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मतदाता की बेरुखी के बीच चुनाव परिणाम

चुनाव विश्लेषकों के बड़े-बड़े दावों व गुजरात और हिमाचल प्रदेश की मतगणना के रुझानोें के बीच यह आलेख आपके सामने है। प्रश्न यह नहीं है कि चुनावों में कौन सा दल जीत रहा है और प्रश्न यह भी नहीं है कि किसके एक्जिट पोल के दावें खरे उतर रहे हैं बल्कि प्रश्न यह उभर कर आता है कि गुजरात के विकास के पगलाए ना पगलाए जाने से लेकर पाकिस्तान की दखल तक के सारे दावों के बावजूद मतदाताओं की बेरुखी आखिर क्यों देखने को मिली ? चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदान के आंकड़ों के अनुसार इस बार गुजरात में गए चुनाव से करीब 3.55 प्रतिशत कम वोट पड़े हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2014 के चुनावों के बाद गुजरात देश का सातवां ऐसा राज्य हो गया है जहां कम वोटिंग हुई है। आंकड़ोें के अनुसार इस बार गुजरात में 67.75फीसदी मतदान हुआ है। सबसे मजे की बात यह है कि चुनावों के लेकर जिस तरह का प्रचार अभियान चला और जिस तरह से आरोप प्रत्यारोप का दौर चला और जिस तरह से आरोप प्रत्यारोपों को लेकर मीडिया खासतौर से टीवी चैनलों ने लगभग प्रतिदिन लंबी लंबी बहसें आयोजित की उस सबके बावजूद मतदाता की बेरुखी या यों कहें कि मतदाता का मतदान केन्द्र तक नहीं जाना निश्चित रुप से चिंता का विषय है। आखिर इतनी अवेयरनेस के बाद भी मतदान का प्रतिशत कम होना किस ओर इशारा कर रहा है यह चुनाव विश्लेषकों और चुनाव आयोग के साथ ही राजनीतिक दलों के लिए भी विचारणीय होना चाहिए।
पूरे देश की नजर निश्चित रुप से खासतौर से गुजरात चुनावों की और रही। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि विदेशों में भी गुजरात के चुनावों को गंभीरता से देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के अब अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पूरे मनोयोग से चुनाव केंपेन का संचालन किया। गुजरात के लगभग सभी इलाकों को इन दोनों नेताओं की रैलियों, रोड़ शो ने छुआ है। हजारों लाखों लोगों के रैलियों में भागीदारी के दावें किए गए। राष्ट्र्ीय चैनलों ने गुजरात चुनावों की हर गतिविधि को प्रमुखता से स्थान दिया यहां तक कि लगभग एक सवा माह तक चैनलों से राष्ट्र्ीय मुद्दों के स्थान पर चुनाव प्रचार के दौरान कही जाने वाली बातें ही बहस का मुद्दा बनी रही। इससे साफ है कि चुनाव के बारे में गुजरात का एक एक मतदाता अवेयर था, पर इस सबके बावजूद 30-32 प्रतिशत तक मतदाताओं का मतदान केन्द्र तक नहीं जाना आखिर क्या दर्शाता है ? लगता है जैसे मतदाता अपने मताधिकार के प्रति गंभीर ही नहीं है।
एक बात जो अपने आपमें गंभीर व चिंतनीय है वह यह कि पिछले दिनों किसी प्रकरण में देश के सबसे बड़े न्याय के मंदिर ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी जिसका सार यह माना जा सकता है कि जो मतदान नहीं करता उसे सरकार के विरुद्ध किसी बात को उठाने का हक भी नहीं है। आखिर लोकतंत्र में आपको अपनी सरकार चुनने का अधिकार है। चुनाव आयोग ने लाख प्रयास कर चुनाव को आसान बनाया है। घर के पास ही मतदान केन्द्र खोले हैं, अब लंबी लंबी कतारों वाली बात भी कम ही देखने को मिलती है। कानून व्यवस्था को भी इस कदर सुधारा गया है कि दबंगों वाली बात भी लगभग नहीं के बराबर है। चुनाव आयोग द्वारा निष्प़क्ष चुनाव की व्यवस्था के साथ ही मतदाताओं को अवेयर करने के प्रयास किए जाते हैं। मतदाता पर्ची तक चुनाव आयोग उपलब्ध कराकर राजनीतिक दलों पर निर्भरता खत्म की है। निष्पक्ष व बेखोफ मतदान के लिए बाकायदा अभियान चलाकर अवेयर किया जाता है। दूसरे प्रदेश के अधिकारियों को पर्यवेक्षक लगाया जा रहा है। और अब तो ईवीएम के साथ वीवीपीटी की व्यवस्था भी गुजरात चुनाव में की जा चुकी है। मतदाताओं को नोटा का अधिकार दिया गया है। मतदान के दिन वेतनीक अवकाश दिया जाता है, इस सबके बावजूद मतदान प्रतिशत कम रहना वास्तव में गंभीर है।
गुजरात और हिमाचल के परिणाम आज सामने होंगे। एक्जिट पोल की वास्तविकता सामने आ जाएगी। 70 फीसदी से भी कम मतदाताओं के मतदान से प्रत्याशी चुने जाएंगे। लगभग एक तिहाई मतदाताओं की बेरुखी के बावजूद सरकार बन जाएगी। पर प्रश्न यह है कि मतदाताओं की यह बेरुखी या यों कहे कि मताधिकार का उपयोग नहीं करना वास्तव में गंभीर है। प्रश्न यह है कि आखिर जो अपने मतदान के अधिकार का उपयोग नहीं करता उसे सरकार की आलोचना करने का क्या हक है? प्रश्न यह भी है कि ऐसे लोगों को जो मतदान में हिस्सा नहीं लेते, अपने कर्तव्य से विमुख रहते हैं उन्हें सरकारी सुविधाओं का उपयोग करने का क्या हक रहा जाता है? क्या केवल गाल बजाने के लिए ही हम रह गए हैं। अपने कर्तव्य से विमुख होकर लंबी लंबी बाते करना ही हमारा काम रह गया है? सरकार और चुनाव आयोग दोनों के साथ ही गैरसरकारी संगठनों और विश्लेषकों को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। क्योंकि अगले साल राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं। मतदान के प्रति बेरुखी को तोड़ने के ठोस उपाय खोजने ही होंगे।

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा,
रघुराज, एफ-2, रामनगर विस्तार, चित्रांष स्कूल की गली,
ज्योति बा फूले काॅलेज के पास, स्वेज फार्म, सोडाला, जयपुर-19
फोन-0141-2293297 मोबाइल-9414240049

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