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Category: व्यंग्य

Total 23 Posts

व्यंग्य : पत्रकारिता में आये परिवर्तन

भारत की पत्रकारिता में इन दिनों द्रुतगामी परिवर्तन आये है। आजादी से पहले पत्रकार सच छापते थे, आजादी के बाद खबरें छापने लग गये। और आजकल पत्रकार दोनों से इत्तर

व्यंग्य : माता – पिता बना रहें हैं . …….मिक्स वेज

आज विद्यालय में प्रत्येक विदयार्थियों के माता – पिता को आमंत्रित किया गया था । मैं भी येन-केन प्रकारेण काम-काज निपटा कर विद्यालय जा पहुँची और मुझे देख कर ऐसा

व्यंग्य : सेल्फी विद प्रदूषण

देश की राजधानी में इन दिनों फोग चल रहा है। दिल्ली ठंड के साथ प्रदूषण के कारण भी कांप रही है। प्रदूषण काल बनकर दिल्ली की सड़कों पर नंगा नाच

व्यंग्य: इंटरनेट का जमाना!

आज सोनू ने आकर कहा,”भैया क्या करें! आजकल इंटरनेट का जमाना है मैं इतनी सी बात में भला सन्न रह गया। मुझे एकाएक लगा जैसे सोनू के सामने पहाड़ खड़ा

व्यंग्य : खिचड़ी में हिंग का तड़का ….

एक बार सागर में दो घड़े तैर रहे थे । एक मिट्टी का घड़ा और दूसरा पीतल का था । दोनों तैर तो रहे पर पानी में , पर दोनों

व्यंग्य : वंदेमातरम सुनाएं वो असली नेता होए

भारतीयों को देशभक्ति साल में दो ही दिन याद आती है। एक छब्बीस जनवरी और दूसरी पन्द्रह अगस्त को। बाकि के दिनों में देशभक्ति को गहरी नींद में थपकियां देकर

व्यंग्य : राजनीति के खेल में जनता की चोटी

वैसे तो भारत देश में अनेक खेल समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं लेकिन इसमें “राजनीति का खेल” सबसे अलग हैं। इस खेल को एकाग्रचित होकर पुरे पाँच वर्ष तक

व्यंग्य : विटामिन एम की सबको जरूरत

गरीब, अमीर, दलित, वंचित, शोषित, पीड़ित, अंधा, काना, बैरा, गूंगा, लंगडा, लूला, स्त्रीलिंग, पुल्लिंग, नपुंसकलिंग, बच्चे, बूढे, जवान सबको विटामिन एम की जरूरत है। इस विटामिन के बगैर सारे विटामिनों

व्यंग्य: राजनीति के खेल में जनता की चोटी

वैसे तो भारत देश में अनेक खेल समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं लेकिन इसमें “राजनीति का खेल” सबसे अलग हैं। इस खेल को एकाग्रचित होकर पुरे पाँच वर्ष तक

व्यंग्य : एक झुनझुना कश्मीर के नाम पे …

खुशी की बात है दिनेश्वर शर्मा को मोदी सरकार ने कश्मीर मुद्दे के राजनीतिक हल को तलाशने के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया । वतन मेरा , लोग मेरे ,

व्यंग्य : नाम में बहुत कुछ रखा है

वैसे तो विलियम शेक्सपीयर ने कहा है – नाम में क्या रखा है। लेकिन अपनी जब आंखे खुली तो जाना कि नाम में बहुत कुछ रखा है। इसलिए भी कि

व्यंग्य : बाबाजी की मखमली रजाई

भारत एक बाबा प्रधान देश हैं। इनमें तरह-तरह के बाबा पाये जाते हैं। यह बाबा अंतर्यामी के साथ-साथ सर्वत्र विद्यमान भी हैं। हर गांव शहरों की नुक्कड़ पर दर्शन हो

व्यंग्य : दिवाली के मतलब हजार

भाईसाहब ! दिवाली सिर पर है। हर जगह हर्ष और उल्लास का माहौल है। लेकिन, देश की राजधानी दिल्ली की गलियां सुनसान है। दिल्ली वालों के दिलों पर निराशा के

व्यंग्य : लोकतंत्र को चूहों से खतरा

बेशक, हमें आजादी तो मिली। लेकिन हमें चूहा प्रथा आजादी की मुंह दिखाई में मिली। लोकतंत्र जैसे-जैसे विकास करता गया चूहों का खानदान भी बढ़ता गया। यूं कहिए कि चूहों

व्यंग्य : अपुन के पास टाइम नहीं है

मैंने बस स्टैंड पर खड़े एक भाईसाहब से पूछा – क्या टाइम हुआ है ? मोबाईल पर व्यस्त और मुंह में दबाये हुए पान मसाला मस्त बोले – भीडू !

व्यंग्य : विकास का मतलब मूर्ति खड़ी करना

भारत एक विकासशील देश है। और भारत एक विकासशील देश ही रहेगा ! क्योंकि भारत में नेताओं की अक्ल भैंस चराने गयी है। अब देखते है अक्ल की घर वापसी

व्यंग्य : भक्त, अंधभक्त और पागलपंत

कल शर्मा जी गली के नुक्कड़ पर मिले। हमसे कहने लगे हमारी तो आस्था भगवान-वगवान में बिलकुल भी नहीं है। मैं तो बिलकुल ही घोर नास्तिक हूं। मैंने कहा –

व्यंग्य: टॉयलेट से ताजमहल तक

हमारी सरकार टॉयलेट बनाने पर आमादा है। यूं कहे कि सरकार ने टॉयलेट बनाने का ठेका ले रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां जाते है, वहां शुरू हो जाते है

व्यंग्य : गांधी जी का चौथा बंदर

माने तो जाते है गांधी जी के तीन बंदर लेकिन आजकल चौथे बंदर का फोग चल रहा है। या यूं कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस चौथे बंदर

व्यंग्य  : सपने में रावण से वार्तालाप

मैें स्वप्नदर्शी हूं। इसलिए मैं रोज सपने देखता हूं। मेरे सपने में रोज-ब-रोज कोई न कोई सुंदर नवयुवती दस्तक देती है। मेरी रात अच्छे से कट जाती है। वैसे भी

व्यंग्य : इच्छाधारी हनीप्रीत की तलाश

टी. वी. में अखबारों में नेताओं के नारों में गांव-गली-गलियारों में सब जगह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख फर्जी बाबा राम रहीम गुरमीत सिंह की शिष्या उर्फ दत्तक बेटी हनीप्रीत का

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