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बजट 2018 : आयकर स्लैब और दरों में नहीं मिली राहत

नई दिल्ली। मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट से आयकर में राहत की बाट जोह रहे मध्यम वर्ग को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निराश किया है। वित्त मंत्री ने न तो व्यक्तिगत आयकर की दर घटाई है और न ही स्लैब में कोई बदलाव किया है।

आयकर के संबंध में जेटली ने अपने कर प्रस्तावों के जरिये वेतनभोगी वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को एक हाथ से मामूली राहत दी है, लेकिन दूसरे हाथ से आयकर पर 4 फीसद ‘हेल्थ एंड एजुकेशन सेस’ लगाकर आम करदाताओं की जेब से पैसा निकाल लिया है। वेतनभोगी वर्ग को चिकित्सा खर्च और परिवहन भत्ते के एवज में 40,000 रुपये की कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन) के रूप में छूट से राहत मिलेगी।

असल में फिलहाल व्यक्तिगत करदाताओं को परिवहन भत्ते के 19,200 रुपये और चिकित्सा खर्च के 15,000 रुपये का लाभ मिलता है। कुल मिलाकर उन्हें कर योग्य आय का आकलन करते समय इन दोनों ही मद में 34,200 रुपये की छूट मिलती है, लेकिन नई व्यवस्था में वे 40,000 रुपये तक की छूट ले सकेंगे।

इस तरह नई घोषणा से वेतनभोगी वर्ग को कर योग्य आय में मात्र 5,800 रुपये की छूट मिलेगी और इससे मात्र 302 रुपये से 2081 रुपये तक की टैक्स बचत होगी। राहत की बात यह है कि वेतनभोगी वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को इस छूट का लाभ लेने के लिए कोई बिल प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं होगी।

ढाई करोड़ वेतनभोगी करदाताओं को होगा फायदा वित्त मंत्री ने कहा कि वेतनभोगी वर्ग को 40,000 रुपये की कटौती की सुविधा देने से करीब ढाई करोड़ वेतनभोगी और पेंशनभोगी व्यक्तियों को फायदा होगा। हालांकि इसके चलते खजाने पर 8,000 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा।

वित्त मंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और डाकघर में जमा राशि पर करमुक्त ब्याज की मौजूदा सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने का एलान भी किया। खास बात यह है कि इस सीमा के भीतर उनको मिलने वाली ब्याज राशि पर आयकर कानून की धारा 194ए के तहत टीडीएस भी नहीं कटेगा।

साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को आयकर कानून की धारा 80डी के तहत हेल्थ प्रीमियम के एवज में मिलने वाली डिडक्शन की सुविधा भी 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये की है। इस तरह वरिष्ठ नागरिकों को अब स्वास्थ्य पर सामान्य खर्च या स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर 50,000 रुपये सालाना खर्च के डिडक्शन की सुविधा होगी।

इसी तरह गंभीर बीमारी के मामले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80डीडीबी के तहत स्वास्थ्य खर्च पर अधिकतम एक लाख रुपये के डिडक्शन की सुविधा देने की घोषणा भी वित्त मंत्री ने की। वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली इस टैक्स राहत से सरकार के खजाने को 4000 करोड़ रुपये की हानि होगी।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अन्य घोषणा में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को मार्च, 2020 तक बढ़ाने और इसके तहत निवेश की मौजूदा सीमा को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने की घोषणा भी की। इस योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को आठ फीसद का निश्चित रिटर्न मिलता है।

‘हेल्थ एवं एजुकेशन सेस’ से आएंगे 11,000 करोड़ रुपये दूसरी ओर वित्त मंत्री ने आयकर पर 4 फीसद ‘हेल्थ एवं एजुकेशन सेस’ लगाने का एलान किया। इससे सरकार के खजाने में 11,000 करोड़ रुपये आएंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि गरीबों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए धन जुटाने को सरकार ने यह सेस लगाया है। दरअसल इससे पहले आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा सेस लगता था, जो तीन फीसद था। इसी को एक फीसद बढ़ाकर वित्त मंत्री ने ‘हेल्थ एंड एजुकेशन सेस’ के रूप में चार फीसद कर दिया है।

बात पते की

थम्स अप – वरिष्ठ नागरिकों का रखा ख्याल। नौकरी पेशा वर्ग को भी दी राहत

थम्स डाउन – टैक्स की दर घटाने या स्लैब में बदलाव का मौका चूक गए वित्त मंत्री। आम चुनाव से पहले मध्यम वर्ग के लिए लोक लुभावन हो सकता था यह कदम।

खास बातें: बिजनेस वालों से ज्यादा टैक्स देते हैं सैलरी वाले

1. आकलन वर्ष 2016-17 में 1.89 करोड़ वेतनभोगी व्यक्तिगत करदाताओं ने दाखिल किया आयकर रिटर्न

2. आकलन वर्ष 2016-17 में वेतनभोगी करदाताओं ने किया 1.44 लाख करोड़ रुपये कर भुगतान

3. वेतनभोगी करदाताओं ने किया औसतन 76,036 रुपये का कर भुगतान

4. आकलन वर्ष 2016-17 में 1.88 करोड़ बिजनेस करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं ने फाइल किया रिटर्न

5. बिजनेस करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं ने दिया 48,000 करोड़ रुपये का टैक्स

6. बिजनेस करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं का औसत टैक्स 25,753 रुपये

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