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600 रुपए सैलरी, 28 साल की नौकरी में पांच करोड़ की संपत्ति !

दिल्ली विद्युत आपूर्ति उपक्रम (डीइएसयू) में अस्थायी मीटर रीडर के तौर पर भर्ती हुए एक कर्मचारी ने 28 साल की नौकरी में पांच करोड़ की संपत्ति जुटा ली, जबकि उसकी तनख्वाह मात्र 687 रुपये थी। उसने दिल्ली-एनसीआर के पॉश इलाकों में कई महंगी जमीन व फ्लैट खरीदे। नकदी, जेवरात के अलावा सुख-सुविधा के सारे साधन जुटाए। लेकिन, 15 साल पहले सीबीआई छापे में उसकी काली कमाई सामने आ गई। मामले में मंगलवार को तीस हजारी अदालत ने आरोपी अशोक कुमार रसवंत को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई है। 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। तीस हजारी स्थित विशेष न्यायाधीश के वेणुगोपाल की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि विडंबना है कि अभियुक्त अशोक कुमार रसवंत को अंजाम तक पहुंचाने में 15 साल का समय लग गया। अब इस अभियुक्त की उम्र 70 साल हो चुकी है। उसका मेडिकल रिकॉर्ड बता रहा है कि वह कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। उसकी किडनी खराब हो चुकी है। मधुमेह का रोग है। कानों से सुन नहीं पाता। अवसाद का इलाज भी चल रहा है। अदालत चाहती है कि ऐसे अपराधियों को सख्त सजा दी जाए, ताकि अन्य को सबक मिल सके। लेकिन यहां जो व्यक्ति कठघरे में खड़ा है वह आतंरिक रूप से खोखला है। ऐसे में इस अपराधी को दो साल की जेल की सजा सुनाई जा रही है।

आय से अधिक जब्त संपति सरकारी खजाने में होगी जमा
वर्ष 2002 में छापे में दौरान इस अभियुक्त के विभिन्न ठिकानों से जब्त संपति का फैसले के समय हिसाब लगाया गया। साथ ही अदालत सीबीआई से उसके नौकरी के दौरान की तमाम आय का ब्योरा मांगा। अदालत ने सीबीआई को आदेश दिए हैं कि जब्त संपति में से उसकी वास्तविक आय के बराबर संपति को लौटा दिया जाए। इसके अलावा जो उसने भ्रष्ट तरीके से कमाई है, उसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाए।

निजीकरण के बाद मामले का खुलासा

इस कर्मचारी द्वारा भ्रष्ट तरीके से अकूत संपति जुटाने का खुलासा वर्ष 2002 में दिल्ली विद्युत आपूर्ति उपक्रम के निजीकरण के बाद हुआ। उस समय सभी कर्मचारी निजीकरण के तहत निजी कंपनियों के तहत आ गए थे। सीबीआई ने एक शिकायत के आधार पर जांच की तो पाया कि अशोक कुमार रसवंत 10 अगस्त 1974 में दिल्ली विद्युत आपूर्ति उपक्रम में अस्थायी मीटर रीडर के तौर पर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2002 के बीच उन्होंने दो पदोन्नति पाई। वह मीटर रीडर इंस्पेक्टर बन गए थे। एक शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच की तो आरोपों को सच पाया गया।

वसंत विहार और रोहिणी में कईमकान पाए गए

सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि इस कर्मचारी ने नौकरी के दौरान रोहिणी में तीन मकान बनाए थे, जबकि उसका वसंत विहार में भी घर था। इसके अलावा गाजियाबाद व अन्य जगहों पर भी जमीन थी। कार, स्कूटर व लाखों रुपये की नगदी पाई गई थी।

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