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प्रेम कुमार धूमल ही बनेंगे मुख्यमंत्री, पार्टी में मंथन जारी

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री के घोषित उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार चुके हैं लेकिन पार्टी की जीत में उनके योगदान को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. चुनाव हारने के बावजूद जीते हुए 44 विधायकों में से करीब 30 विधायक धूमल को ही मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं और काम विधायकों ने तो बाकायदा बयान देकर अपनी-अपनी सीट धूमल के लिए खाली करने का प्रस्ताव रखा है. पार्टी को जिताने में धूमल की भूमिका और विधायकों के बहुमत को देखते हुए पार्टी हाईकमान उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रहा है. उन्हें चुनावों से पूर्व ही मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था लेकिन वह बहुत छोटे मार्जिन से अपनी सीट से चुनाव हार गये हैं. उनकी हार के कई कारण हैं और पार्टी आलाकमान जानता है कि उन्हें नामांकन प्रक्रिया के बीच सीट बदलने का फरमान सुनाया गया था. इससे पहले वह बमसन विधानसभा सीट तथा हमीरपुर सीट से विधायक थे लेकिन डिलिमिटेशन के बाद बदले समीकरण को बाद एक रणनीति के तहत उन्हें अंतिम समय पर सीट बदलने के लिए कहा गया था लेकिन इससे पार्टी को नुकसान हुआ है और एक सीट पाने की चाह में पार्टी ने हमीरपुर जिले की तीन सीटों को खोया है. अपनी सीट पर धूमल प्रचार को लिए समय ही नहीं निकाल पाये और उनकी सीट के प्रचार का सारा दारोमदार उनके छोटे बेटे अरूण धूमल ने संभाल रखा था और वह स्थिति को भांप ही नहीं पाये. प्रेम कुमार धूमल और उनके सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर प्रदेश भर में दूसरे नेताओं को जिताने में डटे रहे लेकिन धूमल की सीट दरक गई. नामांकन के दिन चौगान मैदान में आयोजित जनसभा में जरूर भारी भीड़ उमड़ी थी और सभी को भरोसा था कि यकीनन गुरू अपने शिष्य को मात देंगे और पहले भी इस सीट पर भाजपा के ही विधायक नरेन्द्र ठाकुर थे जिनके हारने के डर से उनकी सीट बदल हमीरपुर कर दी गई थी. ऐन वक्त पर सीट बदले जाने के बाद पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ता और समर्थक दबी जुवान से धूमल की हार की आशंका जता रहे थे लेकिन खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं था लेकिन जब उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया तो लोग आश्वस्त थे कि सुजानपुर विधानसभा के लोग विधायक नहीं बल्कि मुख्यमंत्री चुनेंगे लेकिन आशंकाएं निर्मूल साबित नहीं हुई और अंतत: धूमल चुनाव हार गये लेकिन उनकी हार उनके कैरियर का अंत नहीं है. हारने के बाद मंत्री या मुख्यमंत्री बनाना पार्टी आलाकमान की इच्छा पर निर्भर है और केन्द्रीय मंत्रिमंडल में केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली और स्मृति ईरानी इसके उदाहरण हैं. दोनों नेताओं ने लोकसभा चुनाव लड़ा था और हार गये लेकिन इसके बावजूद केन्द्रीय मंत्री परिषद में उन्हें जगह दी गई और अब दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं. ऐसा पहले भी होता रहा है. चूंकि हिमाचल में कोई विधान परिषद नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री बनने वाले सदस्य को छह माह के भीतर विधान सभा में चुनकर आना जरूरी है.
आखिरी समय पर बीजेपी द्वारा प्रेम कुमार धूमल की सीट बदलने पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. चुनाव परिणाम के बाद अपनी हार स्वीकारने हुए खुद धूमल ने कहा है कि आखिरी समय में हमीरपुर से सुजानपुर सीट बदलने का फैसला भारी पड़ गया और पार्टी हाईकमान द्वारा अचानक सीट बदलने से उन्हें प्रचार के लिए भी समय नहीं मिल पाया. उनका कहना है कि हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के हर मतदाता एवं परिवार से भी वह वाकिफ थे और यहीं से उनकी तैयारी थी लेकिन पार्टी के निर्देश पर उन्होंने केवल आदेश का पालन किया है. प्रेम कुमार धूमल का कहा कि “चुनाव के दौरान मैंने मोदी जी और अमित शाह जी के नेतृत्व में जो कठिन परिश्रम किया उसका अच्छा नतीजा पार्टी को मिला. मैं अपनी हार के लिए किसी को दोष नहीं दूंगा बल्कि मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने बीजेपी को सपोर्ट किया. अब आत्मनिरीक्षण का समय है. मैं पार्टी का एक सिपाही हूं और इसे जारी रखूंगा. चुनाव परिणाम में पार्टी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और यह प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी के दिशा-निर्देश से संभव हुआ है. सुजानपुर विधानसभा सीट मेरे लिए नई थी. मुख्यमंत्री प्रत्याशी होने की वजह से मैंने पूरे राज्य में ध्यान केंद्रित किया, यह सुनिश्चित किया कि पार्टी पूरे बहुमत से जीते और सेंट्रल लीडरशिप ने मुझ पर विश्वास किया और मुझे पार्टी की जीत के लिए प्रोत्साहित किया.मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि मैं सबकी मदद से भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में सफल हुआ हूँ. सभी ने पार्टी के लिए प्रयास किया फिर वो चाहे पार्टी का एक कार्यकर्ता हो या केंद्रीय मंत्री हों. मैं पिछले कुछ समय से हमीरपुर क्षेत्र से चुनाव लड़ने की वजह से वहां से भली-भांति वाकिफ था. मुझे लगता है कि सीट बदलने का फैसला थोड़ा देर से आया जिस वजह से बड़ी जिम्मेदारी होते हुए मैं नए विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त प्रचार का समय नहीं निकाल पाया. तीन दशक से पार्टी का एक प्रतिबद्ध कार्यकर्ता रहा हूं और आगे भी रहूंगा. मुझे जो भी कहा जाएगा उस काम को करने में मुझे खुशी होगी. अब हमारा लक्ष्य अब 2019 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है और व्यक्तिगत हार से कहीं ज्यादा पार्टी की जीत मायने रखता है.”

कुटलैहड़, सरकाघाट और पांवटा विधायकों ने किया ऐलान
सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र से जीत की हैट्रिक लगाने वाले भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर ने प्रेम कुमार धूमल के लिए अपनी सीट छोडने का ऐलान किया है. सरकाघाट में उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा कि उन्हें राजनीति में प्रेम कुमार धूमल ही लाए थे. दो बार हार के बाद भी पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हीं के आशीर्वाद से सरकाघाट से लगातार तीन बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रेम कुमार धूमल चाहे तो सरकाघाट विस क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं. इसके लिए सीट को छोडऩे को तैयार हैं। इंद्र सिंह ने कहा कि गुजरात व हिमाचल में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि धूमल के बिना उनकी जीत फीकी है और इस जीत के कोई मायने नहीं हैं. उन्होंने कहा कि धूमल को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने से ही पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है. उधर पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी ने भी धूमल के लिए अपनी सीट खाली करने की बात कही है. इससे पहले कुटलैहड़ विधायक वीरेन्द्र कंवर पहले ही यह ऐलान कर चुके हैं कि वह धूमल के लिए सीट छोड़ने को तैयार हैं. इस बीच मुख्यमंत्री को लेकर पार्टी प्रभारी मंगल पांडे और धूमल के सुपुत्र अनुराग ठाकुर को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने विचार विमर्श के लिए बुलाया है और आगे की रणनीति पर चर्चा जारी है.

विजय शर्मा

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