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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट : मोदी राज में कम नहीं हुआ भ्रष्टाचार

भारत में भ्रष्टाचार ने लगता है संस्थागत रूप धारण कर लिया है। देश और विदेश की अनेक जानी मानी संस्थाओं ने समय समय पर जारी अपनी रिपोर्टों में यह जाहिर किया है की लाख प्रयासों के बाद भी भारत में भ्रष्टाचार कम होने के बजाय बढ़ा है। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने खुलेआम यह कहा है की वे न तो खाएंगे और न खाने देंगे। मोदी अपनी बात पर कायम रहे मगर भ्रष्टाचार पर काबू नहीं पाया जा सका है। मोदी शासन के दौरान भी अनेक बड़े घोटालों का पर्दाफास हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के संज्ञान में आने के बाद भी इन पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई और घोटालेबाज देश छोड़कर भागने में सफल हुए।
भारत भ्रष्टाचार के मामले में हर साल नई सीढ़ियां चढ़ रहा है। दुनिया के भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक भ्रष्टाचार में भारत का स्थान हर साल बढ़ता जा रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर भारत के सरकारी क्षेत्र की छवि दुनिया की निगाह में अब भी खराब है। हद तो यह हो गई है कि मोदी राज में भ्रष्टाचार के मामले में भारत ने पाकिस्तान के आसपास आकर खड़ा हो गया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से जारी किए गए करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग गिरी है। 2016 में यह 79वें स्थान पर था और अब 81वें नंबर पर पहुंच गया है। 2017 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 180 देशों में सर्वे किया है, जिसमें भारत का नंबर 81वां है। जबकि 2016 में 176 देशों के बीच यह सर्वे किया गया था और तब भारत का स्थान 79वां था। इसके एक साल पहले 2015 में 76वां स्थान था। गैर सरकारी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 180 देशों की रिपोर्ट में भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रेस स्वतंत्रता के मामले में सबसे खराब स्थिति वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है।
मोदी सरकार देश में भ्रष्टाचार खत्म करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि देश में भ्रष्टाचार कम होने के बजाय बढ़ा है। आलम यह है कि इस सूची में भारत को चीन और भूटान से भी ज्यादा भ्रष्ट बताया गया है। चीन इस सूची में 41 अंक के साथ 77 वें स्थान पर है। वहीं भूटान 67 अंकों के साथ 26वें स्थान पर है।
सवासौ करोड़ की आबादी का आधा भारत आज रिश्वतखोरी के मकड़जाल में फंसा हुआ है। भ्रष्टाचार पर सर्वे की विभिन्न रिपोर्टों से यह खुलासा हुआ है। भारत में भ्रष्टाचार ने संस्थागत रूप ले लिया है। स्थिति यह हो गई है की बिना रिश्वत दिए आप एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकते। एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक इंडियन करप्शन सर्वे ने देश में एक पोल किया। इस पोल को करीब 200 शहरों में किया गया और करीब 1 लाख लोगों से आठ सवाल किए गए। जिसके बाद ये आंकड़ा सामने आया कि 50 प्रतिशत लोगों ने तरह-तरह की नौकरी पाने के लिए रिश्वत दी है। सर्वे में ये बात सामने आई है कि 10 में से 5 लोगों ने ये माना कि उन्होंने सरकारी सुविधा पाने के लिए बाबुओं को रिश्वत दी है। वहीं 10 में से 8 लोगों ने लोकल पुलिस, नगरपालिका अधिकारी और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के काम को लेकर रिश्वत दी है। ये सर्वे ऑनलाइन किया गया था।
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज ने देश के बीस राज्यों में भ्रष्टाचार को लेकर एक सर्वे किया है। पब्लिक डीलिंग कार्यों के आधार पर हुए सर्वे के मुताबिक, देश में सर्वाधिक भ्रष्टाचार कर्नाटक में है, जहां जनता को अपने कार्य करवाने के लिए सर्वाधिक तौर पर रिश्वत देनी पड़ती है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार सबसे कम है।
एशिया महाद्वीप में भ्रष्टाचार के मामले में भारत प्रथम स्थान पर है। एक सर्वे में पाया गया है कि भारत में रिश्वतखोरी की दर 69 प्रतिशत है। फोर्ब्स द्वारा किए गए 18 महीने लंबे सर्वे में भारत को टॉप 5 देशों में पहला स्थान दिया गया है। फोर्ब्स ने यह सर्वे मार्च, 2017 में प्रकाशित किया था। भारत में स्कूल, अस्पताल, पुलिस, पहचान पत्र और जनोपयोगी सुविधाओं के मामले जुड़े सर्वे में भाग लेने वाले लगभग आधे लोगों ने कहा कि उन्होंने कभी न कभी रिश्वत दी है। 53 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि 63 प्रतिशत मानते हैं कि आम लोगों पर उनके प्रयासों से कोई असर नहीं पड़ेगा।
हमारे देश में भ्रष्टाचार इस हद तक फैल चुका है कि इसने समाज की बुनियाद को ही बुरी तरह हिला कर रख दिया है। जब तक मुट्ठी गर्म न की जाए तब तक कोई काम ही नहीं होता। भ्रष्टाचार एक संचारी बीमारी की भांति इतनी तेजी से फैल रहा है कि लोगों को अपना भविष्य अंधकार से भरा नजर आने लगा है और कहीं कोई भ्रष्टाचार मुक्त समाज की उम्मीद नजर नहीं आरही है। मंत्री से लेकर संतरी और नेताओं तक पर भ्रस्टाचार के दलदल में फंसे है। हालात इतने बदतर हैं कि निजी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। सिविल सोसाइटी और मीडिया के दवाब में सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम तो दे रही हैं मगर उनकी गति बेहद धीमी है ।


वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

 

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