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पेट्रोल के भावों में आग से आम उपभोक्ता हलकान में

पेट्रोल के लगातार बढ़ते दाम से आम आदमी हलकान है और उस पर तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए हैं। यानी अब आदमी को और महंगाई का बोझ सहना पड़ेगा। तेल के भावों में निरंतर वृद्धि से रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आग लग गयी है। सब्जी फल महंगे हो जाने से रसोई का हिसाब बिगड़ गया है। ट्रकों ने मालभाड़ा बढ़ा दिया है जिससे आम उपभोग की वस्तुओं का महंगा होने स्वाभाविक है। दूसरी तरफ केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने टैक्स में कोई कमी नहीं की है। यदि टैक्स में कमी हो तो जनता को राहत मिल सकती है। मगर जनता को राहत कोई देना नहीं चाहता।
पेट्रोलयम पदार्थों के भाव अनियंत्रित हो जाने से समाज के हर वर्ग का बजट बिगड़ा है और जनता कराहने को मजबूर है। आम बजट से पहले कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मोदी सरकार के लिए मुसीबत बन गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें दिसंबर 2014 के बाद पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इस तेजी का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर देखा जा रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की लगातार बढ़ रही कीमतें मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं। देश में रिटेल महंगाई अपने 17 महीनों के टॉप पर है। वहीं, क्रूड महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। क्रूड अगले 2 महीनों में 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। पिछले 6 माह की बात करें तो क्रूड में 57 फीसदी से ज्यादा तेजी आ चुकी है। जून में क्रूड 44.48 डॉलर के लेवल पर था। रविवार को दिल्ली में पेट्रोल 71.7 रुपए प्रति लीटर तो डीजल 62.44 रुपए प्रति लीटर के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। वहीं, पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम आदमी की जेब पर बोझ लगातार बढ़ रहा है। देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल 12 रुपये का अंतर रह गया है। डीजल का रेट देश में 67 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया है, वहीं पेट्रोल भी 80 रुपये के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते अभी पेट्रो उत्पादों के रेट में जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे इनको जीएसटी में शामिल करने की मांग भी जोर पकड़ती जा रही है। देश में यहां पहुंचा पेट्रोल का 80 रुपये दाम देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रविवार को पेट्रोल का दाम 80 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। मुंबई में यह 79.58 रुपये प्रति लीटर है। दिल्ली में भी पेट्रोल 70 रुपये के पार जाकर के 71ण्89 रुपये है। कोलकाता में पेट्रोल का भाव 74.60 रुपए और चेन्नई में 74.55 रुपए प्रति लीटर है। जयपुर रविवार को पेट्रोल का दाम आज 74.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 66.89 रुपये में बिक रहा है। सभी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर कीमतें समान हैं। देश के दो बड़े शहरों में प्राइस में केवल 8 रुपये का अंतर देखने को मिला है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो फरवरी-मार्च तक पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर हो जाएंगे। इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी बढ़ोत्तरी कहें या डॉलर के मुकाबले पैसे का कमजोर होना, लेकिन एक बात तो साफ है कि अगर इसपर लगाम नहीं लगाई गई तो देश में आम लोगों का तेल निकल जाएगा।
क्रूड की कीमतों में आई तेजी से इंपोर्ट करने वाले देशों की चिंता बढ़ती जा रही है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं जो पिछले 3 साल का टॉप लेवल है। पिछले 6 माह की बात करें तो क्रूड में 57: से ज्यादा की तेजी आ चुकी है। जून में क्रूड 44.48 डॉलर के लेवल पर था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ओपेक देशों के अलावा रूस में तेल का प्रोडक्शन घटा देने से मार्केट में सप्लाई कमजोर हुई है। वहीं, पिछले कुछ दिनों से यूएसए में भी रिग्स काउंट की संख्या घटी है। इन वजहों से मार्केट में ओवरबॉट की स्थिति बनी है, जिसका असर क्रूड की कीमतों पर दिख रहा है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर के पार पहुंच गया, वहीं डबल्यूटीआई क्रूड की कीमतें भी 64.53 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑइल के वायदा सौदे होते हैं तो ये कंपनिया वर्तमान परिस्थितियों का रोना रोकर पेट्रोल डीजल के दाम क्यों बढ़ाती हैं? हर बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे क्रूड ऑइल को लगातार बढ़ रही पेट्रोल डीजल की कीमत का कारण बताया जाता है, लेकिन सच तो यह कि भारतीय बाजार में बेचे जाने वाले कुल पेट्रोलियम पदार्थ का 80 प्रतिशत भाग अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदा जाता है, जबकि 20 प्रतिशत देश के प्राकृतिक संसाधनों से आता है। ऐसे में क्या कंपनियों के लिए पेट्रोलियम पदार्थ के दाम बढ़ाना इतना जरूरी है? 3 अक्टूबर को एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने के बाद से क्रूड में लगातार तेजी बनी हुई है। 3 अक्टूबर के बाद से जहां इंटरनेशन मार्केट में क्रूड 27 प्रतिशत महंगा हो चुका है, वहीं इंडियन बास्केट में क्रूड की कीमतें 17 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इस रेश्यो (अनुपात) में पेट्रोल-डीजल की कीमतें न बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है।
अगर भारत में पेट्रोल की कीमत बढ़ती रहती है तो सभी खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। इससे बचत कम और व्यय अधिक होगा। इसके परिणाम स्वरूप भारत में रियल एस्टेट, बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों पर असर पड़ेगा। अंत में अधिक से अधिक लोगों को गरीबी रेखा की ओर धकेल दिया जाएगा।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

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