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Category: अन्य लेख

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प्राणिमात्र के जीवन का उद्देश्य क्या है ?

कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग आदि किसी भी मार्ग से साधना करने पर भी बिना गुरुकृपा के व्यक्ति को ईश्‍वरप्राप्ति होना असंभव है । इसीलिए कहा जाता है, गुरुकृपा हि केवलं शिष्यपरममङ्गलम्

बेमतलब का अविश्वास प्रस्ताव

वर्तमान मोदी सरकार के निर्धारित मियाद के आखिरी दौर में सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान शुक्रवार को होना तय हो गया। मौजूदा मानसून सत्र

जिंदगी में जरूरी है, पॉजिटिव कम्यूनिकेशन

किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसके बारे में हम बहुत बार सोचते है और फिर उस काम में हो रहे नुकसान से डरते भी है. फिर उस

आंकड़ों के बरअक्स महिला सशक्तिकरण

प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी पूरा विश्व 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है। एक शताब्दी से ज्यादा अर्से से मनाया जाने वाला यह दिवस मुख्यतः

नाम के महिला संगठन

आज जबकि,महिलाओ की दुर्दशा चरम पर है,ऐसे में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना यकीनन ही महिला मुक्ति आन्दोलन को मुहँ चिढ़ाना है।विभिन्न  महिला संगठनों का हर वर्ष महिला दिवस मनाने के

‘‘आखिर कब तक सहेंगे हम घोटाले ? ’’

अल्फ्रेड लार्ड टेनिसन की मशहूर कविता ‘द’ ब्रूक की यह पंक्तियाँ किसी से छिपी नहीं हैं। द ब्रूक कविता बहती नदी के ऊपर है। जिसका तात्पर्य है . मनुष्य आएगा,मनुष्य

बैंक, आम आदमी और नीरव मोदी

एक आम आदमी भारतीय बैंकों के अनगिनत नखरे झेलता है। आम आदमी जब बैंक में खाता खोलने की सोचता है तो उसके सामने कई सारी परेशानियां मुंह बाये खड़ी हो

सामान्य भारतीय जन के प्रतीक हैं ‘शिव’

त्याग और तपस्या के प्रतिरुप भगवान शिव लोक-कल्याण के अधिष्ठाता देवता हैं। वे संसार की समस्त विलासिताओं और ऐश्वर्य प्रदर्शन की प्रवृत्तियों से दूर हैं। सर्वशक्ति सम्पन्न होकर भी अहंकार

‘‘नेतृत्व से शालीन एवं संयमित व्यवहार अपेक्षित’’

संसद लोकतन्त्र का पवित्र मन्दिर है, जिसमें जनता-जनार्दन की निराकार शक्ति विराजती है। हमारे समस्त सांसद जनप्रतिनिधि चाहें वे किसी भी धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, वर्ग से सम्बंधित हों, उसी

वक्त आ गया है पाकिस्तान को औकात बताने का

भारत और चीन के बीच ढाई-तीन महीने तक भारत-भूटान-चीन की सीमा पर दोकलाम में तना-तनी और युद्ध के जैसे हालात बने रहने के बाद जब सीमा पर शांति कायम हुई

पकौड़े पर ओछी राजनीति से बाज आए विपक्ष

तिल का ताड़ कैसे बनता है और किसी बयान को नेतागण किस प्रकार तोड़-मरोड़कर अपने हित में प्रचारित करते हैं– इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का हाल ही

अंकित का खून- जो करते हैं लहू के रंग में फर्क

पिछले एक फ़रवरी की शाम अंकित सक्सेना का राजधानी दिल्ली के रघुवीर नगर में सरेआम कत्ल हो गया। घिनौना, हृदय विदारक और बर्बरतापूर्ण I जैसे बकरे को जिबह (गला रेतकर)

रेल के विकास बिना राष्ट्र का विकास कैसा ?

आगामी आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली रेलवे को क्या देने जा रहे हैं, यह तो 1 फरवरी को ही सही रूप से मालूम पड़ेगा। लेकिन, यह तो तय

‘‘नेतृत्व की शुचिता पर ही जनतंत्र का निर्वाह निर्भर है’’

वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था के संदर्भ मंे अमेरिकन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को उद्घृत करते हुए कहा जाता है कि ‘ जनतंत्र जनता के लिए, जनता द्वारा, जनता का शासन है।’ सिद्धान्ततः

‘वसंत-पंचमी सरस्वती-पूजन का पर्यायरूप उत्सव है’

ऋतुओं में वसंत-ऋतु सर्वश्रेष्ठ है। इसीलिए वसंत को ऋतुओं का राजा माना जाता है। इस ऋतु के प्रवेश करते ही सम्पूर्ण पृथ्वी वासंती आभा से खिल उठती है। वसंत ऋतु

मकर संक्रांति 14 जनवरी : मकर संक्रांति पर धरती-आकाश को जोड़ती हैं पतंगें

पटना 13 जनवरी (वार्ता) मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और चूड़ा-दही खाने के बाद पतंग उड़ाने की दशकों पुरानी परंपरा से जुड़े लोग कल 14 जनवरी को धमाल मचाने की

राजद के लिए आसान नहीं ‘राज’ की राह

लालू यादव अब कैदी हैं। करोड़ों रूपये के चारा घोटाला में वे मुजरिम हैं। सजायाफ्ता हैं। उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अब कठिन परीक्षा के दौर में है। तेजस्वी

सच होता कांग्रेस मुक्त भारत का सपना

समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखा था जो उनके जीवित रहते पूरा नहीं हो सका। लोहिया के चेले ही अपने नेता के सपने

फिल्मों, विज्ञापनों से आहत भावनाएं

बड़ी फिल्मों की रिलीज से पहले इस या उस बहाने हल्ला मचाकर उसकी स्क्रीनिंग रुकवाने की कोशिश करना भारत के लिए नया नहीं है। हाल में पद्मावती के फिल्मकार भंसाली

कृषि संकट के बीच उम्मीद की नई कोपलें

नए वर्ष की तरफ बढ़ते हुए कुछ ऐसे कदमों से शुरुआत करते हैं, जो कृषि के क्षेत्र में छोटी ही सही, लेकिन उम्मीद बंध्ााते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार

पुण्यतिथि : सरदार पटेल- जिन्होंने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया

एक ब्रिटिश भारतीय लोक सेवक सर जॉन स्ट्रैचे अपने प्रशिक्षु लोक सेवकों को संबोधित करते हुए कहा करते थे कि “भारत के बारे में प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह

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