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23 दिसम्बर जन्मदिवस : चौधरी चरण सिंह महान व्यक्तित्व के गौरव थे

23 दिसम्बर 1902 का वह दिन एैतिहासिक था जबकि पिता चौधरी मीर सिंह माता श्रीमती नेमी देवी के घर में ग्राम भटौना जिला बुलन्दशहर उ0प्र0 में चरण सिंह नामक बच्चे का जन्म हुआ जो कि भारत देश के प्रधानमंत्री पद पर पहुँचने का गौरवशाली राष्ट्रनायक कहलाया।
1960 में चौधरी चरण सिंह उ0प्र0 के तत्कालिन मुख्यमंत्री चन्द्र भानू गुप्ता के मंत्रिमण्डल में गृह व कृषि मंत्री रहे उसके बाद वह स्वयं 3 अपै्रल 1967 को उ0प्र0 के मुख्यमंत्री की गौरवशाली सीट तक पहंुचे जहां वह सफल मुख्यमंत्री के पद पर 17 अपै्रल 1968 तक कायम रहे, इसके बाद फिर प्रदेश में हुए मध्यावली चुनाव में वह भारी मतों से विजयी होकर दूसरी पारी में भी वे दौबारा 17 जनवरी 1970 को उ0प्र0 के मुख्यमंत्री पद तक आसीन रहे । उत्तर प्रदेश में जन्मे बचपन के चरण सिंह ने भारतीय इतिहास में 1928 से गाजियाबाद उ0प्र0 कोर्ट में एक आजाद वकील के रूप में वकालत आरंभ की थी। उन्होंने छोटे-छोटे किसानों व गरीब भूमिहीन लोगों के मुकद्दमें लड़ते-लड़ते राजनैतिक चिंतनों पर प्रखरता जारी की । जिसके अनुभवों पर चैधरी चरणसिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन के मंगलाचरण पर क्षेत्रीय प्रोदशिक उत्तर प्रदेश से राजनीति में प्रवेश किया जिसके अनुक्रम में उन्होंने 1929 में कांग्रेस पार्टी गाजियाबाद में साधारण सदस्यता ग्रहण की। भारत को गुलाम बनाने वाली ब्रिटिश (गोरे लोग) के विरूद्ध भारत छोड़ो के प्रखर से प्रखर आन्दोलन में उन्हें 8 अगस्त 1942 को ब्रिटिश सरकार के जालिमों (देशद्रोहियों) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था तथा 1944 सभी स्वतंत्रता सैनानियों के साथ रिहा किया था, जबकि 1942 में कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो’ का जंग कर रही थी । आजादी की लड़ाई जितने के बाद उन्होंने 1952 में उ0प्र0 में कृषि मंत्री की हैशियत से जमीदारी प्रथा उन्मूलन कराया, इससे पूर्व भी 1949 में उन्होंने शहरों के मुकाबले गांवों का अलग से आरक्षित सुविधायें दिलाने के लिए संघर्ष किया था ।
चौधरी चरण सिंह महात्मा गांधी के अनुक्रमी थी । अतः जब 1908 में महात्मा गांधी का ‘हिन्दू स्वराज’ लेखन का प्रकाशन जारी था तब उन्होंने ‘ग्रामीण स्वराज’ की बागडोर में हिस्सेदारी शुरू कर दी थी। इस आन्दोलन के लिए वे 1857 में अपने पूर्वजों द्वारा अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध छेड़े गये गदर से प्रेरित हुये थे । अतः हरियाणा की सीमा में से बल्लमगढ़ से उजड़े उत्तर प्रदेश के ग्राम भटोना जिला बुलन्दशहर में जन्मे बालक चरण सिंह के जीवन परिचय की परिपेक्ष्यता पर नजर डालें तो उनके श्याम सिंह व मानसिंह दो भाई थे तथा रामदेवी व रिसालकौर उनकी दो ही बहनें थी। वै उनका पैतृक गांव जनपद मेरठ में भूपगढ़ी गांव था । जहाँ से वे जनपद बुलन्दशहर के भटोना गांव से कहलाये । 1925 में उनका विवाह ग्राम गढकुडली हरियाणा जिला सोनीपत की निवासी बालिका गायत्री देवी से हुआ जो कि मुख्य अध्यापक भी रहीं ।
चौधरी चरणसिंह ने अपने बाल्यकाल जीवन में 1922 में मेरठ काॅलेज से प्रथम श्रेणी में 12वीं पास का रिजैल्ट पाकर श्रेष्ठ बालक के गौरव का इतिहास कायम किया था । इसी गौरवशाली इतिहास की परिपेक्ष्यता में उन्होंने अपने राजनैतिक सफर में भी 1937 में छपरौली क्षेत्र उत्तर प्रदेश से विधानसभा के विधायक बने। जिसमें उन्होंने खेकड़ा निवासी डी.आर. चैधरी को भारी मतों से पछाड़ा था । 1952 के आम चुनावों में भी वे कांग्रेस पार्टी से विजय होकर डाॅ. सम्पूर्णानंद मुख्यमंत्री के कार्यकाल में टैक्स (राजस्व) मंत्री के पद तक पहंुचे थे, तब उन्होंने ‘जमींदार कल्याण विधेयक’ पर अमल के लिए प्रखरता कार्य जारी किया था, इतना ही नहीं चौधरी चरणसिंह ने 1952 में जमींदार प्रथा का उन्मूलन के द्वारा गरीबों व किसानों के स्वामित्व भी हासिल कराये थे व अपने राजनैतिक मंगलाचरण जिंदल में वे प0 जी0बी0 पन्त के उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीमण्डल में उन्हें कानूनी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी । 1956 में उन्होंने उ0प्र0 सरकार द्वारा जमीन जायदाद सुधार कानून को माहत्म्य दिलाया था इसके बाद 1956 में इन्हीं किसानों के हितेषी चौधरी चरणसिंह ने प्रदेश में भूमि संरक्षण कानून को लागू कराया, 1960 में उन्होंने ‘जमीन हदबंदी’ हक को त्याग कराने की लड़ाई लड़ी।

13 जनवरी 1959 को बम्बई (नागपुर) मध्य प्रदेश में हुए राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश प्रतिनिधि की हैशियत से शामिल हुये थे । 23 दिसम्बर 1979 को उनके जन्मदिवस पर दिल्ली के वोटक्लब पर विशाल, किसान समागम हुआ था । जिसमें पहली बार देश के किसानों ने लाखों की भीड़ जुटाने का इतिहास बनाया था, जिसके बाद वे राष्ट्रीय राष्ट्रनायक कहलाये। एक सफल अधिवक्ता के रूप में प्रसिद्ध रहे। बचपन के बालक चरणसिंह ने 1926 में एल.एल.बी. की डिग्री पाकर जहाँ सफल वकालत की वहीं उन्होंने 1939 में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों व मजदूरों को हक दिलाने की संदर्भ पुस्तक का लेखन किया था । 1948 में चौधरी चरणसिंह की उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी का प्रमुख बनाकर महासचिव भी बनाया गय था । 1951 तक वे कांग्रेस पार्टी के संसदीय बोर्ड के विशेष सदस्य भी रहे ।
लम्बी बीमारी के बाद एक दिन ऐसा भी अभागा दिन आया जिस दिन 19 मई 1987 को महान राष्ट्रप्रेमी किसानों व गरीबों का जन नायक चौधरी चरण सिंह का हम सबके बीच से बिछड़ना हो गया । किंतु स्मरणीय है उनके प्रभुत्वी इतिहास का कभी नहीं भुलाया जा सकता । 1979 में उन्हें केन्द्रीय स्तर पर वित्तमंत्री भी बनाया गया, जहाँ उन्होंने ग्रामीणों के विकास के लिए ‘स्वतंत्रा कृषि विकास बैंको’ को खोलने पर ठोस कदम जारी कराया। लोगों का मानना था कि चै0 चरण सिंह से राजनीतिक गलतियां हो सकती हैं, लेकिन चारित्रिक रूप से उन्होंने कभी कोई गलती नहीं की । उनमें देष के प्रति वफदारी का भाव था । वो कृषकों के सच्चे शुभचिंतक थे । इतिहास में उनका नाम प्रधानमंत्री से ज्यादा एक किसान नेता के रूप में जाना जायेगा।
इसी अनुक्रम में हलधर को लेकर चै0 चरणसिंह ने 1977 में लोकदल का विलय जनता पार्टी में कर लिया था, जिससे जनता पार्टी को देष में प्रचण्ड सत्ता मिली थी, तब प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई के केन्द्रीय मंत्री मंण्डल में चौधरी साहब को गृहमंत्री बनाया गया था, इससे पूर्व जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इदिरा गांधी में एमरजैंसी घोषित कर दी थी, तब उन्हें जेल 19 महिनें रखा गया था।


28/67, विश्वास नगर, गली नं.15,
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