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आओ नए साल का स्वागत करें

वर्ष 2017 की विदाई और 2018 के प्रवेश के अवसर पर बधाई। 31 दिसम्बर की रात 12 बजे नए साल की हेप्पी न्यू ईयर के शब्द घोष के साथ नए साल का आगाज हो गया है। 2016 की नोटबंदी के साए में 2017 ने प्रवेश किया और फिर पहले उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित पांच राज्यों और साल के जाते-जाते गुजरात-हिमाचल के चुनावों के बीच कड़बी मीठी यादों में बीता साल 2017 एक अलग तरह से ही उथल पुथल भरा रहा। राहुल गांधी की ताजपोशी भी इस साल की बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जानी चाहिए। नोटबंदी से जीएसटी तक तो गुजरात-हिमाचल की मतगणना से पहले और यूपी-पंजाब सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद का समय भी राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और खासतौर से ईवीएम को जिस तरह से कठघरें में खड़ा किया उस विवाद पर भी 2017 में ही विराम लग गया। यदि गुजरात की मतगणना के दौरान जो उतार-चढ़ाव देखा गया वह नहीं देखा जाता तो चुनाव आयोग और ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर योंही चलता रहता। देखा जाए तो विवाद और 2017 के बीच चोली दामन का संबंध बना रहा। पहले नोटबंदी फिर जीएसटी को लेकर अर्थ व्यवस्था और व्यापारियों व आमजन को होने वाली परेशानी को लेकर खुब हो हल्ला हुआ। हांलाकि दो सर्जिकल स्ट्र्ाइकों और कश्मीर के मामलें में सेना को अधिकारयुक्त बनाने का परिणाम यह रहा है कि भले ही आए दिन कश्मीर में अलगाववादियों के विरोध और आतंकवादियों के कश्मीर में प्रवेश कर आतंकवादी गतिविधियां की जाती रही हो पर इन पर जिस तरह से अंकुश लगा है वह शुभसंकेत है। सेना पर पत्थरबाजी की भी कमी आई है। पद्मावति विवाद ने वालीबुड को हिलाकर रख दिया। इसमें दो राय नहीं कि 2017 उपलब्धियों का साल भी रहा है। तकनीक के क्षेत्र में देश ने नए झण्डे गाड़े हैं। उपग्रह लांचिग के क्षेत्र में नई उंचाइयां छूने के साथ ही हवा में ही दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने में सफलता प्राप्त की है। यूएनओ में बिट्र्ेन के स्थान पर अपने देश के व्यक्ति को न्याय की कुर्सी पर बैठाना बड़ी उपलब्धियों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विदेशों में जलवा 2016 की तरह ही देखने को मिला वहीं इसे देश के लिए गौरव माना जाना चाहिए कि देश का प्रधानमंत्री दुनिया के दिग्गजों के साथ आंख से आंख मिलाकर बात करने की स्थिति में आकर देश के सम्मान को बढ़ाया। विदेश नीति के क्षेत्र में 2017 पूरी तरह सफल रहा। क्रिकेट के क्षेत्र में तो यह साल नई उंचाइयों को छूने में कामयाब रहा। हांलाकि दुनिया के अन्य देशों की तरह ब्लू व्हेल गेम ने देश में भी बच्चों को हिला कर रख दिया वहीं राजनीति के स्तर में गिरावट का दौर भी इस साल देखने को मिला। आर्थिक सुधारों के चलते विकास दर में गिरावट अवश्य रही पर आने वाला वर्ष में इसके सकारात्मक परिणाम मिलेंगे ऐसी आशा की जानी चाहिए।
इन बानगियों और इसी तरह की अन्य कड़बी-मिठी घटनाओं को भुलाकर नए साल में नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध लेय के साथ नए साल का स्वागत करना है। परिवार, समाज, प्रदेश, देश और विश्व मंे सुख और शांति की कामना लेकर आगे बढ़ने की सोच बनानी होगी। 2017 में जो कुछ खोया-पाया उसे भुलाते हुए अब नए संकल्प के साथ 2018 में प्रवेश करना है। रात के बाद सुबह की सूर्य किरणों की आस की तरह नए साल के साथ एक उज्ज्वल पक्ष भी आता है। हम नए साल के साथ सोचने को मजबूर होते हैं गए साल की कमियों को दूर करने की, कुछ नया करने की। समाज में नया और अच्छा करने की। समाज की बुराइयों को दूर करने की। समाज को विकास की राह पर आगे तक ले जाने की। जो कुछ खोया है, उसे पाने की। सकारात्मक सोच से ही आगे बढ़ पाता है समाज और देश। यह हमारी संस्कृति की विशेषता रही है कि आशा की जोत हमेशा से जगाए रखती है। आशा की जोत के कारण ही हम नए साल का स्वागत के साथ आगाज करते हैं। कुछ अच्छे की सोचते हैं। जो हो गया है उसे भुलाने का प्रयास करते हैं।
विराट सांस्कृतिक परंपरा के धनी हमारे देश के युवाओं ने सारी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। अमेरिका सहित दुनिया के बहुत से देश हमारे युवाओं के ज्ञान कौशल से घबराने लगे हैं। गाहे-बेगाहे वे हमारे देश के युवाओं के उनके देश में प्रवेश को सीमित करने का प्रयास करते है। हमारे युवाओं की मेहनत, श्रम शक्ति और ज्ञान-कौशल का लोहा मानते हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने अपनी मेहनत से देश को आगे ले जाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। दूसरे देशों के सेटेलाइट हम प्रक्षेपित करने लगे हैं। अग्नि प्रक्षेपन में हम सफल रहे हैं। हमारे सेटलाइट सफलता पूर्वक काम कर रहे हैं। टेक्नालाॅजी में हम धीरे-धीरे आत्म निर्भर होते जा रहे हैं। राजनीतिक परिपक्वता में हमारेे लोकतंत्र के मुकाबले दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं है। आखिर हमारी गौरवशाली विरासत को आगे ले जाने में हम कहां पीछे रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी से बदलाव की नई बयार आएगी। सकारात्मक सोच के साथ अब शुभकामनाओं और मंगलकामनाओं के बीच हमें देश को आगे ले जाने का संकल्प लेना होगा। आचार-विचार में शुद्धता और नेतिकता का सबक लेना होगा। हमें सकल्प लेना है देश को आगे ले जाने का, शिक्षा, औद्योगिक विकास, रोजगार, बिजली-पानी, सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का, आधुनिकतम तकनीक को देश के विकास में हिस्सेदार बनाकर आगे बढ़ने के प्रयास करने होंगे ताकि देश विकास की राह पर तेजी से बढ़ सके। नया साल नईस्फूर्ति, नए उत्साह से आगे बढ़ने की राह प्रशस्त करेगा यही हमारी मंगल कामना है।

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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