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रतालू का बजट ..

चल बेटा उठ जा !
नहीं बापू  , अभी नहीं
उठ जा बेटा
पता नहीं क्या तुझे
कल टीवी में बता रहा था ।
कुछ बजट नाम का पुड़िया
छोड़ने वाला है सरकार ।
पर इससे क्या होगा बापू
कचड़ा ज्यादा मिलेगा बेटा ।
सरकारी बंगले के पीछे
चमरू ने बुलाया है मुझे ,
कहा है कि इस बार बोतल
खूब मिलेगी
अकेले नहीं बटोर पायेंगे
संग – संग बटोरेंगे ।
इस बार तो बड़े अफसरों
के घर के कामवाली  ने भी
कहलाया है ।
एक महीने तक खूब
दावतों का खेला होगा
कचड़ों का रेला होगा
उठ जा बेटा
चल बजट का मेला होगा ।
दूसरा दृश्य 
अरे बापू !
सुना है यहाँ के
गरीबों को पैसे मिलने
वाले हैं ।
हाँ बेटा !
पर राजनेता जो जन्म जात
गरीब हैं उनके लूटने से
बचे तो , हमें भी मिले ।
सुना है दुगुनी राशि
मिलेगी राजनेताओं को ।
लगता है गरीबी रेखा के
नीचे हैं ये नेता गण
इस बार तो डवांडोल
होना तय है बापू
फेकूराम की सरकार है ।
अच्छे दिन तो सरकारी
खजाने में चला गया ,
कालाधन विदेश में
रह गया ।
बेहतर जिंदगी का सपना
चाय -पकौड़े में तौला गया ।
कुछ इस तरह के संवाद हर रतालू के घर हो रहे हैं । इस बजट न जाने कितनों के दम तोड़ दे यह पता नहीं । परंतु मध्यम वर्ग की कमर तोड़ने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है ।
नौकरियों का संकट
मौजूदा सरकार की नई शिक्षा नीति केवल काग़जी नीति ही बनकर रह गई है । पढ़ाई के बाद सभी ग्रेजुएट को नौकरी नहीं मिल रही है । शिक्षा के साथ अर्थव्यवस्था के संकट और नौकरियों के अकाल से लगभग डेढ़ दशक में ही बोझ बनने लगी 2001 में शुरू की गई शिक्षा ऋण योजना ।
नौकरियों का संकट बढ़ा तो एजुकेशन लोन बनाने लगा छात्रों को डिफॉल्टर ।  संयुक्त राष्ट्र श्रम संगठन का आकलन है कि 2018 में भारत में बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 1.8 करोड़ हो सकती है । 2016 में यह संख्या 1.77 करोड़ और 2017 में 1.78 करोड़ थी ।
अब बारी 2018 की है ।
रेलवे सुरक्षा 
रेलवे को मिले 1.48 लाख करोड़ रुपए , सभी ट्रेन में वाई फाई की सुविधा होगी ।  अब रतालू को वाईफाई से क्या काम है ।उसे तो अपने माल बिक्री का उचित पैसा चाहिए जिससे वह अपने परिवार का पेट भर सके ।
5 लाख का बीमा गरीबों के नाम
गरीबों के लिए 5 लाख का बीमा योजना । वास्तव में यह देश के इतिहास की पहली योजना है जिसमें 50 करोड़ लोगों को 5 लाख का बीमा  किया जायेगा । अब देखना ये है कि  कितना रुपए कितने राजनेताओं को मिलते हैँ अंदर के दरवाज़े से । अब रतालू को कितना पैसा मिलता है ये तो पता नहीं पर राजनेताओं की जेब जरूर भरेंगे ।
गाँव व गरीब किसानों के लिये खास बजट
8 करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन और 4 करोड़ घरों को बिजली मुहैया कराने का वादा इस बार के बजट में किया गया है । पर रतालू के घर बिजली पहुँचने के आसार ज़रा कम ही दिख रहे हैं ।
चाहे जो भी हो रतालू को इस बजट से कोई खास उम्मीद भी नहीं थी । एक बोरा रद्दी और दो जून की रोटी ही उसके बजट का आधार है ।
सामान्य वर्ग तो पहले से ही पिसता आ रहा है । टैक्स छुट नहीं । स्टैंडर्ड डिडक्शन में सभी नौकरीपेशा को सिर्फ 5800 रुपए सालाना छूट दी है ।  होमलोन का जिक्र ही नहीं किया है । सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिये बैंकों और डाकघरों के जमा राशि पर ब्याज आय के धारा 80 टीटीबी के तहत 50 हजार रुपए की छूट दी है । ऐसी आय पर टीडीएस भी अब नहीं काटा जायेगा । इस  कर की छूट फिक्स डिपोजिट और आरडी योजनाओं के ब्याज पर भी लागू होगी ।
अब रतालू को इन सबका लाभ लेना हो तो कुछ साल और इंतजार करना होगा । इस बजट किसानों को बहुत कुछ मिला । कहीं सारे के सारे सांसद अपने को किसान घोषित कर सारी सुविधाएँ न ले लें । आयकर भी चुकाना नहीं पड़ता और कर्ज भी बिना रोक टोक के मिल जायेगा । बाद में घाटा सहना पड़े तो सरकारी खजाने से दिखाया जायेगा ।  70 लाख नयी नौकरियों का ऐलान भी हो गया है । अब हो सकता है रतालू के बेटे को नौकरी मिले । उसे अपने पिता की तरह रद्दी बेचकर गुजारा नहीं करना होगा ।
लेखिका
मल्लिका रुद्रा ” मलय- तापस “
बरतुंगा , चिरमिरी , छत्तीसगढ़
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