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साक्षात्कारः 20 एमएलए अयोग्य होने के बाद हिली दिल्ली सरकार की जमीन

युवा अधिवक्ता प्रशांत पटेल

आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ने के बाद दिल्ली की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने सीएम अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा मांगना शुरू कर दिया है। 20 सिटिंग विधायक पर आरोप है कि इन्होंने विधायक रहते दूसरे लाभयुक्त पदों पर भी कब्जा किया है। आरोप सही पाए जाने पर चुनाव आयोग ने इन्हें अयोग्य करार दे दिया है। मुद्दे को लेकर शुक्रवार को अंतिम जिराह हुई जिसमें सभी की सदस्यता रद करने के आदेश चुनाव आयोग ने जारी किए। चुनाव आयोग ने सभी विधायकों को फिर से आम आदमी बनाने को राष्ट्रपति से अंतिम ठप्पा लगवाने के लिए सिफारिश भेज दी है। देर-सबेर इनकी बेदखली के आदेश राष्ट्रपति के तरफ से आ सकते हैं। इन 20 विधायकों को स़कड़ पर लाने की पटकथा लिखी गई है दिल्ली हाईकोर्ट के युवा अधिवक्ता प्रशांत पटेल द्वारा। वकील प्रशांत पटेल से पूरे मसले पर रमेश ठाकुर ने विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

सवाल: क्या हैं लाभ के पद के संविधानिक पचड़े?
जवाब: संविधान के अनुच्छेद 102-1ए के तहत जनप्रतिनिधि जैसे संसद सदस्य या एमएलए होते हुए किसी अन्य औहदे पर नहीं हो सकते, जिनमें सैलरी या कोई अन्य सुविधा मिलती हो। यहां तक कार्यालय के लिए स्थान या सरकारी खर्चे के वाहन तक नहीं ले सकते। लेकिन आम आदमी पार्टी के 21 विधायक ऐसे लाभ के पदों पर आसीन थे और हर सुविधा ले रहे थे। हालांकि एक विधायक पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं अब 20 बचे हैं। इन विधायकों ने कानून व संविधान को चकलाघर समझ रखा था। जिसका खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ रहा है।

सवाल: राष्ट्रपति को याचिका भेजते वक्त आपने कभी सोचा था इनका ये हश्र होगा?
जवाब: बिल्कुल सोचा था ऐसा होगा। 19 जून 2015 को मैंने राष्ट्रपति को एक खत लिखा था। खत के माध्यम से उनको अवगत कराया था कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं। विधायक रहते दूसरे लाभ के पद पर भी रहे ऐसा संविधान में बात नहीं कही गई है। राष्ट्रपति ने मेरे अनुरोध को गंभीरता से लिया और चुनाव आयोग को पूरे मामले की जांच करने को कहा। चुनाव आयोग ने अपनी जांच में सही पाया। नतीजा आपके सामने है।

सवाल: थोड़ा विस्तार से बताएं चुनाव आयोग में क्या हुआ अबतक मामले को लेकर?

जवाब: मेरी अर्जी के पांच महीने के भीतर राष्ट्रपति कार्यालय ने मुख्य चुनाव आयोग को मामला भेज दिया था। 10 नवबंर 2015 से चुनाव आयोग ने अपनी इंटरनल जांच शुरू कर दी थी, जिसमें तब से अबतक 11 सुनवाई हुई। सभी जिराह में मुझे भी तलब किया गया। 14 जुलाई 2016 से लेकर 27 मार्च 2017 तक तय तारीखों में जमकर माथापच्ची हुई। तीन-तीन घंटों तक जिराह हुई। लेकिन मुकर्रर 19 जनवरी को दी एंड हो गया। फैसले के बाद ये विधायक हाईकोर्ट पहंुचे, वहां भी इन्हें मुंह की खानी पड़ी। कोर्ट ने इनकी याचिका को खारिज कर दिया।

सवाल: लाभ के फेर में फंसे विधायकों द्वारा बचाव की दलील क्या रहीं थीं?
जवाब: सभी भागते नजर आए। चुनाव आयोग के बुलावे पर भी नहीं पहुंचे। दरअसल उनके पास कहने के लिए कुछ था ही नहीं जो चुनाव दरवार में जाकर कहते। दिल्ली के विधायकों ने संविधानिक चीजों को अपनी बुआ का घर समझ लिया था। जो मन में आए करोका माहौल बना दिया था। लेकिन ये लोग शायद यह बात भूल गए कि संविधान से खिलवाड़ करने की सजा क्या हो सकती है। देखिए, दिल्ली में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। निवर्तमान सीएम साहिब सिंह वर्मा के वक्त भी लाभ के पद पर रहते सचिव नंद किशोर गर्ग को चुनाव आयोग ने अयोग्य करार दिया गया था।

सवाल: इन्हें बर्खास्त कराके आपको क्या फायदा होगा?
जवाब: प्रत्येक नागरिक का फर्ज बनता है कि वह समाज में गलत न होने दे। मैंने उसी नागरिक धर्म का पालन किया है। मेरी न सियासत में जाने की मंशा है। और न किसी लोभ-माया की। मेरी अंर्तआत्मा कहती है कि मैं ठीक कर रहा हूं। बाकि कोई कुछ भी कहें परवाह नहीं? वकील हूं इसलिए कानून की एबीसीडी समझता हूं। संविधान के अनुच्छेद 191-1ए और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 9ए के तहत भी सांसद-विधायकों को अन्य पद लेने से रोकने का प्रावधान है। संविधान के इसी हथियार का मैंने इस्तेमाल किया है।

सवाल: आपने 20 विधायकों की रोजी-रोटी छीनीं है, भविष्य में आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं?
जवाब: मैंने गृहमंत्रालय को दो बार सुरक्षा के लिए लिखा है जिसका उन्होंने जबाव नहीं दिया। मुझे धमकियां भी मिल रही हैं। कुछ महिलाओं के फोन भी आएं है जो मुझे गलत कामों के आड़ में फंसाने की प्लानिंग कर रहीं थीं। पर, मैं सर्तक हूं। अगर अचानक मेरे साथ कुछ अनहोनी घटनाएं घटती हैं। तो निश्चित तौर पर उसके गुनाहगार ये लोग होंने? बाकि मुझे डर नहीं किसी बात का। मैं अपना काम ईमानदारी से करने की कोशिश करता हूं।

सवाल: इस मुहीम में आपका किसी ने सहयोग किया?
जवाब: जरूरत ही नहीं किसी के सहयोग की। सबकुछ मैंने खुद से मैनेज किया है। हां मेरे सीनियर्स ने मुझे बहुत प्रतोसाहित किया। मुझे लोग भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगा रहे हैं। सच्चाई ये है कि मैं किसी भी नेता को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता। इसके अलावा भी मुझ पर बेवजह के आरोप लग रहे हैं। दरअसल ऐसा होना मैं स्वाभाविक भी समझता हूं।

रमेश ठाकुर

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