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2018 के संभावित खतरे

हम लोग जैसे-जैसै नए साल 2018 में प्रवेश कर रहे हैं और तेजी से बदल रही ‍डिजिटल तकनीकों को अपना रहे हैं, वैसी ही हम 2017 के कुछ ऐसे साइबर हमलों की यादें भी अपने पीछे छोड़ रहे हैं, जो इतने आधुनिक और खतरनाक थे ‍कि उनकी वजह से कई उद्योगों और व्‍यक्तिओं को न ‍सिर्फ आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि निजी डेटा का नुकसान भी उठाना पड़ा। इस स्थिति से साइबर सुरक्षा का स्तर बढ़ाने और बढ़ते साइबर हमलों के प्रति सुरक्षा को अधिक मज़बूत बनाने की पहल हुई है। इसके लिए उद्योगों और व्यक्तियों की मूल्यवान निजी जानकारी और व्यवसाय संचालन की चौबीसों घंटे निगरानी की आवश्यकता होगी।

विभिन्न प्रचलन यह भी बताते हैं कि व्‍यवसाय और उद्योग को भविष्य में अपने विकास हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को अपनाना बेहद जरूरी है। साइबर सिक्‍योरिटी सॉल्‍यूशन्स भी अब इन्‍हें अपनाने लगे हैं, जिससे साइबर सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी यानि कि मानवीय गलतियों के कारण होने वाली किसी भी अप्रिय घटना के लिए हम तैयार रह सकें।

ईस्‍कैन सिक्‍योरिटी रिसर्च टीम ने कुछ ऐसे ही प्रमुख प्रचलनों की पहचान की है, जो सुरक्षा चूक के सबसे मजबूत और सबसे अधिक ध्यान दिये जाने वाले क्षेत्रों के रूप में उभरेंगे। इसमें से कुछ नीचे दिए गए हैं:

1. क्रिप्‍टो करेंसी: 2017 में क्रिप्‍टो करेंसी को उथल-पुथल से भरपूर एक कमोडिटी के रूप में उभरता हुआ देखा गया है। हालांकि, इस अस्थिरता ने क्रिप्टो करेंसी में निवेशकों की दिलचस्पी को कम नहीं किया है। 2017 की दूसरी छमाही में वॉनाक्राई जैसे प्रमुख रैनसमवेयर हमलों और बिटकॉइन पर इन हमलों की निर्भरता देखी गई है। अनियमित बेनामी मुद्रा बाजार होने की वजह से साइबर अपराधी आगे भी रैनसम यानि फिरौती के लिए क्रिप्टो करेंसी की मांग करना जारी रखेंगे।

2018 क्रिप्‍टो करेंसी का साल रहेगा, जिसमें कई कंपनियां अपनी मुद्रा की स्थिरता के लिए आपस में मुकाबला करेंगी। वहीं प्रमुख क्रिप्‍टो करेंसियों के आने के साथ ही 2018 की दूसरी छमाही में बाजार के संगठित होने की संभावना रहेगी। बिटकॉइन की आसमान छूती कीमतों के कारण, 2018 में अपराधी अपना पूरा ध्‍यान दूसरी क्रिप्‍टो करेंसी पर भी केंद्रित कर सकते हैं और यह क्रिप्टो-करेंसी की लोकप्रियता में बड़ा बदलाव साबित होगा।

बिटकॉइन के हार्ड फॉर्क्स के कारण बिटकॉइन गोल्‍ड और बिटकॉइन कैश तैयार हुआ, और अब बिटकॉइन सिल्‍वर, बिटकॉइन प्‍लेटिनम लाने की भी योजना है, जो कि बिटकॉइन के आगे के विकास में मदद करेगा। इतने सारे फॉर्क्स के बाद, निवेशकों को बेहद सावधानी बरतनी होगी क्‍योंकि 2018 में कई नकली क्रिप्‍टो करेंसियां पैदा होने, इनसे जुड़े घोटाले और पॉन्जी स्‍कीम सामने आ सकती हैं।

2. रैनसमवेयर: वर्ष 2018 में भी रैनसमवेयर एक बड़ा खतरा बने रहेंगे। साइबर अपराधियों के लिए अपने शिकार से पैसे उगाही का यह सबसे आसान तरीका है। वर्ष 2017 में, हमने वॉनाक्राई और सार्वजनिक रूप से इसके कारनामों जैसे नेटवर्क के भीतर लेटरल मूवमेंट के लिए इटर्नल ब्‍लू को देखा है। 2018 में रैनसमवेयर के लेटरल मूवमेंट को कम करने के निश्चित हल के रूप में पैच-अपडेट की जरूरत पर जोर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त रैनसमवेयर बनाने वाले बिटकॉइन की बजाए दूसरी क्रिप्‍टो करेंसी की ओर भी आकर्षित हो सकते हैं क्‍योंकि फिरौती के भुगतान के लिए पीडि़तों के लिए व्‍यवहारिक होना बेहद जरूरी है और बिट कॉइन की बढ़ती कीमतों का भी इसमें अहम योगदान होगा।

2018 में, देश और लक्षित संस्‍थानों की भुगतान क्षमता के आधार पर फिरौती की रकम का निर्धारण भी देखने को मिल सकता है। अभी तक, स्‍पियर-फिशिंग सूचना के युद्ध तक ही सीमित थी, लेकिन आने वाले समय में हम संस्‍थाओं को विशेष रूप से उनके लिए ही तैयार किए गए रैनसमवेयर के हमले झेलते हुए देखेंगे, जिससे इन अपराधियों का आरओआई बढ़ाया जा सके।

3. आईओटी डिवाइस की बेहतर सुरक्षा: जहां स्‍मार्ट डिवाइस और दूसरी इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स (आईओटी) डिवाइस की मांग दिनों दिन बढ़ रही है, उसी तरह इन डिवाइस की आधुनिक सुरक्षा की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रमुख उद्योगों में तकरीबन 30 बिलियन चीज़ें आपस में जुड़ी हुई होंगी और विभिन्‍न कॉरपोरेट्स की प्रत्‍येक भूमिकाओं में आईओटी शामिल होगा। साथ ही, इन डिवाइसेज़ पर हमले भी बढ़ेंगे।

इसके अलावा, 2017 में आईओटी डिवाइसेज़ विभिन्‍न बॉटनेट के निशाने पर रहे हैं, जिसमें कुख्‍यात मिराई बॉटनेट भी शामिल है, जिसने महत्‍वपूर्ण संरचनाओं पर आगामी हमलों की संवेदनशीलता बढ़ाने में भी मदद की है। 2018 एक मिलाजुला साल होगा और इस दौरान हमें विक्रेताओं के बीच आईओटी उपकरणों के विकास के लिए सुरक्षा दिशानिर्देशों का विकास भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा 2018 में आईओटी बॉटनेट पर बड़ी संख्‍या में हमले भी देखने को मिल सकते हैं।

4. मोबाइल हैकिंग में वृद्धि: 2017 एक ऐसा साल था जिसमें एंड्रॉयड डिवाइसेज़ को प्रभावित करने वाले डीडीओएस मालवेयर को उभरते हुए देखा गया। इसके साथ ही इस साल वायरएक्‍स बॉटनेट की घटिया हरकत भी देखने को मिली जिसने कहर बरपा दिया था। सूचनाएं चुराने वाले मोबाइल मालवेयर के लिए सिर्फ साइबर अपराधियों को ही जिम्‍मेदार नहीं ठहराया जा सकता बल्कि उपकरण निर्माता भी यूजर की गोपनीयता उल्‍लंघन के मामले में संदेह के घेरे में हैं और एहतियातन कदम उठाते हुए भारत सरकार ने कई उपकरण निर्माताओं के खिलाफ आदेश जारी किया है। इसके अलावा चीनी संस्‍थाओं द्वारा विकसित 40 से अधिक एप्‍स को ब्‍लैक लिस्‍टेड किया है।

डिवाइस निर्माताओं और ऐप डेवलपर्स के लिए 2018 का साल फायदेमंद हो सकता है लेकिन ये गोपनीयता को लेकर काम करने वाले लोगों के संदेह के घेरे में भी आ सकते हैं और इन उल्‍लंघनों को देखते हुए सरकार अपने नागरिकों के डेटा को सुरक्षित करने के लिए मानदंड तैयार कर सकती है। कुछ महीनों पहले जीडीपीआर लागू होने के साथ, 2018 के उत्‍तरार्ध में मोबाइल ऐप डेवलपर्स द्वारा गोपनीयता उल्‍लंघन के कई मामले देखने को मिल सकते हैं।

इसके अतिरिक्‍त, 2017 में यूजर्स को भारी मात्रा में नकली ऐप्स का सामना भी करना पड़ा है, और एंड्रॉयड और आईओएस में खोजी गई कमजोरियों ने गूगल और एप्‍पल जैसी कंपनियों को अपने खुद के ऐप स्‍टोर्स तैयार करने और ऐप की निगरानी को और बढ़ाने को मजबूर किया है। 2018 का साल भी कुछ ज्‍यादा बेहतर नहीं होगा और इस साल भी हमें खराब डिवाइस से जुड़ी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। यद्यपि, इनमें से कुछ घटनाओं को जेल-ब्रेक/ रूटिंग का उपयोग करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन मालवेयर बनाने वालों का मुख्‍य ध्‍यान नकली एप्‍स पर ही होगा।

5. देशों के बीच साइबर जासूसी: कई देशों की वैश्विक खुफिया व्यवस्था आज एक हद तक उन्नत हो गई है कि वे रणनीतियां बनाने के लिए पूरी आसानी से दुनिया का डेटा निकाल सकते हैं। कई राष्‍ट्र साइबर जासूसी को जासूसी के नए जरिए के रूप में देख रहे हैं। यह नया तरीका दो देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को भी प्रभावित करेगा, साथ ही यह आधुनिक युद्ध परिदृश्य को भी बदल देगा।

अंतत:, हम यह कह सकते हैं कि साइबर अपराधियों के घातक हमलों से बचने के लिए हमारे यूजर्स, पाठकों और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर्स को अपनी ओर से पूरी कोशिश करनी चाहिए। सही आवश्यकता को समझने के बाद मल्‍टी फैक्‍टर ऑथेन्टिकेशन लागू करने से किसी भी प्रकार के साइबर हमलों की संभावना कम करने में एक कंपनी को सहायता मिलेगी। ईस्‍कैन का इस्तेमाल करें और सुरक्षित रहें!

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