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लाक्षागृह बनते होटल व पब बेमौत मरते लोग ?

कैसी विडंबना है कि अब होटल व रुफटाॅप पब और अस्पताल भी लाक्षागृह बनते जा रहे है और लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में मुम्बई के कमला मिल कंपाउड में एक पब में आग लगने से 14 लोगों की जलकर मौत हो गई। मरने वालोें में 12 महिलाएं है तथा दर्जनों घायल हो गए।तथा 55 लोग झुलस गए। जन्मदिन की पार्टी बना रहे लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि पल भर में मातम छा जाएगा। अपना जन्मदिन मना रही खुशबू भी इस हादसे में बेमौत मारी गई। पलक झपकते ही लोग लाशों में बदल गए और पब शमशान बन गया। खुशबू के दोस्त भी मारे गए।आग के कारण लोग जिन्दा जल गए और पल भर में राख हो गए।बांस व प्लास्टिक का छप्पर होने के कारण आग की लपटे तेज हो गई और आग ने भीषण रुप जे लिया। यह वहुत ही खौफनाक त्रासदी है। होटल में अग्निशमन यंत्र तक नहीं थे ।सुरक्षा गार्डो ने करीब 100 लोगों को बचाया। हादसे के समय होटल में सैकडों लोग मौजूद थे होटल में जन्मदिन पार्टी चल रही थी।अधिकतर लोगों की मौत दम घुटने से हुई। आग कैसे लगी इसका पता लगाया जा रहा है।लापरवाही से लोगों की जाने ली जा रही है ऐसे लोगों पर हत्या का मामला दर्ज करना चाहिए।यह कोई पहला हादसा नहीं है इससे पहले भी हजारों लोग ऐसे हादसों में मारे जा चुके है। पिछले दिनांे उडी़सा की राजधानी भुवनेश्वर के इन्स्टिटयूट आफ मैडिकल साईसिज एंड एसयूएम अस्पताल के आसीयू में आग लगने से 23 लोग मारे गए थे और 30 के लगभग झुलस गए थे। ज्यादातर मरीजों की मौत दम घुटने से हुई थी। दमकल की 24 गाड़ियो ने कडी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। मगर तब तक काफी लोग मौत के आगोश समा चुके थे। आग लगने का कारण बिजली का शार्ट सर्किट था। आग असप्ताल की पहली लगी और देखते ही देखते चारों तरफ फेल गई थी।ऐसी वारदातें लापरवाही की पराकाष्ठा है।ऐसे हादसों की जांच होनी चाहिए कि ऐसी लापरवाही के लिए कौन जिमम्ेवार है ।इसकी जबाबदेही होनी चाहिए तथा दोषीयों के खिलाफ अपराधिक व हत्या का मामला चलाना चाहिए।अक्सर देखा गया है कि आपदा से निपटने के लिए होटलों में कोई व्यवस्था नहीं होती है अग्निशमन यंत्र खराब पडे़ रहते है। जिसे आग पर काबू नहीं पाया जा सकता। यदि अस्पताल में यत्र होतें तो इतना जानमाल का नुक्सान नहीं होता। यह बहुत ही घोर लापरवाही है। होटल प्रबंधन को इस हादसे से सबक लेना चाहिए ताकि आने वाले भविष्य को सुरक्षित किया जा सके और लोगों को आकाल मौत न मिल सके ।लेागो ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके परिजनों केा ऐसी दर्दनाक मौत नसीब होगी ।यह कोई नया हादसा नहीं है पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के मैडिकल कालेज व अस्पताल में भीषण आग लगने से तीन लोंगों की मौत हो गई थी और 18 लोग बुरी तरह झुलस गए थे। आग एसी मशीन के कारण लगी थी। हादसे के समय सैकडों मरीज व कर्मचाारी मौजूद थे मगर लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई थी। असपताल में चारों तरफ धुआं फेैेल गया था गनीमत रही लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ भाग गए नहीं तो मृतकों का आंकडा बढ सकता था। देश में होटलो व अस्पतालों में आग का यह कोई पहला मामला नहीं है हर रोज कहीं न कहीं से ऐसे हादसे होतें रहते है कुछ दिन व्यवस्था ठीक रहती है फिर वही परिपाटी चल पडती है। सरकारें मुआवजा देकर अपना फर्ज निभाती है लेकिन मुआवजा इसका हल नहीं है। झुलस गए लोग ताउम्र इसका दंश झेलेगें । बेशक प्रतिवर्ष देश भर में 14 अप्रैल से लेकर 20 अप्रैल तक अग्निशमन सेवा सप्ताह मनाया जाता है। इस सप्ताह के दौरान लोगों को अग्नि से बचाव के बारे में अवगत करवाया जाता है। मगर ऐसे सप्ताह केवल मात्र औपचारिकता भर रह गए हैं पूरे सप्ताह करोडों़ रूपया खर्च किया जाता है मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात ही निकलता हैं।प्रतिवर्ष सैमीनार करवाए जाते है प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जाती है मगर न तो प्रशासन सबक सीखता है और न ही आम जनमानस सीखता है। आज समूचे भारत में प्रतिदिन भीषण अग्निकांड़ हो रहे है। इन अग्निकांड़ो से कई प्रशन सुलगते जा रहे है कि देश के मसीहाओं कोे इन हादसों से कोई सरेाकार नहीं होता। देश में घटित इन अगिकांडों के कारण आज तक देश में लाखों लोग हर वर्ष मारे जाते हैं और कई हजारों झुलस जाते है और ताउम्र अग्निकांडों का दंश झेलते हैं। इन मामलों में अप्रत्याशित रुप से इतनी वृद्धि हो रही है कि यह रुकने का नाम नहीं ले रही है। देश के हर राज्य में भयानक हादसे हो रहे है मगर राज्य सरकारें गहरी निंद्रा में सोई है सरकार के रहनुमाओं को अपनी तन्द्रा तोड़ देनी चाहिए। केन्द्र सरकार को राज्यांे के प्रत्येक होटलों व असपतालों के परिसरों में एक-एक अग्निशमन केन्द्र स्थापित करना चाहिए ताकि समय पर आग पर काबू पाया जा सके क्योकि अक्सर देखा गया है कि केवल जिला मुख्यालयों पर ही केन्द्र होने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में देरी से पहुचने पर संपति जानमाल का ज्यादा नुक्सान होता है। जब तक दमकल कर्मचारी पहुचते है तब तक आशियाने राख हो चुके होते हैं। अगर सरकारें हर जगह में केन्द्र नही खेल सकती तो कुछ साहसी युवाओं को अग्निशमन का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि आपातकालिन स्थििति में आगजनी पर काबू पाया जा सके। सरकार को लोगों को जागरुक करने के लिए गांव से लेकर महानगरों तक जागरुकता शिविरों को आयोजन करना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि प्रत्येक सरकारी व प्राईवेट अस्पतालों व होटलों व पबों में अग्निशमन यन्त्र स्थापित किए जाएं।देश में चल रहे सरकारी व निजि अस्पतालों में आग बुझाने के यन्त्र ही नहीं होते नतीजन जब ऐसे हादसे होते है तो बेबजह ही लोग व मरीज हादसों का शिकार हो जाते है। यदि ं आग बुझाने के यन्त्र होगें तो आग पर नियन्त्रण किया जा सकता है प्रशासन को प्रत्येक सरकारी व प्राईवेट असपतालों व होटलों का निरीक्षण करना चाहिए तथा ऐसे संचालकों को जुर्माना करना चाहिए। देश में चल रहे व नये स्थापित हो रहे होटलों व अस्पतालों का समय -समय पर निरीक्षण करना चाहिए क्योकि नब्बे प्रतिशत होटलों व अस्पतालों में आग से निपटने के यन्त्र ही नहीं होते है नतीजन मरीज असपतालों में ही जिन्दा जलकर राख हो जाते हैं। सरकारों को आपदा प्रबधन कमेटियां बनानी चाहिए ताकि समय रहते आग को बूझाया जा सके।देश में लगभग 90 प्रतिशत मामलों में आग लगने का कारण बिजली का शार्ट-सर्किट की सामने आता समझ नहीं आता कि होटल संचालक व अस्पताल प्रबंधन लोगों से हजारो रुपया कमाते है मगर सुरक्षा राम भरोसे ही है इतने लापरवाह कैसे हो जाते है कि पुरानी व गल सड़ चुकी तारों को नहीं बदलते बाद में चाहे सब कुछ राख हो जाए। अधिकांश घटनाओं में लापरवाहियां सामने आती हैं। सार्वजनिक स्थलो पर भी आग बुझाने के यन्त्र तक नहीं होते जहां हर रोज लाखों लोगों की आवाजाही होती है।छापामारी करने वाले भी आखें मंूद लेते हैं अगर सही तरीके से प्रत्येक होटलों व संस्थानों में लापरवाही बरतने को लेकर शिंकजा कसा जाए तो आगजनी की घटनाओं को रोका जा सकता है।सरकारों को चाहिए ऐसें अग्निशमन सेवा सप्ताहों को केवल मात्र औपचारिकता के तौर पर न निभाकर सही रुप में क्रियानवित किया जाए।सरकार को इस बाबत कारागर कदम उठाने होगें तथा बीते आगजनी के दर्दनाक हादसों से सबक लेना चाहिए यदि अब भी इन ममालों की अनदेखी की तो हर रोज होटलों, पबों व अस्पतालों में अग्किांडों में लोग जलकर बेमौत मरते रहेगें ।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ पत्रकार 09459047744

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