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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू : हो सकता है नीतिशा को पीछे से धक्का दिया हो : स्मृति चैहान

ऑस्ट्रेलियाई समुंद्री लहरों ने एक उभरती हुई फुटबाॅल खिलाड़ी को निगल लिया। ऑस्ट्रेलिया के शहर एडिलेड में गत दिनों संपन्न हुए 10वें पेसिफिक स्कूल गेम्स में भाग लेने गई भारत की अंडर-18 की महिला फुटबॉल टीम की सदस्य नीतिशा नेगी की मौत संमुद्र में डूबकर हो गई। मैच खत्म होने के बाद सभी फुटबॉलर्स बीच पर घूमने गईं थी जिसमें पांच समुद्री लहरों में घिर गईं थी। चार लड़कियों को सरुक्षाकर्मियों ने बचा लिया था लेकिन नीतिशा नेगी की जिंदगी लहरें निगल गईं। नीतिशा की मौत के बाद देश में छिड़ी तमाम तरह की बहस और तमाम सवालों पर विराम देती है, नीतिशा के साथ गई टीम की स्ट्राइकर पोजीशन पर खेलने वाली स्मृति चौहान  से रमेश ठाकुर की विशेष बातचीत।

सवाल: घटना के वक्त आप भी वहां मौजूद थी, कैसे घटी इतनी बड़ी घटना ?
जवाब: मैच खत्म होने के बाद हमको शहर कराने को कहा गया था। जगह का चुनाव समुंद्र का बीच चुना गया। वहां पहुंचकर सभी लड़कियां पांच-पांच के तीन ग्रुपों में बंट गईं थी। जैसे ही हमने नहाना शुरू किया। नीतिशा के गु्रप से चिल्लाने की आवाजें आने लगी। हम कुछ समझ पातीं, वहां भगदड़ जैसा माहौल बन गया। लड़कियां डूब गई जैसे शब्द गूंजने लगे। ये सुनकर हम सहम गईं। बचावकर्मी बीच में कूद गए। चार लड़कियों को बाहर निकाल लिया, लेकिन नीतिशा का कोई पता नहीं चला।

सवाल: किसी ने कहा हादसा सेल्फी लेने से हुआ ?
जवाब: झूठ! हमारे फोन बीच में जाने से पहले ही जमा करा लिए गए थे। अगर ऐसा कोई बोल रहा है तो मुख्य वजह से ध्यान हटाने की साजिश कर रहा है। मुझे नहीं लगता उसकी मौत खुद की गलती से डूबने से हुई है। उसे तैरना भी आता था। डूबने की स्थिति में वह अपने बचाव के लिए तैरने की कोशिश कर सकती थी।

सवाल: आप नीतिशा के काफी करीब रही हैं ?
जवाब: इसलिए नीतिशा मेरे लिए आज भी जिंदा है और रहेगी। मैं खुद को भूल सकती हूं, पर उसे नहीं? नीतिशा के साथ हुए हादसे ने यूं तो सभी को भयभीत कर दिया है। लेकिन उसके पापा-मम्मी, भाई-बहन, और कोच आशीष दयाल सर पर जो गुजरी है, ईश्वर वह किसी पर न गुजारे। वे टूट चुके हैं।

सवाल: नीतिशा बेहतरीन डिफेंडर थी ?
जवाब: बिल्कुल! नीतिशा और ग्राउंड पर खेलने का उसका तरीका मेरी नसों में खून के साथ दौड़ता रहेगा। उसकी लांग-किक और ग्राउंड में सोच समझकर सटीक खिलाड़ी पर फुटबॉल गिराने की कला मैंने अभी तक हम उम्र किसी खिलाड़ी में नहीं देखी है जो उस लड़की मेें थी। हम सालों से साथ में खेल रही थीं।

सवाल: आपको क्या लगता है हादसा या लापरवाही..?
जवाब: सच से पर्दा हटाने के लिए उच्चस्तरीय जांच की दरकार है। मैं बस इतना जानती हूं नीतिशा की मौत सेल्फी से नहीं हुई। हो सकता है उसे किसी ने पीछे से धक्का दिया हो। मतलब कुछ भी हो सकता है।

सवाल: घटना के बाद नीतिशा के परिजनों से मिलीं हैं आप ?
जवाब: उसका परिवार मेरे घर जैसा है। ऑस्ट्रेलिया भेजने के लिए उसके परिवार वालों ने नीतिशा के पासपोर्ट और तमाम डाक्यूमेंट्स का इंतजाम करने में दिन रात एक कर दिए थे। मां जिसने जन्म देने के बाद रात-दिन, ठंड-गर्मी से बेपरवाह रहकर, अपना सबसुख ताक पर रखकर बेटी को पाल-पोसकर पंद्रह सोलह साल का किया। जो आस्ट्रेलिया से खेलकर लौटने के एक-एक लम्हें के इंतजार में थीं उन्हें खबर मिली की उनकी लाड़ली अब इस दुनिया में नहीं रही।  आप याद की बात करते हैं। नीतिशा मेरी और अपने परिवार के हर सदस्य की जिंदगी थी। मुंबई से दिल्ली 12 दिसंबर को उसे और मुझे एअर इंडिया की एक ही फ्लाइट से आना था। मेरे बराबर वाली सीट नीतिशा की थी…और पूरे सफर (मुंबई से दिल्ली के बीच) मैं उस खाली सीट को घूरती रही। उसके बारे में बात करके मेरी आँखों से अविरल आँसूओं की धार बहने लगती हैं। हादसे के गम में मेरे जबड़े आपस में जकड़ गए हैं। जुबान को लकवा सा मार गया…और दोनो हाथों की मुठ्ठियां आपस में भिंच सी गई हैं।

प्रस्तुतिः रमेश ठाकुर

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