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नूर साहब अपनी शायरी में हमेशा ज़िन्दा रहेंगे

किसी किसी को खुदा की ये देन मिलती है,
नहीं है सबके मुकद्दर में शायरी करना

इस ख़ूबसूरत शे’र को कहने वाले हर दिल अजीज़ शायर श्याम नंदा नूर अब इस दुनिया में नहीं रहें , किन्तु उनकी खूबसूरत यादें उनका लाजबाब शायरना अंदाज़ हम सभी के ह्रदय में अपना एक अलग स्थान बना चूका हैं जो कभी भुलाए नहीं भूल सकते , नूर साहब से मेरी प्रथम मुलाक़ात नवांकुर साहित्य सभा की मासिक काव्य गोठी में दिनाँक 24-06-2014 को ‘दिल्ली पब्लिक पुस्तकालय’ (पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने) हुई थी ,बेहद मिलनसार व्यक्तित्व के धनि नूर साहब से मेरी प्रथम मुलाक़ात के दौरान मुझे लग ही नहीं रहा था की हम पहली बार मिल रहे हैं ,वैसे तो फेसबुक पर मेरी लगभग हर पोस्ट पर उनके लाईक और कमेन्ट आते रहते थे ,पर उस दिन उनसे मेरी साक्षात मुलाक़ात हुई मैं उनसे मिला और ढेरो बात चीत हुई ,काव्य गोष्ठी के दौरान नूर साहब का काव्यपाठ सुना तो मैं दंग रह गया इतनी उम्र होने के बावजूद भी उनमे शायरी पढने का इतना जोश …बस वहीँ से मैं नूर साहब के शायराना अंदाज़ का मुरीद हो गया ,
,एक दफ़ा जब हम एक साहित्यिक जलसे से लौट रहे थे तो रास्ते में मैंने अपनी कुछ टूटी फूटी पंक्तियाँ उन्हें संकोच करते हुए दिखलाई तो उन्होंने मुझसे कहा -गिरि सहाब, आपके भाव तो बहुत सुंदर हैं बस शब्द कुछ इधर उधर भटक रहें हैं ,मैं आपको शाईरी के पवार हॉउस से डायरेक्ट मिलवा देता हूँ ,उनसे इस्लाह करने पर आपकी शाईरी में निखार आ जाएगा ,नूर साहब के अथक प्रयास से ही मुझे मेरे मोहतरम उस्ताद आदरणीय श्री राजेन्द्र नाथ रहबर जी के दर्शन नसीब हुए और उनके चरणों में बैठ कर ग़ज़ल की बारीकियों को सीखने और समझने का अवसर प्राप्त हो सका ! बस तभी से मैं ग़ज़ल लिखने और कहने लगा कहीं कोई शे’र बहुत अच्छा हो जाता तो नूर साहब मेरा हौशला बढाने के लिए कहते .”नंदा नूर खुश हुआ ” एक बार जब मैंने उन्हें उनका पेन्सिल स्केच बना कर मैसेज बॉक्स में दिखाया तो उन्होंने कहा —-“गज़ब बहुत्त ही लाजवाब नंदा नूर खुश हुआ अभी कमेंट करता हूँ जीते रहो आशीर्वाद मेरा सदा आपके साथ है संजय गिरि साहब जी””
कई साहित्यिक काव्य गोष्ठियों में वे अपनी सुंदर ग़ज़लों में जब यह ग़ज़ल पढ़ते तो सभा में उपस्थित सभी कवि एवं श्रोता झूम उठते –

तेरे मिलने से हम को खुशी मिल गई
यूँ लगा इक नई ज़िंदगी मिल गई
हम तो तन्हा चले थे मगर राह में
मिल गए हम-सफ़र दोस्ती मिल गई

नूर साहब ने अपने इस खूबसूरत शे’र के माध्यम से बिलकुल सत्य ही कहा है कि इस जहाँ में शे’र में और शाईरी करना हर किसी के बस की बात नहीं हैं और

उनका यह शे’र बहुत फेमस भी हुआ —-
किसी किसी को खुदा की ये देन मिलती है,
नहीं है सबके मुकद्दर में शायरी करना

विश्वास ही नहीं हो रहा के आज नूर सहाब हमें छोड़ इस दुनिया से चल बसे ,अभी कल शाम ही तो उनसे उनकी शॉप पर जाकर मिलना हुआ मैंने और उन्हें रजनीगन्धा पुस्तक भेंट की , नूर साहब नेे मेरी बात रहबर साहब से भी करवाई और बहुत जल्द ही हम सभी के मिलने की बात हुई और मैं घर आ गया ,फिर आज सुबह उठते ही यह सूचना मिली की अब नूर साहब नहीं रहे , हे प्रभु नूर साहब को अपने चरणों में स्थान दे ॐ शान्ति ॐ . आप हमारे दिल में सदा जिन्दा रहेंगे नूर साहेब ….

संजय कुमार गिरि

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