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यह करणी सेना आखिर है कौन? जानिए पूरी कहानी

बॉलिवुड फिल्म ‘पद्मावत’ के विरोध को लेकर चर्चा में आई करणी सेना की कहानी बेहद दिलचस्प है। वर्ष 2006 में कुछ बेरोजगार राजपूत युवकों ने करणी सेना का गठन किया जो आज राजस्थान में इस समुदाय का चेहरा बन गया है। हालांकि यह संगठन अभी कई धड़ों में बंट गया है। इनमें से लोकेंद्र सिंह कल्वी के नेतृत्व वाली श्री राजपूत करणी सेना, अजीत सिंह ममदोली के नेतृत्व वाली श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना समिति और सुखदेव सिंह गोगामेदी के नेतृत्व वाली श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना सबसे ज्यादा प्रभावी है। इन संगठनों ने शुरू में राजपूतों से जुड़े मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन किया लेकिन बाद में ये संगठन फिल्म पद्मावत के विरोध में सबसे ज्यादा मुखर हो गए। राजस्थान के शेखावती इलाके के छात्र इस संगठन में कट्टर समर्थक हैं। फिल्म पद्मावत के विरोध में इन सभी धड़ों ने एकजुटता दिखाई। हालांकि इनके नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते इनमें काफी मतभेद है। एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ के बीच सभी धड़े राजपूत युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करना चाह रहे हैं ताकि उनका आधार मजबूत हो।

संगठन के 2 लाख सदस्य
श्री राजपूत करणी सेना के जिला अध्यक्ष नारायण सिंह दिवराला कहते हैं, ‘कल्वी वर्ष 2008 में कांग्रेस से जुड़े हुए थे। ममदोली चाहते थे कि कल्वी उनके लिए कांग्रेस का टिकट दिलवाएं और इसी वजह से दोनों अलग हो गए।’ उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन के दो लाख सदस्य हैं। जनवरी 2017 में जब श्री राजपूत करणी सेना के कुछ सदस्यों ने पद्मावत की शूटिंग के दौरान फिल्मकार संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट किया तो करणी सेना के सभी गुटों में अचानक आम सहमति बन गई।
वर्ष 2017 में ही जब राजस्थान पुलिस ने गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को मार गिराया तो करणी सेना ने उसकी याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया था। आनंदपाल का एनकाउंटर राजपूत संगठनों के लिए एक मुद्दा बन गया। वह कई राजपूतों और रावण राजपूत युवाओं में बेहद सम्मान से देखा जाता था जो उसे विरोधी जाट समुदाय से ‘रक्षक’ के रूप में देखते थे। पुलिस एनकाउंटर के विरोध में राजपूतों ने ट्रेन की पटरियां उखाड़ दीं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान कथित रूप से एक व्यक्ति की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई।

14 राजपूत नेताओं का नाम सीबीआई की FIR में दर्ज
एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी ने कहा, ‘कम से कम 14 राजपूत नेताओं का नाम सीबीआई की एफआईआर में दर्ज है।’ करणी सेना पहली बार वर्ष 2006 में चर्चा में आई थी। इस दौरान कल्कि ने फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘जोधा अकबर’ का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फिल्म ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ किया है। बाद में यह फिल्म राजस्थान में रिलीज नहीं हो सकी। वर्ष 2013 में यह संगठन फिर चर्चा में आया। करणी सेना ने आरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस के चिंतन शिविर को निशाना बनाने की धमकी दी। करणी सेना के सदस्य नेगेटिव पब्लिसिटी के बावजूद पद्मावत के खिलाफ विरोध जारी रखे हुए हैं। अब भंसाली ने उन्हें फिल्म को देखने का आमंत्रण दिया है। कल्वी कहते हैं, ‘हम सहमत हैं…उन्हें हमारे द्वारा नामित छह इतिहासकारों को पहले यह फिल्म दिखानी होगी।

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