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सरकार के गिरने का खतरा!

अभी नहीं तो अगले पांच सालों में गुजरात के भीतर बड़ा सियासी भूचाल मचेगा, इस बात के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। अंदेशा इस बात का भी लगाया जाने लगा है कि अगर भाजपा के पटेल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले विधायक टूटकर कांग्रेस में चले जाते हैं तो सरकार गिर भी सकती है। उस सूरत में कांग्रेस प्रदेश में सरकार बना लेगी। गुजरात की नई-नवेली सरकार को एकजुट करना भाजपा के लिए मुस्किल होगा। उनके पास मौजूदा विधायकों की संख्या पूर्ववर्ती सरकारों की तरह नहीं है। जिस अंदाज में भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात का किला फतह करके 2019 का रास्ता साफ करके फिर सत्ता में आने का स्वप्न देख लिया था। उसमें अंधियारा छाने लगा है। गुजरात में नई सरकार तो जरूर बन चुकी है। पर, उप-मुख्यमंत्री बनाए गए नितिन पटेल खासे नाराज हैं। उन्होंने बगावती रूख अपना रखा है। उनके इस रूख के चलते दिल्ली के नेताओं के नए साल के जश्न को फीका कर दिया है। दरअसल बीते कुछ दिनों से गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल की नाराजगी की खबरें आ रही थी। नाराजगी का कारण उन्हें अपने पंसददीदा मंत्रालयों का न मिलना बताया जा रहा है। इस वजह से उन्होंने कुछ दिनों तक पदभार भी नहीं संभाला। नितिन पटेल की नाराजगी बहुत कुछ बयां करती हैं। पार्टी के भीतर पद-प्रतिष्ठा को लेकर खीचतान मची हुई है। खीचतान की खबरें मीडिया में न आए, इसके प्रयास किए गए। लेकिन एक कहाबत है कि आग लगेगी तो धुंआ तो बाहर आएगा ही। हो भी वही रहा है।
असंतुष्ठ भाजपा विधायकों-नेताओं पर हार्दिक पटेल की नजर गिद्व जैसी बनीं हुई है। क्योंकि अगर प्रदेश में सरकार गिरती है तो उस खेल में वह बड़ा रोल प्ले करेंगे। हार्दिक पटेल ने नितिन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस के एक विधायक विरजी थुम्मर ने भी नितिन पटेल से भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने और अपने दर्जनभर विधायकों के सहयोग से राज्य में नई सरकार बनाने के लिए कह दिया है। सौराष्ट्र के अमरेली जिले के लाठी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक विरजी थुम्मर कहते हैं कि यदि नितिन निर्धारित संख्या में भाजपा के विधायकों के साथ आते हैं तो पटेल को कांग्रेस से सहयोग से मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। फिलहाल तो दिल्ली में विराजमान भाजपा के उच्च नेताओं के कहने पर नितिन पटेल का गुस्सा शांत हो गया है लेकिन इन खबरों से संकेत मिलने लगे हैं कि आने वाले समय में प्रदेश में बड़ा सियासी भूचाल मचेगा। अगर ऐसा हुआ तो मोदी-शाह की प्रतिष्ठा पूरी तरह से धूमिल हो जाएगी। पार्टी को भी ग्रत में जाने से कोई नहीं रोक पाएगा। साथ ही 2019 को भी भेदना नमुमकिन होगा। हालांकि पूरे मसले पर दिल्ली के नेताआंे की नजर बनीं हुई। किसी भी सूरत में मामले को शांत करने में लगे हैं। नितिन पटेल को मनाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
भाजपा को नितिन पटेल के बाद बड़ोदा से विधायक योगेश पटेल की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। देखा जाए तो उनका गुस्सा जायज है। वह सात बार से लगातार विधायक हैं लेकिन फिर भी पैदल हैं। उन्हें आजतक सरकार का हिस्सा नहीं बनाया गया। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। विधायक योगेश पटेल का गुस्सा इस वक्त सातवें आसमान पर है। प्रदेश में बीजेपी के अंदर नाराजगी का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। एक तो बीजेपी के पास वैसे भी विधायकों की संख्या कुछ खास नहीं है ऐसे में उसे सरकार चलाने के लिए बहुत ही फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर उपजा असंतोष अब बड़ा संकट बन गया है। अभी तक वित्त मंत्रालय न मिलने से उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ही नाराज थे। पर, अब संख्या बढ़ती जा रह है। इन खबरों से सबसे ज्यादा परेशान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है। उनको लगता है कि अगर पटेल समुदाय के सभी विधायक एक हो गए तो उनकी सरकार गिर सकती है। इसके अलावा सभी टूटकर कांग्रेस में चले गए तो उनकी सरकार बन जाएगी। दिल्ली में खलबली मची हुई है।
गुजरात की जीत ने भाजपा को नई संजीवनी दी है। पार्टी की सफलता ने देश को यह संदेश देने में सफल रही कि जनता उनके साथ है और आगामी कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभाओं व अगले आम चुनाव में पार्टी ऐसा ही प्रदर्शन करती रहेगी। लेकिन आपसी कलह उनके अरमानों पर पानी फेरने के लिए काफी है। नितिन पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अध्यक्ष अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं बावजूद इसके उनकी नाराजगी के स्वर फूटे। नितिन के रूठे होने की खबरें जैसे ही बाहर आईं, कांग्रेस ने उनपर डोरे डालने शुरू कर दिए। इसके अलावा हार्दिक पटेल ने भी उनसे बात की और साथ आने का आफॅर दे डाला। नितिन के रूठे होने की खबरों ने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया। तरह-तरह की बातें उड़ने लगी। मुद्दे को शांत करने के लिए अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाला है। उन्होंने तुरंत दिल्ली में बैठक बुलाई और साथी नेताओं के साथ मंत्रणा की। इसके बाद दिल्ली से नितिन के लिए एक संदेश भेजा गया। संदेश में क्या था भगवान जाने। लेकिन संदेश पाते ही नितिन पटेल ने आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। प्रसे वार्ता में नितिन पटेल ने कहा कि काफी समय से वह राज्य में दूसरे स्थान के नेता रहे हैं। मुख्यमंत्री के बाद दूसरे स्थान के नेता को जो मंत्रालय शोभा देते हैं वैसे उन्हें मौजूदा सरकार में नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि पहले उनके पास जो मंत्रालय थे वह इस बार सभी छीन लिए गए। नितिन ने कहा कि इस बावत उन्होंने अमित शाह और सभी बड़े नेताओं से इसके बारे में बात की है कि उन्हें ऐसे विभाग दिए जाए, जिससे उनका गौरव और सम्मन बच सके।

रमेश ठाकुर
पताः 5/5/6, द्वितीय तल, गीता कालोनी, दिल्ली-110031
संपर्कः 9350977026

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