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खरमास की शुरुआत, भूलकर भी न करें ये काम

15 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश कर रहे हैं. सूर्य के इस राशि में प्रवेश के साथ शुभ कार्य बंद हो जाते हैं. ये स्थिति लगभग एक माह तक बनी रहती है और सूर्य के पुनः मकर राशि में जाने के बाद ही शुभ कार्य शुरू हो पाते हैं. इस दिन से सभी मांगलिक कार्य निषेध हो जाएंगे. इस बार खरमास 14 जनवरी को समाप्त होगा.

सूर्य का किसी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है और जब सूर्य धनु राशी में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है. धनु राशि बृहस्पति की आग्नेय राशि है और इसमें सूर्य का प्रवेश विशेष परिणाम पैदा करता है. बीमारियाँ और रोग बढ़ते हैं , लोगों के मन में खूब सारी चंचलता आ जाती है. इस समय ज्योतिषीय कारणों से शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं अतः इसे धनु खरमास भी कहते हैं. आगे की स्लाइड्स में जानिए कौन से काम हैं वर्जित और क्यों…

खरमास को लेकर एक मान्यता के अनुसार, सूर्य अपने तेज को अपने गुरु के घर में पहुंचते ही समेट लेता है. अपने प्रभाव को छिपा लेता है और गुरु को साष्टांग नमन कर प्रभावहीन हो जाता है. ऊर्जा के देवता के प्रभावहीन हो जाने पर समस्त शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं, क्योंकि किसी भी कार्य में ऊर्जा की जरूरत होती है.

सूर्य की धनु संक्रांति के दौरान तमाम शुभ काम बंद हो जाते हैं क्योंकि इस दौरान सूर्य और धनु राशि का दुर्योग तमाम दुष्प्रभावों को जन्म देता है. तो आइए जानते हैं कि धनु खरमास में आखिर कौन-कौन से शुभ काम करने की मनाही है और खरमास में शुभ काम शुरू करने के क्या–क्या दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं.

विवाह क्यों वर्जित होता है ?किसी भी विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. धनु राशी को सम्पन्नता और भाग्य की राशि माना जाता है. इस समय सूर्य धनु राशी में चला जाता है , जिसको सुख समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता. इस समय अगर विवाह किया जाए तो न तो भावनात्मक सुख मिलेगा और न ही शारीरिक सुख. साथ ही हर तरह से भाग्य कमजोर होने की स्थिति बन जायेगी.

नया व्यवसाय या नया कार्य क्यों आरम्भ न करें ?धनु खरमास में नया व्यवसाय आरम्भ करना आर्थिक मुश्किलों को जन्म देता है क्योंकि इस समय बिना चाहे खर्चे काफी बढ़ सकते हैं. इस अवधि में शुरू किये हुये व्यवसाय बीच में रुक जाते हैं या व्यवसाय में काफी कर्ज हो जाता है और लोगों के बीच में धन फँस जाता है.

अन्य मंगल कार्य जैसे द्विरागमन,कर्णवेध, और मुंडन क्यों वर्जित है ?- अन्य मंगल कार्य भी इस अवधि में वर्जित होते हैं.- क्योंकि धनु राशी यानी अग्नि भाव में सूर्य का होना , इस अवधि में चीज़ों को बिगाड़ सकता है.- साथ ही साथ इस अवधि के किये गए कार्यों से रिश्तों के ख़राब होने की सम्भावना होती है.

नए मकान का निर्माण और संपत्ति का क्रय क्यों होता है वर्जित ?संपत्ति बनाने का उद्देश्य संपत्ति का सुख पूर्वक उपभोग करना है. परन्तु अगर इस समय में मकान बनाया जाएगा तो उसका सुख मिल पाना काफी कठिन होगा. अगर ऐसा प्रयास किया जाय तो काम बीच में , बाधाओं के कारण रुक भी सकता है. कभी कभी दुर्घटनाओं की सम्भावनाएं भी बन जाती हैं. इस अवधि में बनाये गए मकान आम तौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं मिल पाता.

धनु खरमास में कौन से कार्य कर सकते हैं ?अगर प्रेम विवाह या स्वयंवर का मामला हो तो विवाह किया जा सकता है. अगर कुंडली में बृहस्पति धनु राशी में हो तो भी इस अवधि में शुभ कार्य किये जा सकते हैं. जो कार्य नियमित रूप से हो रहे हों उनको करने में भी खरमास का कोई बंधन या दबाव नहीं है. सीमान्त,जातकर्म और अन्नप्राशन आदि कर्म पूर्व निश्चित होने से इस अवधि में किये जा सकते हैं. गया में श्राद्ध भी इस अवधि में किया जा सकता है , उसकी भी वर्जना नहीं है

इस माह का नाम खरमास क्यों पड़ा इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है. सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ में भ्रमण कर रहे थे. घूमते घूमते अचानक उनके घोड़े प्यास बुझाने के लिए तालाब के किनारे पानी पीने लगे. पानी पीने के बाद घोड़ों को आलस्‍य आ गया और तभी सूर्यदेव को स्मरण हुआ कि सृष्टि के नियमानुसार उन्हें निरंतर ऊर्जावान होकर चलते रहने का आदेश है. घोड़ों के थक जाने के बाद सूर्यदेव को तालाब के किनारे दो गधे दिखाई दिए. सूर्यदेव उन गधों को अपने रथ में जोतकर वहां से चल दिए. इस तरह सूर्यदेव इस पूरे माह मंद गति से गधों की सवारी से चलते रहे. इस समय उनका तेज भी कम हो गया. पुनः मकर राशि में प्रवेश करने के समय एक माह पश्चात वह अपने सातों घोड़ों पर सवार हुए.

तो पूरे खरमास में कोई भी काम करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखिए. फिर ये काला मास भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.

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