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क्या 2019 के लोकसभा चुनाव में हमीरपुर से धूमल की विरासत बचा पायेंगे अनुराग ठाकुर ?

हिमाचल में भाजपा की सरकार तो बन गई है लेकिन पार्टी के बड़े-बड़े धुरंधरों की हार से पार्टी उभर नहीं पाई है. अब 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है और कई सीटों पर वोटों की हार-जीत के अंतर से पार्टी का चिंतित होना लाज़मी भी है. भारतीय जनता पार्टी प्रदेश जिस चेहरे को आगे रखकर प्रदेश में चुनाव लड़ी है, उनकी भूमिका तय नहीं हो पा रही है. भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व और प्रदेश भाजपा अभी जश्न के मूड में हैं. केन्द्रीय नेतृत्व इसलिए जश्न मना रहा है क्योंकि उसने बेहद संयत तरीके से सत्ता की बागडोर पार्टी की दूसरी पीढ़ी के एक कार्यकर्ता के हाथ में थमा दी है. अब उसपर परिवारवाद का ठप्पा नहीं लग सकता और प्रदेश भाजपा अपनी सरकार बनने का जश्न मना रही है. वोटों के लिहाज से मंडी और कांगड़ा में पार्टी का प्रदर्शन ठीक रहा है जबकि शिमला और हमीरपुर में पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है.
प्रेम कुमार धूमल के दबदबे के कारण हमीरपुर संसदीय सीट पार्टी के लिए हमेशा सुरक्षित रही है लेकिन इस बार स्थितियां बदल गई हैं. अनुराग ठाकुर भले ही तीसरी बार सांसद बने हों लेकिन उनका क्रिकेट प्रेम और हाई प्रोफ़ाइल लाइफस्टाइल उन्हें मंझे हुए राजनेताओं की श्रेणी से अलग करता है. कार्यकर्ता और आम मतदाता उन्हें आज भी धूमल के सुपुत्र के तौर पर ही जानते हैं और अब तक जीते तीनों लोकसभा चुनावों के बारे में कहा जा सकता है कि उन्हें अपने पिता की राजनीति का संबल मिलता रहा है. उन्हें राजनीति विरासत में मिली है और इसका लाभ भी उन्हें मिलता रहा है लेकिन इस बार उनके गृहक्षेत्र में ही स्थितियाँ बदली हुई हैं. हमीरपुर जिला जो 1967 से ही भाजपा का गढ़ रहा है और जहां के दो बड़े नेता स्व. जगदेव ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल क्षितिज पर पहुंचे हैं, आज वहां हालत यह है कि पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर कांग्रेस का कब्जा है और दो पर भाजपा का और पार्टी की यह हालत तब हुई है जब पूर्व मुख्यमंत्री और तीन बार हमीरपुर संसदीय सीट से प्रेम कुमार धूमल को इस बार भी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था लेकिन इसके बावजूद वह तब चुनाव हार गये जब उनके सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर भी उनकी सीट पर कई बार प्रचार के लिए पहुंचे थे. उनकी हार के बहुत सारे कारण रहे होंगे लेकिन यह धूमल परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति है.
अनुराग ठाकुर भले ही राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी आवाज उठाये रहे हों लेकिन उनकी पहचान धूमल पुत्र और क्रिकेट का बजह से ज्यादा है. प्रेम कुमार धूमल की जिस प्रकार कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में पैठ है वैसी उनकी तो कतई नहीं है बल्कि आम मतदाता उन्हें हवाई नेता मानते हैं. पहले क्रिकेट का बजह से उनके पास वक्त नहीं था लेकिन अब भी वह पेज थ्री पार्टियों में ही शिरकत करते हैं. हालांकि हिमाचल में खेलों और विशेषकर क्रिकेट के लिए उन्होंने काफी काम किया है और हिमाचल में रेल विस्तार को बढ़ाने के लिए वह लगातार सक्रिय रहे हैं लेकिन मतदाताओं से उनका जुड़ाव नहीं है. वह न तो मतदाताओं को सुलभ उपलब्ध होते हैं और न ही मतदाताओं से जनसम्पर्क को जरूरी मानते हैं. पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बह कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के फोन काल का जबाव देना जरूरी नहीं समझते. उनका कहना है कि उनका सम्पर्क सूत्र प्रेम कुमार धूमल ही होते हैं. ऐसे में अब अनुराग ठाकुर को विरासत को लगातार चलाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच पैठ बनाने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा और वैसे भी 2019 का लोकसभा चुनाव धूमल परिवार के लिए विरासत को बचाने का है. हमीरपुर में पार्टी की हार के बाद वह सक्रिय होकर कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे हैं लेकिन मतदाताओं से वह अभी भी दूर हैं. हमीरपुर संसदीय सीट से भाजपा को पिछली बार के विधानसभा चुनावों से एक सीट कम मिली है लेकिन कांग्रेस की स्थिति यथावत है. भाजपा को 10, कांग्रेस को 6 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है. पिछली बार भाजपा को 11 सीटें मिली थी. लेकिन इसके बावजूद वोटों का अंतर काफी कम है जिससे भाजपा की चिंता बढ़ गई है. हमीरपुर संसदीय सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है. हालांकि कांग्रेस के प्रत्याशी उसे कड़ा मुकाबला देते रहे हैं.
41 वर्षीय अनुराग ठाकुर के खाते में उपलब्धियां भी बहुत हैं लेकिन उनका हाई प्रोफ़ाइल लाइफस्टाइल उन्हें मतदाताओं से दूर करता है. विधानसभा चुनावों के ठीक बाद कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में वह परिवहन सुविधाओं पर बातवकरते हुए उन्होंने बस द्वारा दिल्ली तक का सफर करने की बात बतायी लेकिन लोगों को विश्वास नहीं हुआ क्योंकि सभी जानते हैं कि ज्यादातर वह अपनी फार्च्यूनर कार में ही सफर करते हैं. खेलों को बढ़ावा देने के लिए वह युवावर्ग में लोकप्रिय भी हैं. युवावर्ग को प्रभावित करने के लिए अभी विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने करीब 46 मैनुअल ओपन जिम सांसद कोटे से खोलने को मंजूरी दी है. मतदाताओं को रिझाने की उनकी यह कसरत कितनी कारगर सिद्ध होती है यह तो 2019 के चुनावों में ही स्पष्ट होगा लेकिन इतना तय है कि इस बार उनकी डगर उतनी आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि अब उनके पिता प्रेम कुमार धूमल न तो मुख्यमंत्री हैं, न विपक्ष के नेता और न ही किसी अन्य पद पर हैं और कार्यकर्ताओं की निष्ठा सत्ता बदलने के साथ ही बदल जाती है. कहा तो यहां तक जा रहा है तथा कि राजनीति में धूमल परिवार के वर्चस्व को चरणबद्ध तरीके से निपटाने के लिए कुछ विरोधी गुट सक्रिय हैं और अब उनका अगला टारगेट अनुराग ठाकुर है. अब तक जो कार्यकर्ता एवं नेता हर मौके पर धूमल परिवार के साथ दिखने में अपनी शान समझते थे, वे धीरे-धीरे छिटकने लगे हैं.
लेकिन वह भाजपा युवा मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं. क्रिकेट की सबसे शक्तिशाली ईकाई बीसीसीआई के भी अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन गलत शपथपत्र देने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पद से हटा दिया था. हालांकि युवा मोर्चे का अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कलकत्ता से श्रीनगर तक राष्ट्रीय एकता यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न करके श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था. धर्मशाला में बना खूबसूरत अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम भी इन्हीं की देन है. 2011 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ युवा सांसद का पुरस्कार मिला था तथा वर्ल्ड इकनोमिक फोरम का यंग ग्लोबल लीडर का सम्मान भी मिला है.
अनुराग ठाकुर संसदीय सत्रों में ज्यादातर भाग लेते हैं और संसद में उन्होंने राष्ट्रहित के कई मुद्दे उठाये हैं, जिनमें सामाजिक, राजनीतिक, वित्तीय मामले, राष्ट्रीय सुरक्षा और कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. वह हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार/रखरखाव, नई ट्रेनों की शुरुआत और रेल लिंक के विस्तार, तकनीकी संस्थानों एवं केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना, पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन की शुरूआत, हिमालयी राज्यों के विकास के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड के गठन के मुद्दों को तत्परता और प्रभावशाली ढंग से उठाते आये हैं और पार्टी तथा संसद की विभिन्न समितियों में विभिन्न पदों पर रहे हैं. उन्होंने हिमाचल प्रदेश के भूतपूर्व और वीर सैनिकों के सम्मान में एक युद्ध स्मारक और संग्रहालय के निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है.
अनुराग ठाकुर ने सांसद निधि से सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन, युवक मंडल, सराय, श्मशान घाट, सड़कों, सौर प्रकाश और खेल मैदानों का निर्माण करवाया है. नई ट्रेनें जैसे कि नांदेड़ साहिब एक्सप्रेस, हरिद्वार एक्सप्रेस, जनशताब्दी और हिमाचल एक्सप्रेस की शुरूआत के लिए दृढ़ता से प्रयास किया है उनके प्रयासों से अम्ब-अन्दोरा तक नंगल-ऊना-तलवाड़ा रेल लाइन का विस्तार भी संभव हुआ है और हमीरपुर तक रेललाइन के विस्तार की योजना भी उनके प्रयासों से ही संभव हो सकी है. 29 जुलाई 2016 को अनुराग ठाकुर एक रेग्युलर ऑफिसर के तौर पर टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हुए हैं. इस तरह भाजपा में रहते हुए अनुराग आर्मी-मेन बनने वाले पहले शख्स बने हैं. हालांकि टेरिटोरियल आर्मी में पहले भी बहुत सी हस्तियां शामिल होती रही है और सेना जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा करती है.

विजय शर्मा

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