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ट्रांस ओरल एंडोस्कोपिक सर्जरी से कैंसर के आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके 75 वर्षीय बुजुर्ग की जान बचायी

नई दिल्ली। राजस्थान के अलवर के 75 वर्षीय निवासी नसीरा ओरोफैरिंजियल कैंसर के आखिरी मुकाम पेे थे जब डॉक्टरों ने मामूली एंडोस्कोपिक मशीनों की मदद से उनकी बेहद जटिल सर्जरी कर कैंसर को निकाला। आमतौर पे कैंसर की सर्जरी के लिए रोबोट का प्रयोग किया जाता है लेकिन यह पहला ऐतिहासिक मौका है जब सधाराण एंडोस्कोपिक मशीनों की मदद से सफलता पूर्वक सर्जरी की गई है। सर्जरी करने से पूर्व फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल हॉस्पिटल (एफएचवीके) के हेड, नेक एवं ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टी डिपार्टमेंट के डॉ. मनदीप एस मल्होत्रा और उनकी टीम ने काफि शोध किया जिसके कारण सर्जरी की लागत एक-तिहाई हो गई।
नसीरा ने खुद को उम्मीद के तहत एफएचवी के में नामांकित कराया था जिसके तहत गुणवत्तापूर्ण और किफायती कैंसर केयर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाता है। इसके तहत सुविधाओं से वंचित लोगों को ओरल एवं ब्रेस्ट कैंसर का सब्सिडाइज़्ड इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इस पहल के जरिए नसीरा डॉ.मल्होत्रा और उनकी टीम से मिले। इस टीम में डॉ. दीपक झा और डॉ. योगेश जैन भी शामिल थे। डॉ. मल्होत्रा और उनकी टीम ने अनूठी ’ट्रांस ओरल वीडियो एंडोस्कोपिक सर्जरी (टीओवीईएस)’ की मदद से रोगी को इस समस्या से छुटकारा दिलाया।

टीओवीईएस, ओरोफैरिंजियल कैंसर (टॉन्सिल एवं जीभ के पिछले हिस्से; गले के कैंसर) के इलाज का तरीका है, जिसमें पारंपरिक एंडोस्कोपी (लैप्रोस्कोपी) उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जो उन उपकरणों के समान ही होते हैं, जिनका उपयोग लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी करने में होता है। इनकी लागत रोबोटिक सर्जरी के मुकाबले एक-तिहाई होती है और ओपन सर्जरी के विपरीत इसमें शरीर को भी इतना नहीं खोलना पड़ता। ओपन सर्जरी में गर्दन और जबड़े की हड्डी के पास चीरा लगाया जाता है। ट्रांस ओरल सर्जरी के लिए इन उपकरणों को उपयुक्त बनाने में दो महीने का सुधार और कोशिश लगती है।
एफएचवीके के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री संदीप गुदरू ने कहा, ’’जब डॉ. मनदीप और उनकी टीम अपने गहन अध्धयन एवं शोध को लेकर मेरे पास आए तो मुझे पूरा भरोसा था कि यह ओरल कैंसर के इलाज में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण और इनोवेटिव सर्जरी को करने में बड़ी मेहनत की और इस तरह उन्होंने ओरल कैंसर के इलाज का ऐसा तरीका खोज निकाला जो अच्छे परिणाम देता है और लागत में भी काफी किफायती है। मुझे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ में इस तरह का जुनून देखकर बहुत खुशी हुई है। उन्होंने ऐसे लोगों के लिए कैंसर के इलाज में क्रांति ला दी है, जिनके लिए पहले इसका इलाज कराना पहुंच से बाहर था और इस तरह उन्होंने नामुमकिन को मुमकिन बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।’’
रिकवरी के बाद नसीरा ने कहा, मुझे सूझ ही नहीं रहा था कि मैं क्या करूं। इस बीमारी का पारंपरिक इलाज कराना मेरी पहुंच के बाहर था और इसलिए मैंने खुद को यूएमएमईडी के तहत रजिस्टर कराया। मैं तो खाना और हंसना भूल ही गया था लेकिन फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज के डॉक्टरों की टीम ने मेरे जीवन में खुशियां लौटा दीं। यूएमएमईडी के तहत पंजीकरण कराने से मुझे काफी मदद मिली क्योंकि इससे मुझे पता चला कि मुझे किसके पास जाना है और इलाज के लिए बात करनी है। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि अब मैं काफी बेहतर स्थिति में हूं और मैं टीओवीईएस इलाज का स्वस्थ, सफल एवं जीवित उदाहरण हूं। ,

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