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विद्या मंदिरों में निर्मम हत्याएंः एक खोैफनाक त्रासदी ?

गुरु शिष्य के पवित्र रिश्तों में आ रही कडवाहट न केवल शिक्षा जगत ,बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रश्न उठ खडा हुआ है कि क्या इन विद्या मंदिरों में हिसंक छात्र अपनी सीमाएं लांघ रहे है व निरंकुश होकर प्रतिदिन उद्दंड होते जा रहे हैं।प्रतिदिन हिसंक हो रहे इन प्रकरणों की तह तक जाना होगा तभी सच सामने आ सकेगा ! कहीं शिष्य गुरुओ का अपमान कर रहे हैं तो कहीं छात्रों द्वारा अध्यापकों से अमानवीय व्यवहार व हत्याओं के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। देश में घटित मामलों से जनमानस खौफजदा है।इन घटनाओ से विश्व गुरुवाले भारत की साख पर बटटा लगा हैं।देश में जिस प्रकार हिसंक छात्रों द्वारा अध्यापकों की हत्याएं की जा रही है भविष्य के लिए अशुभ संकेत है। छात्रों द्वारा अध्यापकों की हत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है।ताजा प्रकरण में हरियाणा के यमुनानगर के एक स्कूल में बारहंवी के छात्र ने दिनदहाडे प्रिसिंपल के कमरे में घुसकर पिस्तौल से गोलियां चलाकर प्रिसिपल को मौत के घाट उतार दिया।यमुनानगर में में हुई प्रिसिंपल की नृश्ंास हत्या से हर भारतीय विचलित हुआ है।यह हिसंक छात्र स्कूल में लेट आता था।प्रिसिंपल ने उसे दस दिन के लिए स्कूल से निकाल दिया था।ऐसी वीभत्स घटनाएं बहुत ही दुखदायी है।अध्यापक की बेरहमी से हत्या एक अक्षमय अपराध है। बीते साल 2017 में गुरुगा्रम के रेयान इंटरनैशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड को भी स्कूल के एक छात्र ने अंजाम दिया था।लखनउ में भी एक छात्रा ने एक सात साल के बच्चे की चाकू मार कर हत्या कर दी थी। गत वर्ष दिल्ली के एक सरकारी स्कूल नागलोई में छात्रों ने चाकू से हमला करके अध्यापक को मार डाला था। दोना छात्र नाबालिग थे।अघ्यापक का कसूर इतना था कि इनको परीक्षा में बैठने नहीं दिया था। आरोपियों ने अध्यापक की पीठ व पेट पर चाकू से हमला किया था घायल अध्यापक को अस्पताल ले जाया गया मगर नहीं बच पाया और उसकी मौत हो गई थी।अध्यापक ने अपने कर्तव्य का निवार्ह किया मगर इन छात्रों को यह रास नहीं आया और इतनी सी बात को सहन नहीं कर सके और अपराध का रास्ता अपनाकर अध्यापक की जान ले ली थी।देश के स्कूलों मे पनपता ऐसा हिसंक माहौल भविष्य के लिए बिनाशकारी साबित हो रहा है।अगर यमुनानगर में घटित इस जघन्य वारदात पर संज्ञान न लिया तो आने वाले दिनों में इन हादसों में वृद्वि हो सकती है।समझ नहीं आता की इन नाबालिग ने इतना बड़ा अपराध कैसे कर दिया।विद्या मंदिरों में ऐसी हिसंक वारदातों से अध्यापक व छात्र भी डर के साए में है कि कहीं यह और छात्रों पर जानलेवा हमला न कर सके।स्कूलों में ऐसे प्रकरण प्रलय की इबारत लिख रहे है।नाबालिग छात्र द्वारा किया गया यह अपराध बहुत ही संगीन मामला है।देश में घटित हो रहे इन वारदातों से हर अध्यापक सहमा हुआ है। देश के राज्यों में प्रतिदिन इन मामलों में वृद्वि हो रही है। विद्या मंदिरों में छात्रों द्वारा अध्यापकों की पिटाई व निर्मम हत्या का सैंकडों अध्यापक दंश झेल रहे हैं। छात्रों द्वारा गुरुओं के प्रति हिसां बहुत ही दुखद है। देश में आंकडों में निरंतर वृद्वि होती जा रही है। वर्ष 2012में चेन्नई में 15 साल एक छात्र ने कक्षा में पढा़ रही अध्यापिका पर चाकू से हमला करके मौत के घाट उजार दिया था इस छात्र ने अध्यापिका के पेट,गर्दन व पीठ पर चाकू से हमला किया था। कुछ वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश के आनी के अलसू में भी एक छात्र ने नकल से रोकने पर प्रधानाचार्य की हत्या कर दी थी। ऐसी रौंगटे खडे कर देने वाली घटनाएं बहुत ही खतरनाक हैं। इन प्रकरणों पर मनन करना प्रत्येक नागरिक का फर्ज है । अध्यापकों को चाहिए कि उद्दडता करने वाले छात्रों को निष्कासित किया जाए। । देश में हुए इन मामलों पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए तथा अमानवीय व हिसंक व्यवहार करने वाले छात्रों को सजा देनी चाहिए। केन्द्र सरकार को भी इन प्रकरणेंा पर ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार के हादसों पर शीघ्र रोक लगाई जाए । यमुनानगर के स्कूल मे घटित इस वारदात की अनदेखी की तो ऐसे हिसंक प्रवृति के छात्रों का मनोबल बढ जाएगा। अगर इस हिंसक नाबालिग को सख्त सजा न दी गई तो ऐसे हादसों की पुनरावृति होती रहेगी। ऐसे अपराधिक प्रवृति के छात्रों पर कानूनी कारवाई करनी होगी। ताकि भविष्य में विद्या मंदिरों में ऐसी हिंसा वारदातें न हो सके।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ पत्रकार,स्तंभकार,

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