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भारत में बढ़ता भ्रष्टाचार

भारत में भ्रष्टाचार का रोग शनै:-शनै: बढ़ता ही जा रहा है। इस रोग से अब कोई भी अछूता नहीं रह गया है। हमारे जीवन का एक भी ऐसा क्षेत्र शेष नहीं रह गया जहां भ्रष्टाचार के असुर ने अपने पंजे न गड़ाए हों। देश के राजनैतिक हालात भ्रष्टाचार के घोर अंधकार में समाहित हो रहे है। नैतिक मूल्यों और आदर्शों का भी हिन्दुस्तान में कब्रिस्तान बन गया है। देश के सबसे छोटी इकाई पंचायत से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक व क्लर्क से लेकर बड़े पदाधिकारी तक सब भ्रष्टाचार की गिरफ्त में हैं। बिना घूस के तो आज सरकारी फाइल आगे ही नहीं सरकती। कुछेक अपवादों को छोड़कर आज सर्वत्र भ्रष्टाचार का बोलबाला नजर आ रहा हैं। ट्रांसपैरेंसी इंटरनशेनल ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के ग्लोबल करप्शन परसेप्‍शन इंडेक्‍स में भारत 81वें पायदान पर है। इस इंडेक्‍स में 180 देशों को शामिल किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र में फैले भ्रष्‍टाचार के कथित स्‍तर के आधार पर इसमें रैंकिंग दी गई है, जिसमें भारत को 81वें स्‍थान पर रखा गया है। 2016 में भारत 176 देशों की इस लिस्‍ट में 79वें स्‍थान पर था।
वस्तुतः भ्रष्टाचार का कद और ऊंचा हो गया है। अब तो लगता है कि आज के समय में ईमानदारी तो महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह गई है। हर क्षेत्र में जब तक जेब से हरे-हरे नोटों की उष्णता नहीं दिखाई जाये तब तक हर काम कछुआ चाल ही है। ना जाने कब पूरा होंगा राम भरोसे ! लेकिन जैसे हरे नोटों की गर्मी पैदा होती है तो काम की रफ्तार में तेजी होने लग जाती है। इस गर्मी के प्रक्रोप से बड़े-बड़े का ईमान पिघलने लगता है। बच्चों का शिक्षण संस्थान में दाखिला करवाना हो या किसी को सरकारी अस्पताल में एडमिट करवाना हो बिना ऊपरी आय दिए हो जाये यह संभव ही नहीं है। भ्रष्टाचार की दीमक ने देश को खोखला करके रख दिया है। सोने की चिड़िया वाला भारत आज भ्रष्टाचार के कीचड़ में धंस चुका है। हमारे नैतिक मूल्य व आदर्श सब स्वाह हो चुके है। बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार आचरण दोष का ही परिणाम है। आजकल अखबारों‚ टी.वी. व रेडियों में एक ही खबर सुनने व देखने को मिल रही है भ्रष्टाचार की। हर दिन अधिकारी व नेताओं के भ्रष्टाचार के काले करनामे उजागर हो रहे है। सारा का सारा माहौल्ल ही दूषित हो चुका है। देश में भ्रष्टाचार को मिटाकर सभी नागरिकों को रोटी‚ कपड़ा व मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना सरकार का काम ही नहीं अपितु राजनैतिक धर्म भी होता है। लेकिन आजादी से लेकर अब तक देश की सरकारें भ्रष्टाचार को मिटाने में विफल ही रही है। हर चुनाव में राजनेता अपने दल की आवश्यकता पूर्ति के लिए भ्रष्टाचार व घपले करते है। अगर यह घोटालें ना करें तो इनकी जरूरत पूरी ही ना हो।
भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण रिश्वतखोरी है। रिश्वतखोरी को सरल शब्दों में समझें तो ऊपरी की कमाई व घूस। आजकल रिश्वत लेना और देना फैशन बनता जा रहा है। बेधड़क रिश्वत का काला कारोबार बड़ी ही आसानी से फूल-फल रहा है। यह कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होंगी कि आज पटवारी से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक सब जगह कमोबेश रिश्वतखोरी ने पांव पसारे है। आये दिन दैनिक समाचार पत्रों में फलां-फलां अधिकारी या मंत्री के रिश्वत लेते कारनामे उजागर हो रहे है। अलबत्ता आज हरेक क्षेत्र रिश्वतखोरी के रंग में रंग चुका है। लोगों में रिश्वत देकर काम निकालवाने की प्रवृत्ति घर करती जा रही है। कुछ लोग करोंड़ो की रिश्वत देकर अरबों लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे है। जनमानस में धारणा बैठ गई है कि रिश्वत देने से हर जटिल काम सरल हो जाता है। इसलिए आज मंदिर में दर्शन के लिए, स्कूल अस्पताल में एडमिशन के लिए, ट्रेन में रिजर्वेशन के लिए, राशनकार्ड, लाइसेंस, पासपोर्ट के लिए, नौकरी के लिए, रेड लाइट पर चालान से बचने के लिए, मुकदमा जीतने और हारने के लिए, खाने के लिए, पीने के लिए, कांट्रैक्ट लेने के लिए रिश्वत दी जा रही है। सरकारी दफ्तरों में रिश्वत लेने का सिलसिला बहुत पुराना है। जब तक मुट्ठी गरम नही कि जाती तब तक फाईल एक मेज से दूसरे मेज तक सरकती नहीं है। इसी कारण भारत पूरे एशिया में रिश्वतखोरी के मामले में अव्वल पायदान पर है।
दुनिया भर में भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाले बर्लिन स्थित संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा कराये गये सर्वे के मुताबिक एशिया में एक चौथाई लोगों को पिछले साल सरकारी सेवा लेने के लिए घूस देनी पड़ी। संस्था के रिर्पोट में बताया गया है कि पाकिस्तान से ऑस्ट्रेलिया तक एशिया प्रशांत के 16 देशों में 20,000 लोगों के साथ बातचीत की गई। इस सर्वे से आये नतीजों के अनुसार 90 करोड़ लोगों को पिछले साल कम से कम एक बार सरकारी अधिकारियों की जेब गरम करनी पड़ी। इसी संदर्भ भारत में 10 में से करीब 7 भारतीयों को सार्वजनिक सेवाएं लेने के लिए किसी न किसी रूप में घूस देनी पड़ती है। रिश्वतखोरी के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शीर्ष पर है। केवल 14 प्रतिशत भारतीय ही यह मानते है कि कोई भी धार्मिक नेता भ्रष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार रिश्वत की दर भारत और वियतनाम में सबसे अधिक थी जहां दो तिहाई लोगों का मानना है सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसी आधारभूत सेवाओं के लिए भी उन्हें सरकारी कर्मचारियों को खुश करना पड़ा। इस सर्वे में जापान, दक्षिण कोरिया, हांग कांग और ऑस्ट्रेलिया में घूसखोरी के सबसे कम मामले बताये गये। जहां तक रिश्वत लेने वाले सरकारी अधिकारियों का सवाल है तो सर्वे के अनुसार घूस मांगने के मामले में पुलिस सबसे ऊपर है।
पिछले साल पुलिस के संपर्क में आने वाले करीब एक तिहाई लोगों ने माना कि उन्हें रिश्वत देनी पडी है। साथ ही संस्था का कहना है कि रिश्वतखोरी से सबसे ज्यादा गरीब लोग प्रभावित होते हैं। सर्वे में शामिल गरीब तबके के 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें रिश्वत देनी पड़ी। यह तादाद किसी भी आय वर्ग में सबसे ज्यादा थी। दुनिया के सबसे अधिक दस भ्रष्ट देशों में शीर्ष पर सोमालिया और दसवें पायदान पर वेनेजुएला है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार भारत, पाकिस्तान और थाइलैंड जैसे देशों में घूसखोरी का निशाना गरीब लोगों के बनने की संभावना ज्यादा है तो वियतनाम, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में उल्टा रुझान देखा गया। ऐसी बात नही है कि भारत अकेला ही रिश्वतखोरी की बीमारी से जूंझ रहा है अपितु दुनिया कई अन्य देश भी इस बीमारी से ग्रस्त है। हाल ही में वियतनाम के लोगों ने वहां की सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर नहीं होने के आरोप लगाये है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क गेउन हाय पर तो संसद ने दिसंबर में महाभियोग चलाया था और लाखों लोग उनके इस्तीफे की मांग में सड़कों पर उतरे थे। मलेशिया प्रधानमंत्री नजीब रजाक पर अरबों के गबन का आरोप है। बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए चीन और वियतनाम में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान सुचारु है। थाइलैंड की सैनिक सरकार भी अभियान के लिए आश्वासन दे चुकी है।
भारत में इस मर्ज के उपचार के लिए कई छोटे-मोटे ऑपरेशन किये गये पर अब तक पूर्ण सफलता हाथ नहीं लग पायी है। क्यूंकि भारतीयों का सोचना है कि कोई ओर खजाना लूटे इससे अच्छा तो पहले हम ही लूट लें। दुनिया में भारत की मिसाल दी जाती है कि यहां हर चीज मिलती है। यदि नहीं मिलती तो वो है ईमानदारी। यकीन मानईयें ! जब हमारे आंखों से ओझल हुई ईमानदारी लौटकर आ जायेंगी तब भारत को एक बार पुनः विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक पायेगा। आज बढ़ती रिश्वतखोरी की वृत्ति गरीब प्रतिभावान छात्रों में उदासीनता ही नहीं ला रही है अपितु उन्हें भविष्य के लिए काफी हद तक भयभीत भी कर रही है। काश ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारी कार्यालय में बढ़ती रिश्वतखोरी के लिए भी कोई स्वच्छ भारत अभियान का पाञ्चजन्य फूंकते। अतः रिश्वतखोरी और बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए सर्वप्रथम हमें बदलना होंगा। क्यूंकि रिश्वत देकर परेशानियां खड़ी करने वाले भी हम ही है और बाद में सरकार को कोसने वाले भी हम ही है। इसलिए इस बीमारी की रोकथाम के लिए भी हमें ही आगे आकर गंभीरता से प्रयास करने होंगे। अंत्वोगत्वा वक्त की मांग को देखते हुए सरकारों को अपने भ्रष्टाचार विरोधी वादों को पूरा करने के लिए ज्यादा प्रयास करने होंगे।
देवेंद्रराज सुथार 
स्थानीय पता – गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड – 343025
मोबाइल नंबर – 8107177196
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