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देश की सड़कों पर मौत का तांडव?

एक बार फिर लाशों के ढेर लगे, लाशों को ढापनें के लिए कफन भी कम पड गए। राजस्थान के सवाई माधंोपुर जिले में 23 दिसंबर 2017 शनिवार को एक बस के बनास नदी में गिरने से 33 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। तथा 7 घायल हो गए।40 यात्रियों से भरी यह बस 100 फुट गहरी नदी में डूब गई। बस को नाबालिग चालक चला रहा था कि तेज रफतार व गलत तरीके से ओबर टेक करने के कारण बस बनास पुल की रेलिग तोड़ते हुए 100 फुट नीचे नदी में जा गिरी ।यात्रियों के शव निकाले जा चुके है। 32 सीटर इस बस में लगभग 40 लोग सवार थे। और बस ने जल समाधी ले ली ।देश में प्रतिदिन भीषण सड़क हादसे हो रहे है तथा पूरे के पूरे परिवार मौत की नीद सो रहे हैं।लाशों को अग्नि देने वाले भी नहीं बच रहे है।आखिर यह हादसों का अंतहीन सिलसिला कब थमेगा।नवबर माह में यमुना-एक्सप्रैस वे पर आगरा में हिमाचल के जिला मण्डी के एक निजि स्कूल से टूअर पर ताजमहल छात्र-छात्राएं देखने गए थे 102 स्कूली बच्चों की बस पलटने से 57 बच्चंे घायल हो गए थे बस का टायर फटने से यह हादसा हुआ थ तथा चालक की दर्दनाक मौत हो गई थी ।हादसे में एक छात्र का दायां हाथ काटना पड़ा था तथा रसोईए का पैर काटना पड़ा था ।हादसे के समय चारांे तरफ चीखों व बिखरे खून से हर आदमी स्तब्ध रह गया था। बीते 30 अक्तूबर 2017 को कर्नाटक में एक टैंपो के पेड़ से टकराने के कारण 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हो गए थे यह लोग किसी विवाह समारोह में जा रहे थे कि रास्ते में ही बेमौत मारे गए।हर राज्य में प्रतिदिन लोग मारे जा रहे है।लाशो के ढेर लग रहे है। हिमाचल के कुमारसैन में एक बस के खाई में गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई और 16 यात्री घायल हो गए। प्रतिवर्ष जनवरी में पूरे भारतवर्ष में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है।मगर ऐसे आयोजन औपचारिकता भर रह गए हैं। क्योकि प्रशासन द्वारा लोगों को इन सात दिनों में यातायात नियमों के बारे में बताया जाता है फिर पूरा वर्ष लोग अपनी मनमानी करते है और यातयात नियमों का उल्लंघन करते है ओैेर मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं।हादसों का सिलसिला जारी हैं।एक दर्दनाक हादसा यमुनानगर -पांवटा नैशनल हाईवे 907 के बहराल वैरियर पर हुआ था जहां दो ट्रकों के बीच एक कार बुरी तरह पीस गई थी और चकनाचुर हो गई थी इस दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में एक बच्ची समेत चार लोगों की मौत हो गई थी और तीन महिलाएं गंभीर रुप से घायल हो गई थी। नववर्ष 2017 के पहले सप्ताह से ही लोग सड़क हादसों में मारे जा रहें है।2017 में जनवरी से लेकर 23 दिसबर 2017 तक इन 12 महिनों में हादसों में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। पिछले दिनों पंजाब में एक जीप व ट्रक की आपसी टक्कर में दर्जनों स्कूली अध्याापक बेमौत मारे गए थे।2016 में भी सड़क हादसों का सिलसिला पूरी साल अनवरत चलता रहा और लोग लाखो लोग हादसों का शिकार होते रहे।हजारों लोग अपंग हो गए ताउम्र हादसों का दंश झेलते रहेगंे। देश में हर चार मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे में मारा जाता है। प्रतिदिन देश की सडकें रक्तरजित हो रही है नौजवानों से लेकर बुजुर्ग काल का ग्रास बन रहे हैं। आंकडें बताते है कि सड़क दुर्घटनाओं में भारत अन्य देशों से शीर्ष पर हैं। शराब पीकर बाहन चलाना ही हादसों का मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके कारण ही लाखो लोग सड़क हादसों में मौत का शिकार होते हैं।2017 में भी सडक हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं तथा प्रतिदिन दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढता ही जा रहा है इसे सरकारों की लापरवाहीे की संज्ञा देना गलत नहीं होगा।प्रतिवर्ष सड़क सुरक्षा हेतू करोडों रुपया बहाया जाता है मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात ही निकलता है अगर सही तरीके से पैसा खर्चा किया जाए तो इन हादसो पर विराम लग सकता है मगर ऐसा नहीं हो रहा है हर वर्ष लाखों लोग मारे जा रहे है। ज्यादातर सड़क हादसे सर्दियों में होते है क्योकि धंुध के कारण आपसी टक्कर में दुर्घटनाएं होती हैं।देश की सड़को पर लाशों के चिथड़े बिखर रहे हैं। पंजाब, दिल्ली व उतरप्रदेश व हिमाचल प्रदेश में दर्जनों हादसों में सैकड़ों लोग मारे जा रहे हैं। मगर राज्यांे की सरकारों को इससे कोई सरोकार नहीं है। देश के प्रत्येक राज्यों में हादसों की दर बढती जा रही है दुर्घटना के बाद मुआवजे की राशि बांटने में व समाचार पत्रों में सुखिर्यों में रहने में प्रशासन व नेता लोग आगे रहते हैं नेताओं द्वारा घड़ि़़़़़़याली आंसू बहाए जातें है।सड़क हादसों को रोकने के लिए एक नीति बनानी होगी।जागरुकता अभियान चलाने होगें। सरकारों को लोगों को यातयात नियमों से संबधित शिविरों का आयोजन करना चाहिए।आज करोडोें के हिसाब से वाहन पंजीकृत है मगर सही ढंग से वाहन चलाने वालो की संख्या कम है क्योकि आधे से ज्यादा लोगों को यातयात के नियमों का ज्ञान तक नहीं होता।पुलिस प्रशासन चालान काटकर अपना कर्तव्य निभा रहे है मगर चालान इसका हल नहीं है इसका स्थायी समाधान ढूंढना होगा। बिना हैलमैट के नाबालिग से लेकर अधेड़ उम्र के लोग वाहनो को हवा में चलाते है और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। जानबूझकर व नशे की हालत में दुर्घटना करने वाले चालकों के लाईसैस रदद करने चाहिए। ज्यादातर हादसे में नाबालिग चालक ही मारे जाते हैं। प्रशासन की लापरवाही के कारण भी इसमें साफ झलकती है आज ज्यादातर युवा व लोग शराब पीकर व अन्य प्रकार का नशा करकेेे वाहन चलाते है नतीजन खुद ही मौत को दावत देते हैं भले ही पुलिस यन्त्रों के माध्यम से शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर शिकंजा कस रही है मगर फिर भी लोग नियमों का उल्लघन करने से बाज नहीं आ रहे हैं।राज्यों की सरकारों द्वारा पुलिस को दी गई हाईवे पैट्रोलिंग की गाड़ियां भी यातायात को कम करने में नाकाम साबित हो रही हैं।बढती सड़क दुर्घटनाओें के अनेक कारण है।सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 80 प्रतिशत हादसे मानवीय लापरवाही के कारण होते हैं।लापरवाह लोग सीट बैल्ट तक नहीं लगाते और तेज रफतार में वाहन चलाते हैं।देश में सड़क हादसों में स्कूली बच्चों के मारे जाने के हादसे भी समय-समय पर होते रहते हैं मगर कुछ दिन चैक रखा जाता है फिर वही परिपाटी चलती रहती है।जबकि होना तो यह चाहिए कि इन लापरवाह चालको को सजा देनी चाहिए ताकि मासूम बेमोत न मारे जा सके। अक्सर देखा गया है कि वाहन चालकों के पास प्राथमिक चिकित्सा बाकस तक नहीं होतें ताकि आपातकालिन स्थिती में प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा सके । प्रत्येक साल नवरात्रों में श्रध्दालू मंदिरों में ट्रको में जाते है और गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तथा मारे जाते हैं।ओबरलोडिग से भी ज्यादातर हादसे होते हैं।सरकार को इन हादसों से सबक लेना चाहिए और व्यवस्था की खामियों को दूर करना चाहिए। सरकारों को अपना दायित्व निभाना चाहिए ताकि सड़क दादसों पर पूरी तरह रोक लग सके। बेलगाम हो रहे यातायात पर लगाम लगाना सरकार व प्रशासन का कर्तव्य है लोगों को भी इसमें सहयोग करना होगा तभी इस समस्या का स्थायी हल हो सकता है यदि लोग सही तरीके से यातायात नियमों का पालन करते है तो सड़को पर हो रहे मौत के तांडव को रोका जा सकता है।सडक हादसे अभिशाप बनते जा रहे हैं।केन्द्र सरकार को इस पर गौर करना होगा तथा देश में बढ रही सड़क दुर्घटनाओ पर रोक के लिए कारगर कदम उठाने होगें नही ंतो देश के प्रत्येक महानगरों व शहरों से लेकर गांवों तक हर रोज लाशें बिछती रहेगी लोग मरते रहेंगें। दुर्घटनाओं का कहर बरपता रहेगा। यदि सरकारे ऐसे ही सोती रहेगी तो देश की सड़के खून से लाल होती रहेगी।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार

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