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जंगल हमारे जीवन की अमूल्य निधि

वन क्षेत्र से अच्छी खबर आयी है। केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सोमवार को भारत राज्य वन रिपोर्ट 2017 जारी करते हुए कहा कि देश में पिछले 10 सालों के दौरान वन क्षेत्र में इजाफा हुआ है और देश वन क्षेत्र के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। अच्छी बात यह है कि सघन वन में 1.36ः की वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि अत्यंत सघन वन, वातावरण से सबसे अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित करते हैं। जैव विविधता से समृद्ध कच्छ या मैंग्रोव वनों में भी 181 वर्ग कि.मी की वृद्धि हुई है।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वन क्षेत्र के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल भारत में इन देशों के मुकाबले आबादी का दवाब कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बाकी 9 देशों में प्रति वर्ग किमी में 150 लोग रहते हैं । भारत में प्रति वर्ग किमी में 382 लोग रहते हैं। इसके बावजूद भारत का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का 24.4 प्रतिशत है। आबादी और पशु धन के दबाव के बावजूद भारत में वन क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। वार्षिक आधार पर सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में इजाफा करने वाले देशों में भारत का स्थान आठवां है। 2015 के पिछले आकलन के बाद दो सालों में देश में 8,021 वर्ग किमी वन क्षेत्र में इजाफा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश (2141 वर्ग किमी), कर्नाटक (1101 वर्ग किमी) और केरल (1043 वर्ग किमी) इन तीन राज्यों में वन क्षेत्र में अधिकतम वृद्धि हुई है। वन क्षेत्र के हिसाब से मध्यप्रदेश देश में 77,414 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के साथ सबसे ऊपर है। उसके बाद अरुणाचल प्रदेश (66,964 वर्ग किमी) और छत्तीसगढ़ (55,547 वर्ग किमी) का स्थान है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में वाह्य वन एवं वृक्षावरण का कुल क्षेत्र 582.377 करोड़ घन मीटर अनुमानित है, जिसमें से 421.838 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के अंदर है, जबकि 160.3997 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के बाहर है। पिछले आंकलन की तुलना में बाह्य एवं वृक्षावरण क्षेत्र में 5.399 करोड़ घन मीटर की वृद्धि हुई है, जिसमें 2.333 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के अंदर तथा 3.0657 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के बाहर हुई है। इस हिसाब से यह वृद्धि पिछले आंकलन की तुलना में 3 करोड़ 80 लाख घन मीटर रही। रिपोर्ट में देश का कुल बांस वाला क्षेत्र 1.569 करोड़ हेक्टेयर आकलित किया गया है।
जंगल हमारे जीवन की अमूल्य निधि हैं जो हमारे पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक स्थिति को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों से मानव समुदाय को अनेक बहुमूल्य वस्तुएं प्राप्त होती हैं। जिनमें स्वच्छ जल, वन्य प्राणियों के रहने के लिए स्थान, लकड़ी, भोजन, फर्नीचर, कागज, सुन्दर परिदृश्य सहित अनेक पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। पेड. कार्बन डाइ आक्साइड अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसकी मानवजाति को सांस लेने के लिए जरूरत पड़ती है। एक पेड़ अपनी पूरी उम्र के दौरान प्रकृति और मनुष्य को कई फायदे देता है। पेड़ तापमान नियंत्रण में भी अहम भूमिका अदा करता है। इस लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा पौधा रोपण करना चाहिए।
भारत में 657.6 लाख हेक्टेयर भूमि (22.7 प्रतिशत ) पर वन पाए जाते हैं। वर्तमान समय में भारत 19.39 प्रतिशत भूमि पर वनों का विस्तार है। गत नौ वर्षों में 2.79 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र विकास की भेंट चढ़ गये जबकि 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रत्येक साल घट रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज्यादा वन-सम्पदा है उसके बाद क्रमश मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में। भारत में राष्ट्रीय वन नीति के तहत देश के 33.3 प्रतिशत क्षेत्र पर वन होने चाहिए। यूएनईपी के मुताबिक, दुनियां में 50-70 लाख हेक्टेयर भूमि प्रति वर्ष बंजर हो रही है वहीं भारत में ही कृषि -योग्य भूमि का 60 प्रतिषत भाग तथा आकर्षित भूमि का 75 प्रतिषत गुणात्मक ह्नास में परिवर्तित हो रहा है। भारत में पिछले नौ सालों में 2.79 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र विकास की भेंट चढ़ गए जबकि यहां पर कुल वन क्षेत्रफल 6,90,899 वर्ग किलोमीटर है। वर्तमान समय में ऐसा नहीं है। वन-भूमि पर उद्योग-धंधों तथा मकानों का निर्माण, वनों को खेती के काम में लाना और लकड़ियों की बढती माँग के कारण वनों की अवैध कटाई आदि वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण है।
वन और जीवन दोनों एक-दूसरे पर आश्रित हैं। वनों से हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलता है और मनुष्य और अन्य किसी भी प्राणी का जीवन ऑक्सीजन के बिना नहीं चल सकता। वृक्ष और वन भू-जल को भी संरक्षित करते हैं। जैव-विविधता की रक्षा भी वनों की रक्षा से ही संभव है। विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए बहुमूल्य वनौषधियां हमें जंगलों से ही मिलती हैं। दुनिया में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से प्राकृतिक वनों पर मानव समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मानव जीवन की आवश्यकताओं के हिसाब से वनों के संतुलित दोहन तथा नये जंगल लगाने के लिए भी विशेष रूप से काम करने की जरूरत है। जंगलों से आग से बचाना भी जरूरी है। हरे-भरे पेड़-पौधे, विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, पठार, नदियां, समुद्र, महासागर, आदि सब प्रकृति की देन है, जो हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए आवष्यक है। वन पर्यावरण, लोगों और जंतुओं को कई प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं। जिसमें वन हमें भोजन ही नहीं वरन् जिंदगी जीने के लिए हर जरूरी चीजें मुहैया कराती है। पेड़ पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं और पृथ्वी के तापमान को नियंतत्रत करते हैं। पेड़ों की अंधाधुध कटाई एवं सिमटते जंगलों की वजह से भूमि बंजर और रेगिस्तान में तब्दील होती जा रही है जिससे दुनियाभर में खाद्य संकट का खतरा मंडराने लगा है। वन न केवल पृथ्वी पर मिट्टी की पकड़ बनाए रखता है बल्कि बाढ़ को भी रोकता और मृदा को उपजाऊ बनाए रखता है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

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