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जयराम ठाकुर का रूप में हिमाचल को मिला कर्मठ और जमीन से जुड़ा मुख्यमंत्री

हिमाचल प्रदेश में घोषित मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के चुनाव हार जाने के 5 दिन बाद आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश को एक नया ऊर्जावान चेहरा जय राम ठाकुर के रूप में मिला है. जय राम ठाकुर कॉलेज के दिनों से पहले एबीवीपी, फिर संघ और भाजपा से जुड़े रहे हैं. इस बार वह पांचवी बार विधायक बने हैं. इससे पहले वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. साधारण परिवार में जन्म लेकर वह अपनी योग्यता, कर्मठता और परिश्रम के बल पर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं. वह प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री रहते हुए निर्विवाद रहे हैं और भाजपा संगठन और आरएसएस के निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही है. आम कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा है. वह मंडी जिले से पहले मुख्यमंत्री बने हैं.

इससे पहले कर्म सिंह ठाकुर और सुखराम का मुख्यमंत्री के लिए नाम चला था लेकिन जयराम ठाकुर का रूप में मंडी के पहला मुख्यमंत्री मिला है. वह हमेशा लो प्रोफ़ाइल और मधुरभाषी रहे हैं और संघ, पार्टी और क्षेत्र में लोकप्रिय हैं. उनकी मिलनसार छवि ही उन्हें जनता के नजदीक लाती है. 26 साल की उम्र में जयराम ठाकुर ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन हार गये थे. परिवार वाले पढ़ा लिखाकर नौकरी ढूंढने के लिए दबाव बना रहे थे लेकिन कॉलेज के दिनों से ही एबीवीपी और संघ से जुड़ने के कारण उनका रूझान राजनीति की ओर था. परिवार आर्थिक तंगी के कारण राजनीति में जाने से मना करता था लेकिन जब उन्हें भाजपा का टिकट मिला तो सबने साथ दिया और पहले ही चुनाव में वह जीत गये. इस बार किस्मत जयराम ठाकुर का साथ दिया. भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया था लेकिन दुर्भाग्यवश वह चुनाव हार गये और बाजी जयराम ठाकुर का हाथ लग गई. पार्टी में उनका विरोधी तो कोई था ही नहीं और ऊपर से वह धूमल, नडडा, शांता कुमार और संघ के भी करीब थे और मंडी लोकसभा की 17 सीटों में ले 13 पर भाजपा की जीत ने उनकी दावेदारी को बढ़ा दिया और पहले दिन से ही उनका नाम चलने लगा था जबकि चुनाव परिणाम के पहले ही पार्टी अध्यक्ष के साथ उनकी मीटिंग तय थी और वह उन्हें कोई दूसरी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने वाले थे लेकिन धूमल की हार ने प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने के उनके रास्ते खोल दिये थे. चुनाव जीतने और अटकलबाजियों के बीच वह धूमल का आशीर्वाद लेने उनके समीरपुर स्थित घर भी पहुंचे थे और अंतत: उन्हें सबका आशीर्वाद मिल गया है और वह राज्य के मुखिया नियुक्त कर दिये गये हैं.
18 दिसंबर को आए चुनाव परिणाम के बाद से हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री को लेकर छाए शंका के बादल छंट चुके हैं. भाजपा विधायक दल ने पांचवीं बार विधायक चुने गए जयराम ठाकुर के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी है और ठाकुर के शपथग्रहण लेते ही हिमाचल प्रदेश को वह पहला मुख्यमंत्री मिल जाएगा जो मंडी जिले से चुनकर आया है. जयराम ठाकुर पिछली धूमल सरकार में 2007-2012 तक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री भी रह चुके हैं. वह इस बार मंडी जिले के सिराज से विधानसभा के लिए चुने गए हैं. जयराम ठाकुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़े रहे हैं और इस कारण भी उनका पलड़ा दूसरों पर भारी रहा. वह छात्र जीवन में विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और पार्टी के कर्मठ और निष्ठावान सिपाही रहे हैं.

वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी पदाधिकारी रहे हैं. इसके अलावा वह 2009 से 2013 के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इस दौरान उनके नेतृत्व में ही बीजेपी ने प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया था और धूमल के नेतृत्व में सरकार बनी थी.
जयराम ठाकुर ने अपना पहला चुनाव 1998 में जीता था. 6 जनवरी 1965 को मंडी जिले के तांदी में जन्मे जयराम ठाकुर की गिनती तेजतर्रार नेताओं में होती है. सिराज विधानसभा में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वोटरों को आश्वासन भी दिया था कि अगर वह जीते तो उन्हें बड़ा पद दिया जाएगा और शाह के शब्द उनकी किस्मत बन गये.
6 जनवरी 1965 को जेठू राम और बृकु देवी के घर जन्मे जय राम ठाकुर का बचपन गरीबी में बीता है. परिवार में 3 भाई और 2 बहनें थी. उनके पिता खेतीबाड़ी और मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे. जय राम ठाकुर तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं इसलिए उनकी पढ़ाई एम.ए. तक हो पाई. जय राम ठाकुर ने कुराणी स्कूल से प्राइमरी करने के बाद बगस्याड़ स्कूल से उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद वह मंडी से बीए करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई पूरी की है. जय राम ठाकुर ने वल्लभ कालेज मंडी से बीए करते हुए एबीवीपी के माध्यम से छात्र राजनीति में कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. एबीवीपी के साथ जुड़ाव के चलते वह संघ के साथ भी जुड़े गये. उन्हें जम्मू-कश्मीर में एबीवीपी का प्रचार करने की जिम्मेदारी दी गई और 1992 को वापिस घर लौटे और भाजपा से जुड़े. 1993 में जय राम ठाकुर को भाजपा ने सिराज विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार दिया. यह चुनाव जय राम ठाकुर हार गए लेकिन 1998 में उन्होंने फिर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. उसके बाद वह विधानसभा चुनावों में उन्होंने हार का मुंह नहीं देखा. मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहने के बावजूद वह आम आदमी से जुड़े रहे और खुद भी सादगी को अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया.
वर्ष 1995 में उन्होंने जयपुर की डा. साधना सिंह से शादी की और जय राम ठाकुर की दो बेटियां हैं. जय राम ठाकुर के पिता जेठू राम का गत वर्ष देहांत हो गया है और मां बेटे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखकर गदगद हैं.

विजय शर्मा

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