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आतंक की फैक्ट्री चला रहा पाकिस्तान

भारत की आजादी और विभाजन के बाद भारत ने धर्मनिरपेक्ष, संप्रभु और लोकतंत्र का रास्ता चुना तथा पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र बना। यहीं से दोनों की राह जुदा हो गई। भारत दुनियां के सामने सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में उभरा .वहीँ पाकिस्तान छद्म लोकतंत्र के जरिये तानाशाही की और चला। दुनिया ने देखा पाक की नापाक हरकत और सेना की तानाशाही। इसके बावजूद अनेक देशों ने अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर पाक का समर्थन किया। अमेरिका ने देर से ही सही पाक की आतंकी गतिविधियों को समझा मगर विस्तारवादी चीन अभी भी पाक के समर्थन में खड़ा है। संयुक्त राष्ट्र चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है। इससे पाक का आतंकी हौसला बुलंद हुआ। अब जाकर अमेरिका सहित अनेक देश असलियत समझ पाए है और पाक की नापाक हरकतों को रोकने के प्रयास शुरू किये है। इनमें पाक को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को रोकना भी एक कदम है।
आतंकवाद को बढ़ावा देना पाकिस्तान को हर कदम पर भारी पड़ता जा रहा है। पहले अमेरिका ने इस कारण दी जाने वाली सभी सहायता राशियों पर रोक लगा दी थी। अब ताजा मामले में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाक को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया है। यानी अब टास्क फोर्स पाकिस्तान पर कड़ी निगाह रखेगा। वहीं पाक के लिए दूसरा बड़ा झटका ये रहा की चीन ने भी इस मामले में अपने कदम पीछे खींच लिए । फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक अंतरसरकारी संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1989 में गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनीलांड्रिंग, आतंकियों को धन मुहैया कराना और अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य खतरों के प्रति ठोस कार्रवाई करना है। संगठन द्वारा लिया गया फैसला सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होता है।
पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखे जाने का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से पेश किया गया जिसका समर्थन ब्रिटेन, फ्रांस और भारत जैसे देशों ने किया। रिपोर्ट के मुताबिक बैठक से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान का सदाबहार मित्र चीन ने भी पाकिस्तान का बचाव नहीं किया और उसने ग्रे सूची में रखने के खिलाफ अपनी आपत्ति वापस ले ली।
इस प्रस्ताव के लागू हो जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं एवं बैकों को पाकिस्तान में कारोबार करना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही पाकिस्तानी कारोबारियों को भी विदेशो में व्यापार करना आसान नहीं रह जाएगा। इसके पहले पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसे ग्रे सूची में डाले जाने से तीन महीने की राहत मिल गई है।
पाकिस्तान का आतंक के वैश्वीकरण में अद्वितीय योगदान है। जो देश ओसामा बिन लादेन को आश्रय देकर उसकी रक्षा करे उसे और क्या कहा जाना चाहिए। पाकिस्तान टेररिस्तान है। वह आतंकियों की इंडस्ट्री चला रहा है और उन्हें दुनियाभर में भेज रहा है। पाक को हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए कि कश्मीर हमारा अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान आतंकवाद का दूसरा नाम बन चुका है। पाकिस्तान की धरती विशुद्ध रूप से आतंक को ही पैदा करती है। आतंकी खुलेतौर पर सड़कों पर घूमते हैं। उन्हें पूरा संरक्षण हासिल है । पाकिस्तान ने न सिर्फ दुनिया भर में आतंकवाद फैलाने का काम किया है बल्कि अपने यहां मौजूद अल्पसंख्यकों पर भी जुल्म ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
चीन और पाकिस्तान दोनों पर यह कहावत सटीक और सही बैठती है। एक आतंकवादी है तो दूसरा विस्तारवादी और अतिक्रमणकारी। चीन ने हमारे शांतिप्रिय देश पर आक्रमण कर हमारी लाखों वर्ग गज भूमि जबरन हड़प ली और छोटे देशों को लगातार डरा धमकाकर कब्जे में लेने का प्रयास करता रहता है। वहीँ पाकिस्तान की नीवं ही खून खराबे पर रखी गई। पाक ने अपना मंसूबा पूरा करने के लिए कई बार भारत पर हमला किया मगर हर बार मुहं की खाई। कश्मीर का आधा हिस्सा हड़पे हुए है। वहां जनतंत्र कागजों में है। असल में वहां सेना का राज है। सैनिक तानाशाही है। हमारे कश्मीर के युवकों को लगातार भड़का कर सेना पर हमले करवाता है। आये दिन पाक के घुसपैठियें हथियारों के साथ सीमा पार कर भारत में घुसते है और खून खराबा कर भाग जाते है। इस मामले में पाक और चीन दोनों ही भारत के साथ हमेशा से ही शत्रुता रखते है और भारत में आतंककारी हमले करवाकर शांति भंग करते है। भारत ने भी अब पाक को सबक सीखना शुरू कर दिया है। संसार के देश भी अब पाकिस्तान की आतंककारी गतिविधियों को अच्छी तरह समझ गए है और उसे आतंककारी घोषित कर प्रतिबन्ध लगाने की शुरुआत कर चुके है। अमेरिका का उदाहरण हमारे सामने है मगर इतने से ही काम नहीं चलेगा। जरुरत इस बात की है की पाक को दी जानेवाली आर्थिक मदद रोकी जाये तभी आतंक पर लगाम लगेगी।
अमेरिका ने कहा कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों पर कार्रवाई नहीं करता है। उसने कहा कि पाक में लश्कर, जैश आतंकियों का ठिकाना है। साथ ही अमेरिका ने पठानकोट हमले का जिक्र भी किया है। अमेरिका के इस कदम से भारत के उस दावे को मजबूती मिलती है जिसके मुताबिक पाकिस्तान आतंकियों की मदद करता है। पहले अमेरिका के डिफेंस मंत्रालय की एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में तमाम आतंकवादी गतिविधियों का हवाला देते हुए यह सलाह दी गई थी कि पाकिस्तान में आतंकियों को शह दी जा रही है। इसी के आधार पर पाकिस्तान को इन देशों की लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश की गई थी।
अब पाकिस्तान से आने वाले आतंककारियों की तादाद भले ही कम हुई है पर हमले की ताकत बढ़ गई है। पहले के मुकाबले ज्यादा प्रशिक्षित आतंककारी आ रहे हैं। वे ज्यादा बड़े हथियार और बारूद लाते हैं। सैन्यबलों से लड़ने में सक्षम होते हैं। पहले सीमा पार से हमारे खिलाफ ’प्रॉक्सी वॉर’ (प्रतिनिधि युद्ध) हो रही थी और अब वे सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। पाकिस्तानी चाहते हैं कि कश्मीर का मुद्दा जीवित रखा जाए। वहां उग्रवाद का स्वरूप बनाए रखा जाए।

बाल मुकुंद ओझा

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