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आंख खोलने के लिए आंकड़े ही काफी है

सरकार द्वारा धीरे धीरे सरकारी लाभकारी योजनाओं और बैंक खातों सहित अन्य सेवाओं को आधार कार्ड से जोड़ने के निर्देशों का लाख विरोध किया जा रहा हो पर जो परिणाम निकल कर आ रहे हैं वे निश्चित रुप से देश व आमजन के हित में ही माने जा सकते हैं। वैसे तो लाख विरोध किए जा सकते हैं पर आंकड़े आंख खोलने के लिए काफी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत फर्जी राशन कार्डों से 12 करोड़ लोग योजना के लाभार्थी नहीं होने के बावजूद पीडीएस योजना का लाभ ले रहे थे। देश में पिछले तीन सालों में दो करोड़ 75 लाख फर्जी राशन कार्डों को रद्द किया गया है। अब यह परिणाम तो जांच के बाद ही निकल पाएगा कि इन राशन कार्डों से पीडीएस की सामग्री बीच में ही गायब हो रही थी या फिर फर्जी लोग ले रहे थे। पर यह तय हो गया कि तीन सालों में 17 हजार करोड़ रुपए का चूना सरकार को लगाया जा चुका है। दरअसल सरकार ने पीडीएस सेवाओं सहित कई सेवाओं के लिए आधार की अनिवार्यता कर दी है। आधार कार्ड से जुड़ने के बाद देश में पोने तीन करोड़ कार्ड फर्जी पाए गए हैं। यानी की प्रतिमाह करीब 12 करोड़ लोगों को फर्जी तरीके से राशन सामग्री उपलब्ध कराकर या फर्जी राशन कार्डों के नाम से उठाकर जनता के धन को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
सरकारी लाभकारी योजनाओं के साथ लीकेज की बात सीधे सीधे जुड़ी होने से राजीव गांधी द्वारा यह कहा जाना कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले एक रुपए में से 15 पैसे ही आम आदमी तक पहुंचते हैं और 85 पैसे बीच रास्ते में ही हड़प लिए जाते हैं। यह यथा़र्थ होने के कारण ही सरकार ने चरणवद्ध तरीके से डिजिटाइजेशन की और कदम बढ़ाए और अब एक कदम आगे बढ़ते हुए सरकारी सुविधाओं और खातों को आधार कार्ड व पेन कार्ड से जोड़ने की अनिवार्यता कर दी। हांलाकि सरकारी निर्णय के खिलाफ खासतौर से आधारकार्ड को लेकर आए दिन न्यायालय की शरण ली जा रही है और इसे निजता का उल्लंघन माना जाने लगा है। पर व्यवस्था की खामी को रोकने के लिए सरकार को कोई ना कोई तो फूलप्रूफ सिस्टम विकसित करना ही पड़ेगा। इस बात से लगभग सभी सहमत होंगे कि राशन कार्डो से कालाबाजारी कोई नई बात नहीं है। हद तो यहां तक हो रही थी कि देश के सभी राज्यों में कमोबेस फर्जी राशन कार्ड जांच में सामने आने के बाद निरस्त किए गए हैं। आंकड़े तो यहां तक कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक जिले में करीब 12 लाख राशन कार्ड फर्जी पाए गए। यूपी में 68 लाख, बंगाल में 66 लाख, दिल्ली में 64 हजार, झारखण्ड मंे साढ़े चार लाख से अधिक राशन कार्ड फर्जी होने के कारण निरस्त किए गए। इसी तरह से अन्य प्रदेशों की स्थिति रही। यह तो फर्जी राशन कार्डों के निरस्तीकरण के आंकड़े हैं दूसरी तरफ यह आंकड़ा भी कम नहीं हैं कि गरीब को वितरित होने वाले गेहंू या अन्य सामग्री राशन की दुकान तक ही नहीं पहुंचती और सीधे फ्लोरमिलों तक पहुंच कर मंहगे आटे के रुप में बाजार में बिकने आ जाती है। आए दिन ट्र्क के ट्र्क गोदामों से मिलते हैं। हांलाकि सरकार ने जीपीएस व पोस सिस्टम से सुधार के काफी व सकारात्मक प्रयास किए हैं और इसमें कोई दो राय नहीं कि इससे लीकेज भी कम हुआ है।
राशन की सामग्री सस्ती मिलने से यह सारी हेराफेरी होती है। हांलाकि जब राशन कार्ड या फर्जी तरीके से लिए जा रहे अनुदान लाभोें पर रोक लगती है तो तात्कालीक रिएक्सन सरकार की गरीब बिरोधी होने का आता है, गरीबों का निबाला छिनने का आता है पर व्यवस्था में सुधार और वास्तविक लाभार्थी तक लाभकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार को इस तरह के कदम उठाना अब आज की आवश्यकता बन गई है। पेंशन व अन्य योजनाओं के सीधे खातों में भुगतान से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी है और लाभार्थी तक सरकारी अनुदान सहायता पहुंचने लगी है। इससे दो लाभ होने लगे हैं एक तो समय पर भुगतान और दूसरा लीकेज पर अंकुश। इसी तरह से बैंक खातों को आधार से जोड़ने से बैंकों से फर्जी लेने देन आदि पर कुछ अंकुश लगा है। हांलाकि नीरव मोदी या रोटामेक या माल्या जैसे मामलें सामने आए हैं। इससे यह भी साफ हो गया है कि जिस बैंक सेवा पर हमें गर्व होता था, जिसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था आज कठघरे में खड़ी हो गई है। बैंकों की प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा है। यह भी साफ हो गया है कि नोटबंदी जैसे निर्णयों में सरकार की किरकिरी कराने में बैंकों की अधिक भूमिका रही है। बैंकों के खातों को आधार से जोड़ने से जहां ऋणदाताओं का दायरा ब़ढ़ा हैं वहीं लाखों मुखोटा कंपनियां सामने आई है और सरकार को इन्हें निरस्त करने का निर्णय करना पड़ा है। आखिर सरकार के सख्त व सुधारात्मक फैसलों के परिणाम सामने आने लगे हैं पर यह भी सही है कि सरकार की छवि सुधार में इनका सीधा लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि सरकारी निर्णयों चाहे राशन कार्ड निरस्त करने को हो या इन्हें सरकार की नकारात्मक छवि बनाने में अधिक उपयोग किया जाता रहा है। सरकार को इन फैसलों के नतीजों को प्रभावी तरीके से सामने रखना होगा और देश में जो गलत हो रहा हैं उसे आमजन के सामने प्रभावी तरीके से रखने और देश में लगी दीमक को नष्ट करने के काम को जारी रखना होगा। देरसबेर इनके परिणाम देशहित में ही होंगे। और लाभार्थी तक 15 पैसे पहुंचने की स्थिति पूरी तरह से बदलेगी तभी गरीब का हित हो सकेगा।

डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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