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आजादी के अर्थ हमें कुछ इतने भा गए, सन 47 से चले थे, एके 47 तक आ गए…

फरीदाबाद। 32वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्त शिल्प मेले में बीती सायं चौपाल पर हास्य कवि सम्मेलन में कवियों की रचनाओं ने लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। देश के सात विख्यात कवियों ने मेला चैपाल में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन के अंतर्गत हास्य व्यंग की अनूठी काव्य रचनाओं से सजाया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी.बी. प्रसून ने बतौर मुख्य अतिथि दीपशिखा प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। फरीदाबाद के जाने-माने हास्य कवि एवं व्यंगकार सरदार मनजीत ंिसह ने इस कवि सम्मेलन का संचालन किया।  इंदौर से पधारी कवियित्री डा0 अनिता सोनी ने मॉ शारदे की वंदना जय-जय हंस वाहिनी शारदे मैया, जय-जय वीणा पाणीष्श् जैसी मनमोहक व सुरीली वंदना गाकर कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके अलावा उन्होंने श्रृंगार रस से भरी अपनी काव्य रचना को गाकर पेश किया-

कांटो पे चलके आज तेरा प्यार पा लिया, हर बूंद को लहू का सितारा बना लिया,

पतझड मिला था मुझे लेकिन प्यार से उसे सावन बना लिया, खुद फूल बन गए और मुझे खूषबू बना लिया।

दिलीप शर्मा ने राजनीति पर कुछ इस तरह से कटाक्ष किया-

हो गई मैली पुरखों की माटी, खून बहाया घाटी-घाटी, कुर्सी की लाज बचाउं कैसे, जाके बापू से नजरे मिलाउं कैसे।

लखनउ से पधारे डा0 सुरेष अवस्थी ने देष की व्यथा को कुछ यूं बयां किया-

आजादी के अर्थ हमें कुछ इतने भा गए, सन 47 से चले थे, एके 47 तक आ गए,

महारानी लक्ष्मी बाई से चले थे, जलेबी बाई तक आ गए।

सूरजकुंड मेले में विख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधी समां

उक्त सभी विद्वान कवियों ने लोगों को देश के प्रति जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए हास्य व्यंग से जुडी अपनी खूबसूरत काव्य रचनाएं प्रस्तुत की और चुटकुलों की हास्य लडियों से उनका भरपूर मनोरंजन किया।  इस कवि सम्मेलन में मौजूद पृथला हलका के विधायक टेकचंद शर्मा, भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष अनीता शर्मा, मेला प्रशासक सुधांशु गौतम, मेला अधिकारी राजेश जून व समाज सेवी संस्था लोक उत्थान क्लब के संस्थापक अध्यक्ष आरपी हंस सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों तथा मेला चैपाल पर भारी संख्या में उपस्थित लोगों ने भरपूर आनंद लिया।

 

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