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तीन साल केजरीवाल: दिल्ली को क्या मिला, क्या नहीं?

चुनावी घोषणा पत्र में पार्टी ने मुफ्त पानी, सस्ती बिजली, सरकारी स्कूलों की हालत में सुधार, मोहल्ला क्लीनिक, 1.4 लाख CCTV कैमरा और लोगों के दरवाज़े तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने जैसे वादे किए थे. हालांकि तीन साल गुजर जाने के बावजूद कई चीज़ें अब भी अधूरी हैं जिनमें अवैध कॉलोनियों को नियमित करना, यमुना की सफाई और दिल्ली में सभी जगह वाईफाई मुहैया कराने जैसे वादे शामिल हैं.
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने 14 फरवरी को तीन साल पूरे कर लिए हैं. साल 2015 चुनावों में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीट जीत कर आम आदमी पार्टी ने ज़बरदस्त जीत हासिल की थी. चुनावी घोषणा पत्र में पार्टी ने मुफ्त पानी, सस्ती बिजली, सरकारी स्कूलों की हालत में सुधार, मोहल्ला क्लीनिक, 1.4 लाख CCTV कैमरा और लोगों के दरवाज़े तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने जैसे वादे किए थे. हालांकि तीन साल गुजर जाने के बावजूद कई चीज़ें अब भी अधूरी हैं जिनमें अवैध कॉलोनियों को नियमित करना, यमुना की सफाई और दिल्ली में सभी जगह वाईफाई मुहैया कराने जैसे वादे शामिल हैं. सीएम अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने वीडियो जारी कर अपने कामों की प्रशंसा तो की है लेकिन उस पर भी बीजेपी और कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली को क्या मिला क्या नहीं…

स्वास्थ्य:
बीते साल शहर में मोहल्ला क्लीनिक्स की संख्या 105 थीं जो कि अब बढ़कर 180 पहुंच गई है. हालांकि इनमें से अभी तक 160 ही पूरी तरह से काम कर रहे हैं. दिल्ली सरकार का वादा है कि आने वाले 2 सालों में इनकी संख्या बढ़कर 668 तक हो जाएगी.
बता दें कि चुनावी घोषणाप पत्र में ऐसे 1000 क्लीनिक्स का वादा किया था जो कि सिर्फ 18% ही पूरा हो पाया है. दिल्ली सरकार के मुताबिक मोहल्ला क्लीनिक्स के अलावा 97 पॉलीक्लीनिक्स और कई अस्पतालों में 2,579 बेड्स की संख्या बढ़ाई गई है.

शौचालय:
केजरीवाल ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 2 लाख सार्वजनिक शौचालयों का वादा किया था. हालांकि बीते तीन सालों में सिर्फ 21,000 ही बनकर तैयार हो पाए हैं. इस काम के लिए दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) को 18.86 करोड़ रुपए भी आवंटित किए गए थे लेकिन इनमें से भी सिर्फ 7.33 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं. दी गई रकम में से 61% का इस्तेमाल नहीं किया जा सका.

ट्रांसपोर्ट:
‘आप’ के मेनिफेस्टो में 11,000 नई बसों का वादा किया गया था जिसे बाद में 10,000 कर दिया गया. बीते तीन साल में हर डिपो को पांच नई बस मिली हैं जिससे नई बसों की संख्या में 895 का इजाफा हुआ है. इस पर अभी तक 134 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. सरकार का कहना है कि उसे नए डिपो बनाने के लिए ज़मीन नहीं मिल पाई जिससे पूरा प्रोजेक्ट अटका हुआ है.

शिक्षा:
दिल्ली सरकार का कहना है कि उसने बीते तीन साल में 8,000 नए क्लासरूम बनाए हैं. सरकार का दावा है कि उन्होंने कमिटी बनाकर प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ने पर भी नियंत्रण रखा है. इसके आलावा ‘उच्च शिक्षा गारंटी स्कीम’ के तहत 10 लाख तक के एजुकेशन लोन मुहैया कराए गए हैं. हालांकि 20 डिग्री कॉलेज शुरू करने का ‘आप’ का दावा खोखला साबित हुआ है और तीन साल में ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है. सरकार का कहना है कि डिग्री कॉलेज को एफिलेशन दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) से मिलना है लेकिन उसपर सर्कार का नियंत्रण नहीं है जिससे प्रोजेक्ट अटका हुआ है.

ई गवर्नेंस:
सरकार ने ई-डिस्ट्रिक्ट सर्विस की शुरुआत तो कर दी है लेकिन इसके बावजूद भी डॉक्युमेन्ट्स वेरिफिकेशन के लिए ऑफिस के चक्कर काटना मजबूरी बना हुआ है. इसके अलावा इस योजना का ज्यादा प्रचार भी नहीं हुआ है जिसके चलते लोग ऑनलाइन कि जगह एसडीएम ऑफिस आकर काम करवा रहे हैं. सरकार का दावा है कि 40 ऐसी सुविधाएं हैं जिन्हें पूरी तरह ऑनलाइन शुरू कर दिया गया है.

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