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पुस्तक समीक्षा : समकालीन कविता की नई खुशबू का आग़ाज़ है – सपनों की छाँव में ।

गीत ग़ज़ल और कविताओं की दुनिया हज़ारों वर्षों से अपने कोमलकान्त गातों से मानुष मन को प्रभावित एवं आकर्षित करती रही हैं किन्तु समय के साथ उनके स्वरुप और भाव में परिवर्तन का रंग भी दिखाई पड़ता है। अब लिखने वाले केवल प्यार मुहब्बत की बातें नहीं लिखते, मात्र रिश्ते नाते या प्रकृति सौन्दर्य का चित्रण ही नहीं करते, अब तो उन्हें अधजली रोटी, फटी लंगोटी, जीवन संघर्ष , सामाजिक असमानता, अपनी देश की मिटटी,सैनिकों का दर्द और मानवीय मूल्यों का क्षरण सब कुछ दिखाई देता है और फिर वे इन सारे दृश्यों को शब्दों में समेत लेने के लिए तत्पर हो जाते हैं ।चाहे उन्हें छंदों में बाँध लिया जाए या अतुकांत पदावलियों में वे समेट लेना चाहते हैं सुख दुःख और हर्ष विषाद के प्रति क्षण को अपनी रचनाओं में।

साहिल तनवीर एक ऐसा ही नाम है उस नवागत कलमकार का जिसने ‘सपनों की छाँव में’ नामक अपने काव्य संकलन के माध्यम से अपनी भावनाओं को शब्द रूप देने का सफल प्रयास किया है। संकलन की रचनाओं को पढ़ने से लगता है कि शायर के दिल में संचित जज्बात उसकी बहुमुखी प्रतिभा के प्रमाण हैं । उसकी दृष्टि मानव जीवन के प्रत्येक दृश्य की ओर गयी है और फिर उसने उन दृश्यों को गीत या गजलों की माध्यम से कागज़ को उतारने की कोशिश की है।

‘चाहत की बारिश’ शीर्षक रचना में रचनाकार ने अपने विश्वास को प्रकृति के अवदान से जोड़ने का सद्प्रयास किया है। व्यक्ति का विश्वास ही उसे कामयाब शायर बनाता है या शिष्ट मनुष्य। वह प्रेम में प्रकृति को देखता है और कह उठता है –

“अब इश्क की सदा पहुँच गयी है आसमानों तक

लहलहायेंगे ये खेत

झूमेंगे, नाचेंगे, गाएंगे हरे भरे पौधे

बंजर जमीन पर भी उग आएगी

कम से कम घास.”

यही तो है विश्वास, जिसके सहारे जीवन यात्रा आगे बढती है। साहिल तनवीर इस्लाम पंथ का अनुयायी होते हुए भी पहले एक मानवतावादी हैं। वह जानता है कि नबी साहब एक महान मानवतावादी थे फिर इस्लाम में आतंकवाद या फिरकापरस्ती की जगह कहाँ है ? जिसने कुरआन का सही अध्ययन किया है वह अमानवीय हो ही नहीं सकता। तनवीर कहता है –

“बुराइयों से रुक जाओ /
ख़ुदा का फरमान यही है
अपने आप पर जो काबू कर ले
जिहाद वही है
जो समझे / इंसानो, बेजुबानों का दुःख दर्द
बस मुसलमान वही है।”

वह मिट्टी जहाँ आदमी पैदा होता है उसके प्रति उसका प्रेम अटूट होता है निर्मल और भावनातमक लगाव होता है उस जमीन से। साहिल बिहार के चंपारण का निवासी है अपनी शस्य श्यामला भूमि के प्रति कृतज्ञ है। इसी सन्दर्भ में वह लिखता है –

“ है अरण्य / चम्पारण्य
खुशियों का अरण्य
शहर मेरा, गाँव मेरा,
मेरी पहचान, अभिमान मेरा
जहाँ है एक ही भाषा
प्रेम की भाषा। “

प्रेम और खिड़की का पुराना सम्बन्ध रहा है प्रेमियों की दुनिया में । साहिल की ग़ज़लों में इस भाव का बड़ी खूबसुरती से निर्वहन हुआ है। प्रेम ऐसा रोग है जिसे लग जाए उसकी नज़र प्रेमिका की खिड़की से हटती ही कब है ? साहिल लिखता है –

“ आजकल कहीं तबियत नहीं लग रही
सामने वाली खिड़की नहीं खुल रही
आलम है खलिश का और ये बंजारापन
कहीं उसकी जादूगरी तो नहीं चल रही ।“

वैसे तो जिन्दगी एक ऐसा शब्द है जिसकी परिभाषा सबों ने अपनी तरह से लिखी है। जो जिन्दगी को जिस नज़र से देखता है उसकी कलम उसी रूप में बोलती है । साहिल ने भी जीवन को अपनी तरह से देखा है और लिखता है –

“एक साँस जीने को दी है खुदा ने
एक साँस इबादत खातिर
यानि महज दो सांसों की कहानी
है ये जिंदगानी”

साहिल तनवीर में जीने की लालसा प्रबल है वह मुश्किलों से लड़ता है। घबराता नहीं, तभी तो कहता है –

“हिचकते हो साहिल
दो कदम बढाने में
मुश्किलें तो आती हैं
बुलंदियों को पाने में”

और फिर कहता है –
जीतने की शर्त ओ कवायद सुनो
हार पर हार हो, हार न मानो

कविता मात्र शब्दों की सजावट- बुनावट नहीं है । यह जीवन के विभिन्न पक्षों को शब्द सुमन में सजा कर उसकी सुरभि लुटाने का साधन भी है जो काम साहिल ने अपनी शायरी में बड़े सलीके से किया है। उसके प्रयासों में कुछ कमियाँ हो सकती है किन्तु चलने से ही तो रास्ता तय होता है। साहिल तनवीर में वे सब खूबियाँ है जो उसके काव्य सफ़र को सफल बनाने का माद्दा रखती हैं । उसकी कलम की ताकत दिन दिन बढे यही शुभकामनाएं है।

समीक्ष्य पुस्तक का नाम – सपनों की छाँव में
रचनाकार का नाम – साहिल तनवीर
समीक्षक – संतोष कुमार
प्रकाशक – स्टोरी मिरर इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड
नई दिल्ली –110008
प्रकाशन वर्ष –2018

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