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चुनाव आयोग ने 20 विधायकों को ठहराया अयोग्य, अब AAP का क्या होगा?

चुनाव आयोग ने लाभ का पद के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका दिया है. 20 विधायकों के भाग्य का फैसला चुनाव आयोग ने कर लिया है. सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग ने इन विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की है. शुक्रवार को बैठक के बाद अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी है. आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है.

संसदीय सचिव बनाए जाने से विवाद में आए

इन विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के बाद से ही इनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है. आयोग ने इन सदस्यों की सदस्यता को अयोग्य ठहराया है. इससे पहले आम आदमी पार्टी को दिल्ली हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी.

सौरभ भारद्वाज का चुनाव आयोग पर वार

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस लाभ के पद का आरोप लगाया जा रहा है, वैसा कुछ हुआ ही नहीं है. हमारे विधायकों ने सरकारी गाड़ी, सरकारी बंगला और तनख्वाह का फायदा नहीं लिया है. चुनाव आयोग ने इस मामले में हमारी बात नहीं सुनी है, किसी को भी विधायक को अपनी गवाही रखने का मौका नहीं दिया है. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति ने गुजरात में पीएम मोदी के अंडर में काम किया है. अब वे पीएम मोदी का कर्ज चुका रहे हैं. 23 जनवरी को उनका जन्मदिन है और सोमवार को रिटायर हो रहे हैं. इसलिए जाने से पहले सभी काम को निपटाना चाहते हैं. सौरभ ने कहा कि सोमवार के बाद ना ही मोदी जी और ना ही ब्रह्मा जी एके ज्योति को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रख सकते हैं.

AAP ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ए के ज्योति अपने रिटायरमेंट से पहले सारे पेंडिंग केस खत्म करना चाह रहे हैं, इसलिए आयोग फटाफट पुराने मामलों का निपटारा कर रहा है. वह 22 को रिटायर हो जाएंगे. हालांकि सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग इसका फैसला नहीं कर सकता, इसका फैसला अदालत में किया जाना चाहिए. पार्टी ने कहा कि विधायकों का पक्ष नहीं सुना गया. आप पार्टी की दिल्ली सरकार ने मार्च 2015 में 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया जिसको लेकर प्रशांत पटेल नाम के वकील ने लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत करते हुए इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी. हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई थी.

याचिकाकर्ता ने कहा- आरोप साबित हुए

इस मामले में शिकायत करने वाले प्रशांत पटेल ने कहा कि यह पूरी तरह से साफ है, इन 20 विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाएगी. उन्होंने कहा, “मैंने यह मामला 2015 में उठाया था, पूरे केस को देखने पर लगता है कि इन विधायकों की सदस्यता चली जाएगी. चुनाव आयोग अपना फैसला राष्ट्रपति के पास भेजेगा, जिस पर राष्ट्रपति अपनी मंजूरी देंगे.” उन्होंने आगे कहा, “आप विधायकों की सदस्यता बचने की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि खुद दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव ने आयोग को दिए अपने हलफनामा में माना है कि विधायकों को मंत्रियों की तरह सुविधा दी गई. दिल्ली में 7 विधायक मंत्री हो सकते हैं, लेकिन इन्होंने 28 बना दिए.” दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में आपत्ति जताई और कहा था कि दिल्ली में सिर्फ एक संसदीय सचिव हो सकता है, जो मुख्यमंत्री के पास होगा. इन विधायकों को यह पद देने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. संविधान के अनुच्‍छेद 102(1)(A) और 191(1)(A) के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है. यह लाभ का पद केंद्र और राज्य किसी भी सरकार का हो सकता है.

AAP के इन 20 विधायकों पर है खतरा

  • 1. प्रवीण कुमार
  • 2. शरद कुमार
  • 3. आदर्श शास्त्री
  • 4. मदन लाल
  • 5. चरण गोयल
  • 6. सरिता सिंह
  • 7. नरेश यादव
  • 8. जरनैल सिंह
  • 9. राजेश गुप्ता
  • 10. अलका लांबा
  • 11. नितिन त्यागी
  • 12. संजीव झा
  • 13. कैलाश गहलोत
  • 14. विजेंद्र गर्ग
  • 15. राजेश ऋषि
  • 16. अनिल कुमार वाजपेयी
  • 17. सोमदत्त
  • 18. सुलबीर सिंह डाला
  • 19. मनोज कुमार
  • 20. अवतार सिंह
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