ब्रेकिंग न्यूज़

Category: निर्मल रानी

Total 28 Posts

स्वामी अग्रिवेश पर हुए जानलेवा हमले के निहितार्थ

भारतीय राजनीति के चेहरे पर पिछले दिनों उस समय फिर एक बदनुमा दाग लगा जबकि झारखंड में कुछ स्वयंभू हिंदुवादी राष्ट्रवादियों द्वारा भगवाधारी बुज़ुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता अध्यात्मवादी व राजनीतिज्ञ 79

‘देवी पूजक’ देश के सबसे खतरनाक महिला विरोधी 

‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ जैसी कहावत न केवल हमारे देश की प्राचीन कहावतों में शामिल हैं बल्कि हमारा समाज बहुतायत में इस कहावत को चरितार्थ करता हुआ भी प्राय: दिखाई

न्यू इंडिया का सपना और ज़हरीले खाद्य पदार्थों का धंधा ?

इसमें कोई संदेह नहीं कि खान-पान को लेकर आम आदमी का रुझान शाकाहार की ओर बढ़ता जा रहा है। स्वास्थय के प्रति सजग व्यक्ति दूध,फल व हरी सब्जि़यों की ओर

तालिबानी कृत्य है लेनिन की मूर्ति का ढहाया जाना

अफगानिस्तान में राष्ट्रपति नजीब की सत्ता समाप्त होने के बाद जिस समय क्रूर तालिबानियों ने सत्ता अपने हाथ में संभाली उसके बाद मार्च 2001 में आतंकवादी सोच के नायक मुल्ला

थालियों में ज़हर, सरकारें मौन

एक ओर तो देश की जनता पहले ही मंहगाई की मार से बुरी तरह से जूझ रही है। $खासतौर पर रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले खाद्य पदार्थ,अन्न,दालें,तेल,घी, सब्जि़यां तथा

यह जो अन्नदाता है,क्यों फांसी पर चढ़ जाता है?

हमारे देश में कृषक समाज अथवा किसानों के लिए तरह-तरह के विशेषण व उपमाएं इस्तेमाल की गई हैं। मिसाल के तौर पर यहां किसान को भगवान का दर्जा देते हुए

सरकार के ‘गलत’ फैसले ‘जन-धन’ की बरबादी का कारण

यदि आप देश के किसी भी राज्य के शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करें तो निश्चित रूप से यह दिखाई देगा कि कहीं न कहीं किसी न किसी क्षेत्र

क्या केवल गरीब ही है सबसे बड़ा ‘मुजरिम’?

गत् 70 वर्षों से देश में लोकतंत्र के होने के बावजूद $खासतौर पर सत्ता विरोधी दलों द्वारा यही बताने व जताने की कोशिश की जाती है कि सत्ता में बैठी

बेलगाम ध्वनि प्रदूषण:नियंत्रण ज़रूरी

हमारे देश में आम जनता स्वतंत्रता को कुछ अपने ही तरीके से परिभाषित करने में लगी रहती है। आज़ादी का अर्थ पराधीनता से छुटकारा और मानसिक,सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता के

वह करें तो ‘लीला’ हम करें तो ‘पाप’?

देश के हिंदूवादी संगठनों द्वारा खासतौर पर वर्तमान सत्तारूढ़ भाजपा जनता पार्टी एवं उसके संरक्षकों द्वारा महात्मा गांधी से लेकर पूरी कांग्रेस पार्टी तथा नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधने के

प्रतिस्पर्धा बदज़ुबानी की ?

पिछले दिनों गुजरात चुनाव के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शान में गुस्ता$खी करते हुए उन्हें ‘नीच आदमी’ जैसे शब्द से संबोधित किया था।

ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए…

हम भारतवासियों को हमारे पूर्वजों तथा देश में उपलब्ध शिक्षण सामग्री व साहित्य द्वारा यही बताया जाता रहा है कि भारतवर्ष ने पूरे विश्व में अध्यात्म,सुसंस्कार,मानवता तथा तमीज़ व तहज़ीब

मर्यादा की हदें पार कर गया गुजरात चुनाव प्रचार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे देश के स्तंभ पुरुषों की जन्मस्थली गुजरात राज्य में पिछले दिनों राज्य की चौदहवीं विधानसभा हेतु मतदान संपन्न हुए। भारतीय

बलात्कार: भारतीय समाज का कलंक

हम भारतवासी कभी-कभी तो स्वयं को अत्यंत सांस्कृतिकवादी,राष्ट्रवादी,अति सभ्य,सुशील,ज्ञान-वान,कोमल तथा योग्य बताने की हदें पार करने लग जाते हैं और स्वयं को गौरवान्वित होता हुआ भी महसूस करने लगते हैं।

खतरनाक है टीवी एंकर्स की गैर जि़म्मेदाराना भूमिका

इसमें कोई शक नहीं कि गंभीर समाचारों के गंभीर समाचार वाचकों अथवा कार्यक्रम प्रस्तोताओं का वह दौर अब समाप्त हो चुका है जब हम जी बी रमन,शम्मी नारंग और सलमा

नाम परिवर्तन: लोक लुभावन या लोक हितकारी?

हमारे देश की राजनैतिक शैली का इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जब हमारे सियासतदानों के पास जनता को दिखाने या बताने के लिए अपनी कोई उपलब्धियां नज़र नहीं आतीं

ख़तरनाक है संवाद के बजाए हिंसा की बढ़ती प्रवृति

हमारे देश की राजनीति में गत् कुछ वर्षों से ऐसा देखा जा रहा है कि दो परस्पर विरोधी विचारधाराओं के मध्य संवाद के रास्ते तो धीरे-धीरे बंद होते जा रहे

वायु प्रदूषण: हम ही हैं क़ातिल-ो -मक़तूल-ो मुंसिफ़ ?

उत्तर भारत का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों प्रदूषण युक्त घने कोहरे से ढका हुआ है। इसके परिणामस्वरूप देश के कई क्षेत्रों से भीषण सडक़ दुर्घटनाओं के समाचार मिल रहे

राष्ट्रवाद व सदाचार के ‘प्रवचन’ केवल गरीबों के लिए ?

राष्ट्रवाद व सदाचार के ‘प्रवचन’ केवल $गरीबों के लिए? इस बात से आखिर कौन इंकार कर सकता है कि देश के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रवाद तथा सदाचार की भावना का

अर्थव्यवस्था के आंकड़े और ज़मीनी सच्चाईयां ?

देश के वित्तमंत्री अरूण जेटली ने एक बार फिर यह विश्वास दिलाया है कि घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी हालात मज़बूत हैं। जेटली के अनुसार भारत पिछले तीन साल से सबसे

त्यौहार, परंपराएं, रीति और पर्यावरण संरक्षण

कहने को तो हमारे देश के नीति निर्माता अथवा राजनैतिक लोग अक्सर यह कहते सुनाई देंगे कि वे भारतीय संविधान,माननीय न्यायालय तथा अदालती $कानूनों अथवा आदेशों का पूरा सम्मान करते

Translate »
Skip to toolbar