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मोदी सरकार के अंतिम बजट से जनता की उम्मीदें बरकरार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद कई कड़े फैसले लिए गये हैं मसलन नोटबंदी और जीएसटी ऐसे मामले हैं जिसने आम जनता को बहुत हद तक प्रभावित किया है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं जिसमें काला धन और बेनामी सम्पत्ति बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद आसमान छूती मंहगाई और पैट्रोल-डीजल जैसी आम जनता को प्रभावित करने वाली वस्तुओं को जीएसटी से बाहर रखने के लिए मोदी सरकार की आलोचना हो रही है. इसके अलावा वेतनभोगी आयकरदाताओं को पिछले तीन वर्षों से भाजपा सरकार द्वारा कोई खास राहत न देने से उसकी मंशा पर सवाल उठ रहे हैं जबकि कांग्रेस सरकार के समय ही भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने वेतनभोगी आयकरदाताओं की आय योग्य कर सीमा को साढ़े तीन लाख करने की सिफारिश की थी. इसके अलावा मध्यमवर्गीय जनता जो अपनी ज्यादातर बचत पूंजी बैंकों में सावधि जमा में रखती है, उसपर ब्याज कम करने से व्यापक असर पड़ा है और इसमें मध्यमवर्ग और वरिष्ठ नागरिक ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा होम लोन पर ब्याज की दर घटने के बावजूद प्रधानमंत्री हाऊसिंग सब्सिडी का लाभ केवल नए यूनिटों पर मिलने से उसका लाभ बड़े शहरों के ज्यादातर तबके को नहीं मिल रहा है क्योंकि दिल्ली जैसे शहरों में जहां हाऊसिंग की जरूरत होने के बावजूद घरों का निर्माण न होने से आम जनता इसका लाभ उठाने की स्थिति में नहीं है. 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार का यह आखिरी आम बजट होगा और आम जनता से लेकर निवेशक, वेतनभोगी और स्वरोजगार के साथ-साथ बिजनेस क्लास हर किसी की इस बजट से उम्मीदें हैं.

नोटबंदी, जीएसटी और काले धन तथा बेनामी सम्पत्ति के खिलाफ मोदी सरकार के अभियान के बावजूद इनका अर्थव्यवस्था पर कोई खास प्रभाव तो दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. पैट्रोल-डीजल के भाव आसमान पर हैं. पैट्रोलियम पदार्थों पर एक्साइज डयूटी बढ़ाकर लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे करने के बावजूद मोदी सरकार बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी वापिस लेने को तैयार नहीं है. एक साल के भीतर एक लीटर पैट्रोल और डीजल पर करीब 10 रूपए एक्साइज डयूटी बढ़ाने के बाद केवल गुजरात चुनावों के वक्त 2 रूपए कम की गई थी. यह मोदी सरकार का अंतिम बजट है और 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी मोदी सरकार के इस बजट से आम जनता महंगाई से राहत और रोजगार की उम्मी़द कर रही है और ऐसी उम्मीद है कि पैट्रोल-डीजल से मोदी सरकार ने जो कमाई की है, उसे लोकसभा चुनाव से पूर्व पेश इस बार के बजट में मतदाताओं को रिझाने के लिए खर्च कर सकती है.

महंगाई की मार झेल रहे देश की जनता को विशेषकर वेतनभोगियों को बजट से काफी उम्मीदें हैं .  01 फरवरी को आम बजट पेश होगा और सबकी नजरें वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली पर टिकी हैं कि उनके पिटारे से वेतनभोगियों के लिए क्या राहत की खबर आती है. हाऊसिंग सेक्टर में छाई मंदी को दूर करने के लिए कोई घोषणा होगी. वरिष्ठ नागरिक जिनकी आय का कोई स्थायी साधन नहीं है, उनके लिए क्या कोई सामाजिक सुरक्षा पेंशन की घोषणा होगी आदि ऐसे तमाम कयास लगाये जा रहे हैं. सावधि जमा (एफडी) हमेशा से सबसे सुरक्षित बचत विकल्प रहा है और कुछ समय पहले तक इसमें अच्छा खासा रिटर्न मिल रहा था लेकिन पिछले दो सालों में एफडी की दरों में गिरावट के कारण रिटर्न कम हो गया है और इससे मध्यमवर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस वर्ग का मानना है कि सरकार ने बिजनेस क्लास के फायदे के लिए ब्याज दरों में कटौती की है ताकि उन्हें कम दरों पर लोन मिल सके लेकिन इससे एक बड़ा तबका प्रभावित हो रहा है.

जिस गति से महंगाई बढ़ी है उस गति से आयकर की सीमा नहीं बढ़ाई गई है. वेतनभोगियों को उम्मीद है कि आयकर छूट की सीमा कम से कम साढे तीन लाख रूपए हो जाएगी जबकि महिलाओं तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह छूट सीमा 5 लाख होने की उम्मीद है. हालांकि मंहगाई और जरूरतों को देखते हुए वेतनभोगियों के लिए आयकर सीमा कम से कम पांच लाख होनी चाहिए लेकिन कोई भी सरकार वेतनभोगियों को इतनी राहत देने को तैयार नहीं है क्योंकि यही मध्यमवर्ग सरकार की कमाई का सबसे बड़ा जरिया हैं. महंगाई लगातार बढ़ रही है और  जरूरी चीजों के दामों को नियंत्रित करने का सरकार के पास कोई ठोस विकल्प नहीं है.

यह माना जाता है कि बजट जनता की मदद के लिए बनाया जाता है ताकि लोग उसी के अनुरूप अपनी आय-व्यय और बचत का निर्धारण कर सकें. आम बजट से सरकार को चाल-चरित्र का भी आम जनता को आभास होता है. वेतनभोगी वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद आयकर छूट सीमा कम से कम साढे़ 3 लाख रुपए किए जाने की है. नौकरी पेशा लोगों का कहना है कि महंगाई के दौर में बच्चों की ट्यूशन फीस और घूमने फिरने का खर्चा बहुत ज़्यादा बढ़ गया है जिसके चलते इस बजट में छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए.

देश के विभिन्न सेक्टरों (क्षेत्रों) में नौकरी करने वाली महिलाओं को इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं. देश के लगभग सभी बड़े शहरों में महिलाएं मर्दों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम-काज में हिस्सेदारी निभा रही हैं. महिलाओं को अचल सम्पत्ति खरीदने के लिए प्रेरित करने के लिहाज से महिलाएं सरकार से इस बजट में होम-लोन पर अधिक छूट की उम्मीद कर रही हैं. कारोबारी महिलाओं का कहना है कि आजकल घर बनाना भी महिलाओं की ज़िम्मेदारी में शामिल हो है लिहाज़ा इस मामले में सरकार को लचीला रुख अपनाना चाहिए. कांग्रेस सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें आयकर में अतिरिक्त छूट दी थी, जो मोदी सरकार खत्म कर दी है.

विगत वर्षों में आम जनों की आय में कुछ खास वृद्धि नहीं हुई है. ऐसे में आम जनता की उम्मींद है कि इस बार बजट में वित्त- मंत्री महंगाई से तो निजात दिलाएंगे ही साथ ही कुछ ऐसे उपाय भी करेंगे जिससे लोगों की जेब में कुछ पैसे भी आएं. रोजगार के मामले में मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है. सरकार इस बजट में कुछ ऐसे उपाय करेगी ताकि रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार भी बढ़े.

विजय शर्मा

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