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लोकतंत्र की जय-मतदाताओं की जय

चलो गुजरात और हिमाचल के चुनाव परिणाम आ गए। 22साल से लगातार सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा सरकार बचाने में कामयाब रही वहीं हिमाचल में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के समय से गुजरात व हिमाचल की मतगणना से कुछ समय पहले तक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता खासतौर से ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता को लेकर जिस तरह के आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था वह हार्दिक पटेल के प्रलाप को छोड़ दिया जाए तो हिमाचल और गुजरात की ज्यों ज्यों मतगणना आगे बढ़ती रही ईवीएम पर आरोप थम सा गया। यदि परिणाम दूसरे होते तो शायद हार का सारा ठिकरा ईवीएम मशीनों और चुनाव आयोग पर ही ढ़ोला जाता। दरअसल उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के साथ ही चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और खासतौर से ईवीएम मशीन में हेराफेरी का दिल खोल कर आरोप लगाया गया। यहां तक की ईवीएम मशीन जैसे हार का कारण रही हो। सभी पराजित दलों ने ईवीएम मशीन को लेकर प्रश्न उठाए। यह तो चुनाव आयोग द्वारा दी गई खुली चुनौती का परिणाम रहा कि ईवीएम मशीन में हेराफेरी का शौर थमा। लेकिन गुजरात चुनावों में मतदान के ठीक बाद और नतीजे आने से पहले कांग्रेस और हार्दिक पटेल ने दिल खोलकर ईवीएम को गालियां दी। जैसे ईवीएम मशीन सत्तारुढ़दल के हाथों में ही खेलती हो।
भले ही हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करें पर लाख प्रयासों के बावजूद लोकतंत्र के प्रति आमआदमी की निष्ठा अभी तक परिलक्षित नही हो रही है। अभी गुजरात और हिमाचल के मतदान के आंकड़े आईना दिखाने के लिए काफी है। यह सब तो तब है जब पिछले दिनों ही सर्वोच्च न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी आई कि जो मतदान नहीं करते उन्हें सरकार के खिलाफ कुछ कहने या मांगने का भी हक नहीं हैं। आखिर क्या कारण है कि शतप्रतिशत मतदाता मतदान केन्द्र तक नहीं पहुंच पाते? सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी और चुनाव आयोग के मतदान के प्रति लगातार चलाए जाने वाले केम्पेन के बावजूद मतदान का प्रतिशत ज्यादा उत्साहित नहीं माना जा सकता। यह भी सही है कि चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों की माकूम व्यवस्था व बाहरी पर्यवेक्षकों के कारण अब धन-बल व बाहु बल में काफी हद तक कमी आई है। ईवीएम और चुनाव आयोग के निरंतर सुधारात्मक प्रयासों का ही परिणाम है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावों में दुरुपयोग के आरोप तो अब नहीं के बराबर ही लगते हैं। छूटपुट घटनाओें को छोड़ भी दिया जाए तो अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। हांलाकि इससे पहले पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद सारा ठीकरा ईवीएम में हेराफेरी पर ढ़ोल कर सारी दुनिया में चुनाव आयोग को कठघरे में खड़े करने के प्रयास किए गए। पर चुनाव आयोग की दृढ़ता और खुली चुनौती ने सारे दावे फेल कर दिए। सारी दुनिया मेें हमें हमारे लोकतंत्र और हमारी चुनाव व्यवस्था पर गर्व है। चुनाव आयोग द्वारा निरंतर चुनाव सुधारों पर जोर दिया जाता रहा है। निष्पक्ष चुनाव के हर संभव प्रयास किए जाते रहे हैं। अब तो वीवीपीटी का प्रयोग भी शुरु किया गया है। गुजरात के परिणामों में सुबह 9 से 10 बजे का समय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता, ईवीएम की ताकत को दर्शाने में बहुत कुछ सफल रहा। जहां एक और सत्तारुढ दल की धड़कने तेज हुई वहीं एक बार तो विपक्षी कांग्रेस की बल्ले बल्ले वाली स्थिति भी उभरी। उसके बाद आखिरकार जिस तरह की टक्कर रही और जिस तरह से ईवीएम मशीन ने परिणाम निकाले उससे यह साफ हो गया कि मशीनों में हेराफेरी की बात केवल हताशा को ही दर्शाती रही। हांलाकि पूर्व चुनाव आयुक्तों ने भी एकमत से ईवीएम की छेड़छाड़ को सिरे से नकारा।
सही मायने में देखा जाए तो लोकतंत्र की जय-मतदाताओं की जय का अवसर है यह तो। आखिर मतदाताओं ने अपने मेंडेट से सारी स्थिति साफ कर दी। देखा जाए तो नोटा के प्रयोग का असर भी गुजरात के चुनाव परिणामों में साफ देखा जा सकता है। गुजरात की 14 सीटों पर भाजपा की हार का बड़ा कारण नोटा रहा है। यदि यह मानलिया जाए कि नोटा मतों में से अधिक मत बीजेपी को मिलते तो यह पूरी तरह से साफ हो जाता है। 14 सीटों पर भाजपा की हार जीत का अंतर मतदाताओं द्वारा नोटा में दिए गए मतों से कहीं कम है। उदाहरणार्थ यानी कि यदि किसी सीट पर हार 500 मतों से रही है तो वहां पर नोटा को चुनने वाले मतदातादो से 3 हजार तक हैं। ऐसे में साफ हो जाता है कि नोटा की सुविधा नहीं होती और इन मतदाताओं द्वारा मतदान किया जाता तो कम वोट से हारने वालों को राहत मिल सकती थी। पर नोटा की ताकत को इसी तरह से देखा जा सकता है। यही कारण है कि चुनाव आयोग के फैसले और लगातार सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए नाकि चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप का दौर चलाकर हतोत्साहित करने का प्रयास। भारतीय लोकतंत्र और चुनाव आयोग और इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के मतदान की अहमियत को दर्शाने वाली टिप्पणी को समग्र रुप से देखा जाना चाहिए इसी में लोकतंत्र की जीत है।

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा,
रघुराज, एफ-2, रामनगर विस्तार, चित्रांष स्कूल की गली,
ज्योति बा फूले काॅलेज के पास, स्वेज फार्म, सोडाला, जयपुर-19
फोन-0141-2293297 मोबाइल-9414240049

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