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व्यंग्य : तीखी मिर्ची का DNA टेस्ट….

अरे ! शर्मा जी ज़रा रुकिए । कैसे हैं , काफी दिनों बाद दिखाई दिए ? चाय तो पीते जाइये । मैंने पीछे से आवाज़ लगाई । हम आवाज लगाते ही रह गये पर शर्मा जी रुके ही नहीं । कुछ देर बाद जब हम पहुँच सब्जी बाज़ार तो शर्मा जी मिर्ची खरीद रहे थे । झोली भर सिर्फ मिर्च ही लिए । पता चला कि उनकी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह है । खाने की खपत कम हो और दुश्मन दोस्तों से भी मीठी दुश्मनी निकाली जा सके । एक तीर से दो निशाना लगाने वाली थी ये तीखी मिर्ची ।
जानकर बड़ी खुशी हुई चलो कोई नेकदिल इंसान है जो मेरा दर्द समझ रहा है ।
अब कल ही की बात है शर्मा जी की श्रीमती यूँ तो कभी बाहर निकलती नहीं है पर जब निकलती है तो पड़ोसिन अपनी साड़ी दिखा कर मिर्ची लगाती है । मेरी साड़ी कोल्हापुर की है । कभी लखनऊ की तो कभी गुजरात की तो कभी दिल्ली की ।

अब केजरीवाल की ऑड- इवन फार्मूला की बात से भारतीय जनता पार्टी को मिर्ची लग गयी और केजरीवाल अपने सबूत इकट्ठा कर – कर के बीजेपी को मिर्ची लगा रहे हैं ।

मिर्ची है बड़ी मज़ेदार चीज़ है । अब कल की बात है मेरी सास से मेरी चुगली अपने पास वाली मौसी से किया । मौसी जी ने भी नमक – मिर्ची लगाकर अपने बहु की चुगली की । बात सही हो यह जरूरी नहीं पर मिर्ची तो लगनी ही थी । सास और बहु के रिश्तों में मिर्ची का तीखापन न हो , ये तो हो नहीं सकता ।

मिर्ची की बात हो और मनमोहन जी का ज़िक्र न हो ये बात कुछ जमी नहीं । मिर्ची चाहे जितनी तीखी क्यों न हो पर उनको तो लगती ही नहीं । उफ तक नहीं निकलती है । वहीँ बाबा राहुल की बात तो निराली है । हर बात पे मिर्ची लग जाती है ।

बाबाओं में बाबा आशा राम , राम रहीम । कुछ बाबाओं को तो लाल मिर्ची रगड़ दो , कोई असर ही नहीं होता । भारत की जनता भी कम नहीं है । किलो भर मिर्ची रगड़ कर जेल की चक्की पिसवा रही है दोनों को । लालू को तो चारा घोटाला के बाद मिर्ची खाने की आदत हो गई है । राबड़ी जी तो खोये में मिर्ची डाल – डाल कर जनता को खिला रही थी । मुलायम जी तो अपने बेटे अखिलेश को धानी मिर्ची खिलाने से नहीं चुके । नतीजा क्या निकला किसी तीसरे ने मिर्ची लाकर गद्दी हथिया ली ।

चुनाव का माहौल है । गुजरात में तो अभी भाव कुछ 100 रुपए पाव चल रहे है । इतना महँगा मिर्च । बिक्री इतनी की माँग पूर्ति नहीं हो पा रही है । बाहर गाँव से मँगवाया जा रहा है । जिसे देखो उसके हाथों में लाल मिर्ची । हर राजनेता मिर्ची लिए खड़ा है । वाह ! रे मिर्ची , लग तो हर किसी को जाती है । अब मणिशंकर अय्यर को ले लीजिए । उनकी मिर्ची तो लाल , हरी दोनों किस्म की थी । अब मोदी जी को उनके मिर्ची का सामना करना पड़ा ।

तीन तलाक के रोक पर सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसले से कई कट्टरपंथी मुसलमानों को मिर्ची लग गई । इतनी मिर्ची लगी की इसकी तीखी स्वाद पाकिस्तान के आकाओं ने भी चखा । कोर्ट की मिर्ची बहुत तीखी होती । अच्छे – अच्छों को रुला देती है , पाकिस्तान की क्या औकात है । लग गई मिर्ची उनको भी ।

अब चीन को तो बात – बात पर मिर्ची लग जाती है । हम भी कम थोड़े ही है । कूटनीति के चाशनी में डुबो कर मिर्ची हम उन्हें उपहार के रूप में देते रहते हैं । बेहद तीखी मिर्ची है ये उनको अब तक तो पता चल गया होगा ।

हाय ! रे मिर्ची । पद्मावती फिल्म रिलीज हुई नहीं कि करनी सेना और राजपूतानी परिवार को मिर्ची लग गई । यूँ तो मिर्ची लगाई जाती दूसरे को पर यहाँ कुछ और ही मामला है । आ मिर्ची मुझे लग , ये कथन यहाँ उपयुक्त बैठता है ।

सच बात कहे कोई तो किसी दूसरे को मिर्ची लग जाती है । इतिहास पलट कर देखे तो देश के बँटवारे से लेकर राजनीतिक उलट – फेर तक किसी एक राजनीतिक दल ने पूरे देश का हुलिया ही बदल डाला । सबूत रखो तो सब को मिर्ची लग जाती । सरदार वल्लभ भाई पटेल जी को प्रधानमंत्री बनने के लिए सबसे ज्यादा वोट मिले । लेकिन हुआ कुछ और । नतीजा आज तक हम जनता भुगत रहे हैं । हाय ! रे मिर्ची तेरे रूप अनेक ।

अब मिर्ची से अछूता तो खेल जगत भी नहीं है । विराट – अनुष्का का विवाह इटली में सम्पन्न हुआ और यहाँ के बरातियों को मिर्ची लग गई । अरे साहब उनकी अपनी व्यक्तिगत नीजी फैसले हैं । विवाह उनकी और मिर्ची कुछ बरातियों को लग गई है । फेसबुक में लंबे – चौड़े लेख । लेख पढ़कर पता लगा कि मिर्ची बड़ी तीखी है ।

साहित्यि जगत की मिर्ची तो दूर – दूर तक प्रसिद्ध है । वरिष्ठ साहित्यकार को मिर्ची तब लगती है जब कल का खेलता हुआ बच्चा अखबार में लिखने लगता है । ये मिर्ची तो हाजमा खराब कर देता है । अपने से आगे न बढ़ जाए , वरिष्ठ जन हर मुमकिन कोशिश करता रहता है । सब ठीक चलता है पर अचानक वरिष्ठ लेखक को फिर से मिर्ची लगती और बड़ी तीखे से लगती है जब बाज़ार से उस तुच्छ लेखक की पुस्तक दुकानदार के आग्रह पर ले आता है । जैसे – जैसे वह कहानी पढ़ता है मिर्ची तेज़ लगती ही जाती है । उफ ! ये मिर्ची ।

मिर्ची तो मिर्ची है । आज के कवि गण तो हाथ में मिर्ची लिए फिरते हैं जहाँ मौका मिला नहीं की बम – बारी शुरू । अपने शेरो – शायरी से राजनेता तो राजनेता , पाकिस्तान को तक नहीं छोड़ते । बेचरे नेता , हरिओम पवार जी की मिर्ची को झेलते हैं और साथ में युवाकवियों को भी बरदास्त करते हैं । विगत दिनों अखिल भारती कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि श्री केजरीवाल जी को बुलाया गया । फूल , श्रीफल देकर सम्मानित किया गया और फिर शुरू हुआ कविताओं का दौर । एक के बाद एक कवि अपने तीखे मिर्ची लेकर वार करना प्रारंभ किए । पहले सरकार को मिर्ची फिर व्यवस्था को मिर्ची फिर घोटालों को मिर्ची फिर नेताओं को मिर्ची और अंत में तो महाशय केजरीवाल को मिर्ची । बेचारे न पचा पाए न उगल पाए । संस्था के नाम से चँदा भी वसूल किया गया । महाशय पानी को तरस गये । मिर्ची लगा – लगा कर उन्हें लाल – पीला किया गया । अंत में महोदय अपना श्रीफल , फूल छोडकर भाग खड़े हुए । क्या करें मिर्ची ही तीखी थी ।

बात मिर्ची की है तो ये तो भी सच है कि सत्य की मिर्ची हमेशा अपने पास रखनी चाहिए । सही समय पर ये हथियार सबसे खतरनाक होता है । बस मिर्ची लगा देना चाहिए । निश्चित फतह आपकी होगी ।

मल्लिका रुद्रा ‘ मलय – तापस ‘
बरतुंगा , चिरमिरी ( छत्तीसगढ़ )

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