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विघ्नहर्ता है गणपति बप्पा मोरया

भगवान गणेश के जन्मोत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देशभर में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है किसी भी शुभ काम के पहले गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है।
गणेश चतुर्थी देश का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक त्यौहार है। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है। गणेश चतुर्थी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इस दिन करने से फल अच्छा मिलता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता आती है। कई लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने से भगवान गणेश खुश होते हैं और श्रद्धालूओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह दिन भगवान गणेश की पूजा, आदर और सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। देश के सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहारों में गणेश चतुर्थी एक है। 1893 में महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने एक सार्वजनिक समारोह के रूप में महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की शुरूआत की। उनका एकमात्र ध्येय स्वतंत्रता संग्राम के संदेश को फैलाना और देश में एकता, देशभक्ति की भावना और विश्वास को प्रदान करना था।
भारतीय जनजीवन में गणेशजी का अद्वितीय स्थान है । पंच देवताओं में वे अग्रगण्य हैं । प्रत्येक उत्सव, समारोह अथवा अनुष्ठान का आरंभ उन्हीं की पूजा-अर्चना से होता है । वे विद्या और बुद्धि के देवता हैं । इसके साथ ही वे विघ्न-विनाशक भी हैं । भगवान गणेश का अवतार ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के रूप में हुआ है। इस कारण हमारे देश में किसी भी अच्छे काम की शुरूवात से पहले भगवान गणेश का आह्वान एक आम बात है। साथ ही इस त्योहार से हम अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सद्भाव ला सकते है। पंचदेवों में से एक भगवान गणेश सर्वदा ही अग्रपूजा के अधिकारी हैं और उनके पूजन से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है । श्रीगणेश के स्वतंत्र मंदिर कम ही जगहों पर देखने को मिलते हैं परंतु सभी मंदिरों, घरों, दुकानों आदि में भगवान गणेश विराजमान रहते हैं। इन जगहों पर भगवान गणेश की प्रतिमा, चित्रपट या अन्य कोई प्रतीक अवश्य रखा मिलेगा. लेकिन कई स्थानों पर भगवान गणेश की स्वतंत्र मंदिर भी स्थापित है और उसकी महता भी अधिक बतायी जाती है. भारत ही नहीं भारत के बाहर भी भगवान गणेश हैं।
जीवन में आगे बढने के लिए माता-पिता के आशीर्वाद से सदैव विजय प्राप्त करने के लिए गणेश जी के आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। भगवान गणेश देवी पार्वती और भगवान शिव के बेटे है। है। ये बुद्धि और समृद्धि के भगवान है इसलिये इन दोनों को पाने के लिये लोग इनकी पूजा करते है। वो लोगों के जीवन से सभी बाधाओं और मुश्किलों को हटाते है साथ ही साथ उनके जीवन को खुशियों से भर देते है। कोई भी नया काम करने से पहले भारत में लोग भगवान गणेश की पूजा करते है। बच्चों के लिये सबसे प्यारे भगवान है। बच्चे प्यार से उन्हें दोस्त गणेशा कहते है।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार मां पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसका नाम गणेश रखा। फिर उसे अपना द्वारपाल बना कर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गई। थोड़ी देर बाद भगवान शिव आए और द्वार के अन्दर प्रवेश करना चाहा तो गणेश ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया। इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश के सिर को काट दिया और द्वार के अन्दर चले गए। जब मां पार्वती ने पुत्र गणेश जी का कटा हुआ सिर देखा तो अत्यंत क्रोधित हो गई। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं ने उनकी स्तुति कर उनको शांत किया और भोलेनाथ से बालक गणेश को जिंदा करने का अनुरोध किया। उनके अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को श्री गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। पार्वती जी हर्षातिरेक हो कर पुत्र गणेश को हृदय से लगा लेती हैं तथा उन्हें सभी देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद देती हैं । ब्रह्मा विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान देते हैं ।
ऐसा माना जाता है कि चतुर्थी को व्रत करने वाले के सभी विघ्न दूर हो जाते हैं सिद्धियां प्राप्त होती हैं । किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी की स्मरण किया जाता है जिस कारण इन्हें विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता कहा जाता है। आज भी हमारे घरों में किसी भी रस्म की शुरुआत ‘ॐ गणेशायः नमः’ के मधुर मंत्र के साथ होती है। श्री गणेश जी की पूजा और सभी प्रकार के शुभ कार्य करने के पूर्वृ श्री गणेशायनम के उच्चारण के साथ की जाती है। विवाह एवं गृह प्रवेश जैसी समस्त विधियों के प्रारंभ में गणेश पूजन किया जाता है। कुछ लिखते समय सर्वप्रथम॥ श्री गणेशाय नमः॥ लिखने की प्राचीन परम्परा है। वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ भी सर्व प्रथम लिखा जाता है। ऐसा इसलिए लिखा जाता है कि हमारे द्वारा किया जाने वाला कार्य भलीभांति पूर्ण हो।

– बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

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