कीं वहीं

बार-बार नहीं चढ़ती ‘काठ की हांडी’

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय लोकतंत्र की विधायिका व्यवस्था में सक्रिय कोई भी राजनैतिक दल इस एकमात्र उद्देश्य के लिए पूरी तरह सक्रिय व कार्यरत रहता है कि

वीआईपी संस्कृति की समाप्ति,बुलेट ट्रेन और बुनियादी सुविधाएं

वीआईपी संस्कृति की समाप्ति,बुलेट ट्रेन और बुनियादी सुविधाएं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले दिनों जहां रेल विभाग से वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

रोहिंग्या शरणार्थी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’

म्यांमार(बर्मा)में रोहिंग्या समाज के लोगों के विरुद्ध चल रहे सैन्य एवं राज्य प्रायोजित नरसंहार के बाद बर्मा के रखाईन प्रांत से रोहिंग्या लोगों का पलायन जारी है। रोहिंग्या समाज के

राजनीति:राष्ट्र सेवा या व्यवसाय ?

कहने को तो राजनीति को समाज तथा राष्ट्रसेवा का माध्यम समझा जाता है। राजनीति में सक्रिय किसी भी व्यक्ति का पहला धर्म यही होता है कि वह इसके माध्यम से

रोहिंग्या समस्या: शांति दूत के देश में?

अफगानिस्तान के बामियान प्रांत में मार्च 2001 में जब तालिबानी नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के आदेश पर छठी शताब्दी में विशाल पत्थर से निर्मित महात्मा बुद्ध की प्रतिमाओं को तोप

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