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खुद के पैसों से कार खरीदने की ख़ुशी अलग ही होती है: कार्तिक आर्यन

वर्ष 2011 हिन्दी फिल्मों में अपने करियर की शरुआत करने वाले कार्तिक आर्यन एक बार फिरसे लोको के बिच होंगे। अपनी आगमी फ़िल्म “सोनू की टीटू की स्वीटी”सोनू के किरदार से दर्शको को मनोरंजन करने के लिए तैयार है उनकी साथ हुए बातचीत के मुख्य अंश पेश

> रोमांस की परिभाषा आपके लिए क्या है ?
> रोमांस की परिभाषा बस बता रहा हूँ. जो सच हैवही बता रहा हूँ. लोग मुझे रोमांटिक हीरो भी कहनेलगे हैं . फिल्म का ट्रेलर भी अलग है, और लोगों कोबहुत पसंद आ रहे हैं. मैंने फिल्म में काम तो कियाहै पर देख नहीं पाया हूँ.

> फिल्म का प्लाट काफी अलग है ?
> ये फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा, इसमेंआपका मनोरंजन बहुत होगा. फिल्म में सबकुछनया मिलने वाला है. ऐसा आपने पहले कभी नहींदेखा होगा. लिखावट भी काफी अलग है.

> मोनोलॉग है ?
> हाँ लोग मुझसे पूछ रहे हैं की क्या इस फिल्म में भीमोनोलॉग है की नहीं, वो आपको फिल्म देखने केबाद ही पता चलेगा. फिल्म रिलीज होने दीजियेतभी पता चलेगा.

> लगता है की इस तरह की कहानी के आपमास्टर बन गए हैं ?
> देखिये मैं और लव सर इस तरह की फिल्म अकेलेही बनाते हैं, कोई कॉम्पिटिशन नहीं है. भाग्य कासाथ मिल रहा है. हम खुश हैं की लोगों को वो मिलरहा है जो वो चाहते हैं . इस तरह की फिल्म मैंहमेशा करता रहूँगा.

> किरदार कितना अलग है ?
> देखिये पंचनामा का रज्जो और इस फिल्म का सोनू, काफी अलग हैं. दोनों में कोई भी समानता नहीं है.किरदार के लिए मैं काफी वर्कशॉप करता हूँ. मेरे हरकिरदार की अलग जर्नी है.

> 8 साल से आप लव रंजन के साथ काम कर रहे हैं?
> मैं उन्हें और वो मुझे ग्रांटेड ही लेते हैं. मैं उनके लिएएक पंचनामा बेबी हूँ. मुझे काफी तराशा है. हमदोनों के लिए वो पहली फिल्म थी. एक अलग तरहका रिलेशन है.

> इंडस्ट्री में दरवाजे खुल गए हैं ?
> बहुत से दरवाजे खुल गए हैं, लेकिन उसी समय मेंएक और फिल्म करते हुए मैं प्राथमिकता एक हीफिल्म कोदे पाता हूँ.

> सफलता के साथ विफलता भी मिलती है ?
> मैंने हमेशा से ही एक तरह की फिल्में नहीं करने केफैसले में था . कई बार सफलता के साथ विफलताभी मिलती है. कांची फिल्म में भी एक रोमांटिकहीरो का काम था. वो महिला प्रधान फिल्म थी,सुभाष है साहब के साथ काम करना था. मुझे विलेनके भी हीरो मिले हैं , लेकिन एक टाइम पर एक हीफिल्म का चयन हो पाता है . विलेन का काम मिला तो करेंगे ?हाँ,जरूर करना चाहूंगा, शाह रुख सर ने डर फिल्ममें बहुत अच्छा विलेन का किरदार निभाया था , मैंभी उसतरह की फिल्म करना चाहूंगा.

> जर्नी को कैसे देखते हैं ?
> मैं ग्वालियर से आया हूँ, मुंबई में स्ट्रगल का अलगही मजा है , खुद के पैसों से कार खरीदने की ख़ुशीअलग हीहोती है. सबकी अपनी जर्नी है, मुझेअपनी जर्नी पसंद आयी. मैं खुद को खुशकिस्मतमानता हूँ.

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