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तंबाकू सेवन और धूम्रपान करना लोगों का पैसन, बीमारी से डरे नहीं समय पर करवाएं इलाज

फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली में कैंसर रोग शहर में तेजी से बढ़ रहा है। तनाव, धूम्रपान, देर से सोना, जंक फूड सेवन का लोगों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। आज तंबाकू सेवन और धूम्रपान करना लोगों का पैसन बन गया है। कुछ लोग ऑफिस के तनाव को कम करने के लिए ऑफिस से निकल बाहर धुंए के छल्ले उड़ाते है। विशेषज्ञों की माने तो युवाओं में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के साथ कैंसर को बढऩे से रोका जा सकता है।  सेक्टर 16ए स्थित मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. बीडी पाठक का कहना है कि धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से मुंह और गले का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। हर साल इनके रोगियों में इजाफा हो रहा है। मेट्रो अस्पताल में हर माह 10 से 15 मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिगरेट, धूम्रपान, गुटखा, खैनी, जर्दा पान मसाला ये ऐसे कारण हैं, जो व्यक्ति के हाथ में है। अगर व्यक्ति इनका सेवन बंद कर दे तो कैंसर से पूरी तरह से बचा जा सकता है। 10 साल पहले जहां स्तन कैंसर होने की सामान्य उम्र 45 से 55 साल थी वहीं अब इसके होने की सामान्य उम्र 30 से 40 साल हो गई है। स्तन कैंसर अब अधिकतर शहरों में होने वाला सबसे आम कैंसर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है।

सर्जरी में नई तकनीक

डॉ बीडी पाठक ने कहा कि पहले कैंसर होने पर अक्सर मरीज के शरीर से उस पूरे अंग को बाहर निकालना पड़ता था। अब पूरा अंग निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। अब डाउन स्टेजिंग ऑफ ट्यूमर के जरिए कैंसर का साइज छोटा कर दिया जाता है। इससे पूरा अंग बेकार होने से बच जाता है। ब्रेस्ट, लंग्स, टंग, ओवेरियन, रैक्टम कैंसर में यह खास कारगर होती है। इसी तरह पहले ब्लड सप्लाई चालू रखकर सर्जरी की जाती थी। अब ब्लड सप्लाई कट करके सर्जरी की जाती है, जिससे सर्जरी की लिमिटेशन खत्म हो जाती है और किसी अंग को दोबारा बनाने का काम बेहतर होता है।

कंबाइंड ट्रीटमेंट

आजकल कैंसर के बहुत से मामलों में कंबाइंड अप्रोच के साथ इलाज किया जाता है। जैसे कि अगर कैंसर अडवांस्ड स्टेज में है तो कई बार रेडियोथेरपी या कीमोथेरपी की मदद से उसका साइज कम कर दिया जाता है। फिर सर्जरी की जाती है। इससे सर्जरी ज्यादा लाभदायक होती है। इसी तरह कुछ मामलों में पहले सर्जरी की जाती है। फिर रेडियोथेरपी आदि की जाती है ताकि कैंसर लौट कर न आए।

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