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15 दिसम्बर पुण्य तिथी : सच्चे किसान हितैषी थे शीशराम ओला

ओला भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता रहे हैं जिन्हे सदैव किसानो के सच्चे हितैषी के रूप में याद किया जाता रहेगा। झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार चुनाव जीत कर रिकार्ड बना चुके ओला का राजनीतिक जीवन 1957 से शुरू हुआ था। शीशराम ओला का जन्म 30 जुलाई,1927 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के अरड़ावता गांव में एक किसान मंगलाराम के घर हुआ था। घर में आर्थिक अभाव के कारण शीशराम ओला ने मैट्रिक की पढ़ाई करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती हो गये। उन्होने सेना की और से द्वितीय महायुद्व में भाग लिया। उस समय समाज में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं थी जिसका मूल कारण था महिलाओं का अशिक्षित होना। समाज में महिलाओं की दशा सुधारने का संकल्प कर ओला ने सेना से त्यागपत्र देकर समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा।

उन्होने महिला शिक्षा की दिशा में कार्य करने का बीड़ा उठाते हुये 1952 में अपने पैतृक गांव अरड़ावता में इन्दिरा गांधी बालिका निकेतन के रूप में क्षेत्र में पहली बालिका स्कूल की स्थापना की जिसका उद़घाटन 10 अक्टूबर 1952 को देश के प्रथम थलसेना अध्यक्ष जनरल के.एम.करिअप्पा के हाथों करवा कर राजस्थान में महिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी मशाल जलाई। मात्र तीन बालिकाओं से शुरू किया गया वही स्कूल आज डिग्री कालेज बन चुका है जहां कई व्यावसायिक व अन्य उच्चतर विषय पढ़ाये जाते हैं। वर्तमान में वहां तीन हजार से अधिक छात्राये अध्यनरत है, तथा लाखों छात्रायें अपनी शिक्षा पूरी कर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

ओला की समाजसेवा व सक्रियता को देखकर कांग्रेस पार्टी ने उनको 1957 में पहली बार खेतड़ी से विधानसभा का टिकट दिया जिसमें वे विजयी हुये। शीशराम ओला ने 1957 लेकर 1993 तक लगातार दस बार राजस्थान विधान सभा का चुनाव लड़ा जिसमें दो बार को छोडक़र आठ बार जीत दर्ज की। ओला 18 फरवरी 1981 से 1990 तक राजस्थान सरकार में जगन्नाथ पहाडिय़ा, शिवचरण माथुर,हीरालाल देवपुरा व हरिदेव जोशी के नेतृत्व वाला सरकारों में जलदाय,वन एवमï् पर्यावरण, पंचायतीराज एंव ग्रामीण विकास, सैनिक कल्याण, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना,परिवहन,यातायात,सहकारिता,आबकारी,भू-जल,सिंचाई सहित कई विभागों को मंत्री के रूप में संभाला। ओला 1962 से 1977 तक दो बार झुंझुनू के जिला प्रमुख भी रहे। ओला अपने जीवन में आठ बार विधायक,पांच बार संासद व दो बार जिला प्रमुख का चुनाव जीत कर कुल 15 चुनाव जीतने वाले देश के एकमात्र राजनेता थें।

1996 में ओला ने 11 वीं लोकसभा के लिये कांग्रेस से टिकट मांगा मगर टिकट नहीं मिलने पर उन्होने कांग्रेस छोडक़र झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से तिवाड़ी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ कर कांग्रेस प्रत्यासी व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन अयूब खान को हरा कर लोकसभा में प्रवेश किया उसके बाद बाद वे लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीत कर एक रिकार्ड बनाया है। ओला को 28 जून 1996 को प्रधानमंत्री देवेगोड़ा की सरकार में स्वतंत्र प्रभार के उर्वरक एंव रसायन राज्य मंत्री बनाया गया। 1997-98 में इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार में उन्हे स्वतंत्र प्रभार का जल संसाधन राज्य मंत्री बनाया गया। 23 मई 2004 से 27 नवम्बर 2004 तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए वन की सरकार में श्रम एवमï् रोजगार विभाग के केबीनेट मंत्री तथा 27 नवम्बर 2004 से 22 मई 2009 तक खान विभाग के केबीनेट मंत्री रहें हैं। उन्हे 2010 में लोकसभा में कांग्रेस कांग्रेस संसदीय दल का उपनेता मनोनित किया गया था। सितम्बर 2013 में उन्हे पुन: केन्द्रीय मंत्रीमंडल में श्रम व रोजगार मंत्री बनाया गया था।

ओला को उनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किये गये विशेष कार्यो के लिये सरकार द्वारा उन्हे 1968 में पदम् श्री से सम्मानित किया गया था। 1972 से अपनी मृत्यु ओला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लगातार सदस्य रहें। वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष व किसान सेल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 15 दिसम्बर 2013 को ओला का केन्द्रीय सरकार में केबीनेट मंत्री पद पर रहते हुये नई दिल्ली में निधन हो गया था। ओला के बड़े पुत्र बृजेन्द्र सिंह ओला वर्तमान में झुंझुनू से विधायक है। शीशराम ओला ने अपनी जिन्दगी में एक सपना देखा था कि झुंझुनू जिले में भी नहर के पानी से खेतों में फसलों की सिंचाई हो सके ताकि हरियाणा की तरह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के किसान भी खुशहाल बन सके मगर उनके जीते जी नहर का पानी झुंझुनू जिले में नहीं आ पाया अब देखते हैं कि ऐसा कौन भागीरथ बनता है जो उनके सपने को पूरा कर सके।

आलेख:-
रमेश सर्राफ धमोरा
स्वतंत्र पत्रकार

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