ब्रेकिंग न्यूज़

मंजिल की ओर ले जाने वाली है जगदीश बाली की अभिप्रेरक पुस्तक “चल चला चल”

लेखक जगदीश बाली की नई पुस्तक “चल चला चल” पाठकों के सामने हैं। यह अभिप्रेरक पुस्तक पाठकों की जीवन जीने के मायने तो सिखाती ही है, साथ ही जीवन में सफलता पाने के लिए पाठकों का  निरन्तर उत्साहवर्धन भी करती है।  जगदीश बाली मूल रूप से सरकारी सेवा में अंग्रेजी के अध्यापन कार्य से जुड़े हैं और इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में भी अपनी लेखनी चलाते रहते हैं। इससे पहले भी वह अंग्रेजी में “द स्पार्क इज विदिन यू” प्रेरक पुस्तक लिख चुके हैं, जिसकी खूब चर्चा हुई थी। समाज और विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए उन्होंने अपनी नई कृति “चल चला चल” हिन्दी में लिखी है और पाठक इसे पसंद कर रहे हैं। 252 पृष्ठों की इस पुस्तक में 37 अध्याय हैं जो जीवन में संघर्ष करते हुए भी निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। पुस्तक जीवन जीने की कला सिखाती है और इसके हर अध्याय में सीखने के लिए एक कुछ न कुछ नया है जो युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। लेखक पाठकों से रूबरू होकर कहते हैं कि जीवन में  खुशी और गम तो चलते ही रहते हैं लेकिन हमें अपनी राह से नहीं भटकना चाहिए और मंजिल की तरफ निरन्तर अग्रसर रहना चाहिए। लेखक का मानना है कि मनुष्य को जीवन पथ पर आगे बढ़ते हुए बिना घबराये अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए। पुस्तक में कई अभिप्रेरक पाठ हैं जिन्हें अपने जीवन में उतार कर कोई भी इनसान अपनी मंजिल तक सफलतापूर्वक पहुंच सकता है। लेखक का मानना है कि वही व्यक्ति सफल हो सकता है जो जीवन के तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद निरन्तर सक्रिय रहकर आगे बढ़ता है और जो असफलताओं से घबराकर मायूस होकर रास्ता बदल लेता है, वह कभी सफल नहीं हो पाता। अत: जीवन में आगे बढ़ने की लिए हमेशा दृढ़ निश्चय करके आगे बढ़ना चाहिए। लेखक ने जीवन का चित्रण करते हुए लिखा है कि जीवन एक सफर है – जन्म से मृत्यु तक एक सफर। कभी धूप है तो कभी छांव, कभी खुशी है तो कभी गम, लेकिन सफलता उसी के पांव चूमती है जो निरन्तर निर्भीक होकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहता है। लेखक लिखते हैं कि मनुष्य को हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए तब बड़ी से बड़ी रूकावट भी उसका रास्ता नहीं रोक सकती और वह मंजिल तक अवश्य पहुंचेगा। जीवन में किन बातों को अपनाना चाहिए और कौन-सी चीजों का निषेध करना चाहिए, इसका विवरण भी किताब में दिया गया है। 350 रूपए की यह पुस्तक अमेजॉन पर ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है तथा पाठक ऑनलाइन आर्डर करके इसे घर बैठे खरीद सकते हैं।

विजय शर्मा

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Translate »
Skip to toolbar